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पीएम मोदी के इजरायल दौरे से रणनीतिक रिश्तों में नई गहराई की उम्मीद : लॉरेन डागन अमोस

तेल अवीव। इजरायल के तेल अवीव से भारत की राजनीति और विदेश नीति पर शोध करने वाली विशेषज्ञ लॉरेन डागन अमोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा को लेकर इजरायल में गर्व, आभार और उत्साह का माहौल है।

अमोस के अनुसार, पीएम मोदी के दौरे के दौरान भारत की तेज आर्थिक प्रगति, डिजिटल परिवर्तन और मजबूत होती कूटनीति प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। उन्होंने आईएएनएस से बताया कि लोग पीएम मोदी को देखने के लिए बेहद उत्साहित हैं, क्योंकि वे हर विदेशी दौरे में भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़ते हैं और यही जुड़ाव इस बार भी उत्साह का कारण है।

लॉरेन डागन अमोस ने इस बैठक को विशेष बताते हुए कहा कि यह पहली मुलाकात नहीं है, लेकिन मौजूदा समय में इसका महत्व कहीं अधिक है। इस यात्रा के दौरान दोनों देश आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक साझेदारी और रक्षा क्षेत्र में समझौते कर सकते हैं।

भारत और इजरायल के संबंधों के इतिहास पर बात करते हुए अमोस ने कहा कि पूर्ण राजनयिक संबंध जनवरी 1992 में स्थापित हुए थे। हालांकि वास्तविक बदलाव 2014 के बाद स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। पहले संबंध सीमित दायरे में और अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक चर्चा में रहते थे, लेकिन बाद में यह रिश्ता खुलकर सामने आया और रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और संस्कृति तक विस्तृत हुआ।

अमोस ने सुरक्षा सहयोग पर बात करते हुए कहा कि भारत और इजरायल कई समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। दोनों देश देश के भीतर और बाहर चरमपंथी कट्टरपंथ से निपट रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य अभियानों और गाजा संघर्ष के दौरान वायु रक्षा प्रणालियों का महत्व स्पष्ट हुआ है। उनके मुताबिक दोनों देश एक-दूसरे से सीख सकते हैं और यह पारस्परिक सीख भविष्य में संबंधों को और अधिक गहरा और रणनीतिक बनाएगी।

अमोस ने यह भी कहा कि पीएम मोदी का यह दूसरा इजरायल दौरा अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है। 2017 से पहले कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल नहीं आया था। पहले केवल पूर्व प्रधानमंत्री या पूर्व राष्ट्रपति स्तर की यात्राएं होती थीं। मौजूदा कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच पीएम मोदी का आना विशेष संदेश देता है। अमोस ने यह भी कहा कि 7 अक्टूबर के बाद से भारत ने लगातार इजरायल के प्रति समर्थन का रुख बनाए रखा और दोनों देशों के संबंधों में कोई दूरी महसूस नहीं हुई।

भारत-इजरायल आर्थिक सहयोग पर बात करते हुए अमोस ने कहा कि निवेश इस संबंध की बुनियाद रहा है। औपचारिक संबंधों से पहले भी कृषि और जल प्रबंधन सहयोग के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। उन्होंने एक दिलचस्प प्रसंग साझा करते हुए कहा कि पीएम मोदी 2002 में जब गुजरात के सीएम थे, तब उन्होंने इजरायल का दौरा किया था और वहां की कंपनी नेटाफिम सहित विभिन्न निवेशों को देखा था। पीएम मोदी इन निवेशों को हमेशा याद रखते हैं और वास्तविक सहयोग की सराहना करते हैं।

उन्होंने भारत में चल रही संभावित समझौतों की चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। अमोस ने कहा कि जिन सौदों की चर्चा हो रही है, उनमें से कई पहले ही हस्ताक्षरित हो चुके हैं। इस यात्रा में शायद बहुत बड़ा नया समझौता न हो, लेकिन यह यात्रा भविष्य के अनेक समझौतों के लिए रास्ता जरूर खोलेगी।

सुरक्षा संबंधों की गहराई पर बात करते हुए अमोस ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग और मजबूत हुआ है। तीन महीने पहले भारत के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक स्तर की यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।

अमोस ने आगे कहा कि दोनों देशों को केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विकास के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ानी चाहिए। इजरायली उद्योगों को भारत में और अधिक निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसर तलाशने चाहिए, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

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