पंजाबराज्य

खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विपक्ष नेता को कड़े हाथों लिया

चंडीगढ़। पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज राज्य की खनन आय को 20,000 करोड़ रुपये तक ले जाने संबंधी आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा को कड़े हाथों लिया।

खनन गतिविधियों से लगभग 20,000 करोड़ रुपये की आय संभव होने संबंधी पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कैबिनेट मंत्री ने तथ्यों सहित जवाब दिया और साथ ही बाजवा से पूछा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान खनन राजस्व कभी 120 करोड़ रुपये से ऊपर क्यों नहीं गया?

उन्होंने कहा कि चल रहे खनन सुधारों और नीतिगत पहलों के माध्यम से इस क्षेत्र से राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने दोहराया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार द्वारा पोटाश की खोज और प्रगतिशील खनन सुधारों के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयास पंजाब के लिए 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं।

माइनिंग से अनुमानित राजस्व संबंधी अपने पहले दिए गए बयान को स्पष्ट करते हुए कैबिनेट मंत्री ने पंजाब विधानसभा में कहा कि यह अनुमान राजस्थान से सटे पंजाब के कुछ क्षेत्रों, विशेष रूप से फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जैसे जिलों में पहचाने गए पोटाश खनिज भंडारों की विशाल संभावनाओं पर आधारित है। उन्होंने बताया कि पोटाश एक महत्वपूर्ण खनिज है, जिसका लगभग 96 प्रतिशत देश द्वारा आयात किया जाता है और पंजाब में इसकी मौजूदगी की संभावनाओं के बारे में पिछली सरकारों ने योजनाबद्ध तरीके से कोई गंभीर पड़ताल नहीं की।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के समक्ष लगातार उठाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंचों पर खनन मंत्रियों की बैठकों के दौरान तथा पंजाब में खोज कार्यों में तेजी लाने की अनुमति देने के लिए आधिकारिक संवाद माध्यमों से इस मुद्दे को बार-बार मज़बूती से उठाया गया।

उन्होंने बताया कि मान सरकार के आने के बाद इस क्षेत्र में लगातार काम किया गया। पिछले वर्ष कोणार्क (ओडिशा) में केंद्रीय खनन मंत्री जी किशन रेड्डी की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्यों के खनन मंत्रियों की बैठक के दौरान उन्होंने यह मुद्दा उठाया कि जब क्रिटिकल मिनरल्स की बात की जाती है तो सबसे महत्वपूर्ण खनिज पोटाश पर पर्याप्त काम क्यों नहीं हो रहा। उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान में लगभग 200 स्थानों पर ड्रिलिंग की गई, जबकि पंजाब में केवल 9 स्थानों पर, जो स्पष्ट भेदभाव है। उस समय केंद्रीय खनन मंत्री ने अधिकारियों को पंजाब जाकर स्थिति का अध्ययन करने के निर्देश दिए।

इसके बाद विभाग की ओर से कई पत्र लिखे गए और दिल्ली में उन्होंने पुनः जी किशन रेड्डी से मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया। 10 जनवरी को गांधीनगर (गुजरात) में हुई बैठक के दौरान भी उन्होंने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की, जिसके बाद अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए और काम आगे बढ़ा।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अब नई ड्रिलिंग और सर्वेक्षण पहल शुरू की गई हैं। फाजिल्का में लगभग 48 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाले भू-वैज्ञानिक खोज कार्यों को लगभग 19 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई है और प्रक्रिया को तेज करने के लिए अन्य ड्रिलिंग स्थलों की भी जांच की जा रही है।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि खोज प्रक्रिया के दौरान लिए गए पोटाश नमूनों के प्रारंभिक मूल्यांकन में इसकी अच्छी गुणवत्ता सामने आई है, जिससे भविष्य में खनन की संभावनाओं के प्रति राज्य का विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि भले ही खनिजों की खोज और नीलामी से संबंधित शक्तियां केंद्र सरकार के पास हैं, लेकिन इसकी रॉयल्टी का लाभ राज्य के सरकारी खजाने में ही जमा होगा, जिससे वाणिज्यिक खनन शुरू होने पर पंजाब के वित्तीय संसाधनों को और मज़बूती मिलेगी।

खनन गतिविधियों को लेकर उठाई जा रही चिंताओं का जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन के लिए बाढ़ रोकथाम और बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के तहत किए जाने वाले डी-सिल्टिंग कार्यों और अवैध खनन के बीच अक्सर जानबूझकर भ्रम पैदा किया जाता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में आई बाढ़ के बाद नदियों के चिन्हित संवेदनशील हिस्सों में बड़े स्तर पर गाद निकालने और सुदृढ़ीकरण के कार्य शुरू किए गए हैं, जिनमें लगभग 500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से करीब 180 स्थानों पर सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ कड़ी निगरानी बनाए रखी है और इस संबंध में अब तक 1573 से अधिक एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ 1655 चालान भी पेश किए गए हैं। इसके अलावा जनहित में लुधियाना-रोपड़ राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना सहित बड़े बुनियादी ढांचा कार्यों के लिए आवश्यक मिट्टी लगभग 6 रुपये प्रति घन फुट के बाजार मूल्य के मुकाबले 3 रुपये प्रति घन फुट की दर से उपलब्ध कराई गई। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के लिए लगभग चार करोड़ घन मीटर मिट्टी का उपयोग किया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान खनन से मिलने वाला राजस्व कभी भी 120 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हुआ, जबकि मौजूदा सरकार द्वारा 2022 में सत्ता संभालने के समय ही यह 234 करोड़ रुपये हो गया था और अब बढ़कर लगभग 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

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