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“जहां चाहे, जब चाहे मारेंगे…”, ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सेना का जोरदार संदेश, कोई आतंकी पनाहगाह अब सुरक्षित नहीं

जयपुरः सेना ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर(पीओके) में ध्वस्त किए गए आतंकवादी ठिकानों को अब पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में ले जाया जा रहा है लेकिन उन्हें अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि वे बेशक कहीं भी छिप जाएं वहां सुरक्षित नहीं हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के संचालन महानिदेशक रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, वायु सेना के संचालन महानिदेशक रहे एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती और नौ सेना के संचालन महानिदेशक वाइस एडमिरल ए एन प्रमोद ने भारत के सैन्य इतिहास के सफल और सबसे अधिक बहुचर्चित अभियान की पहली वर्षगांठ पर पिछले एक वर्ष के परिदृश्य पर गुरुवार को यहां सेनाओं का दृष्टिकोण रखा।

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “हमें पता चला है कि वहां दोबारा से आतंकवादी ठिकाने बनाए जा रहे हैं। इन आतंकवादी ठिकानों और इनमें मौजूद आतंकवादियों की संख्या समय-समय पर घटती बढ़ती रहती है।”

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान में 300 किलोमीटर से अंदर तक मार की थी इसे देखते हुए अब कुछ आतंकवादी ठिकानों को सुरक्षा के लिए लिहाज से भीतरी इलाकों में ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं ने साबित कर दिया है कि वह पाकिस्तान में किसी भी जगह को कभी भी निशाना बनाने में सक्षम है । उन्होंने कहा कि आतंकवादी कहीं भी छिप जाएं उनका कोई भी ठिकाना अब सुरक्षित नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को कथित रूप से चीन और तुर्की की ओर से परोक्ष मदद से जुड़े सवाल पर लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा, “हमें एक से लड़ना है या एक साथ तीन से लड़ना है इसकी चिंता नहीं है क्योंकि भारतीय सेनाएं निरंतर अपनी क्षमता बढ़ा रही है और वे किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।”

वाइस एडमिरल भारती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य मकसद आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करना था और इस उद्देश्य को पूरी तरह हासिल कर लिया गया। इस अभियान का दूसरा उद्देश्य सीमा पार यह कड़ा संदेश देना था कि भारत आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा और इसके लिए सीमा पार बहुत जोरदार तथा सटीक हमले किए गए। ऑपरेशन सिंदूर के जारी रहने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि भारतीय सेनाएं किसी भी स्थिति से निपटने के लिए लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही है और दुश्मन भविष्य में किसी भी दुस्साहस के इससे भी भयानक परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के जारी रहने के औचित्य पर कवि रामधारी सिंह दिनकर कि इन पंक्तियों का हवाला दिया,” समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।” ऑपरेशन सिंदूर के जारी रहने के औचित्य पर लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि जब जब आतंकवाद की घटना होगी उसका बेहद कड़ा और दर्द पहुंचाने वाला जवाब दिया जाएगा।

उन्होंने कवि दुष्यंत की इन पंक्तियों का भी हवाला दिया, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।” एयर वाइस मार्शल भारती ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान आतंकवादियों के नौ ठिकाने ध्वस्त किए गए, 11 हवाई पट्टी नष्ट की गई और पाकिस्तानी वायु सेना के 13 विमान मार गिराए गए। भारतीय सेनाओं की कार्रवाई में सो आतंकवादी मारे गए और पाकिस्तानी सेना के लगभग 100 सैनिक भी मारे गए। उन्होंने कहा कि इस जबरदस्त प्रहार से पाकिस्तानी सेना ने घुटने टिका दिए और वह आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हो गई।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कार्रवाई रोकने के पाकिस्तान के अनुरोध को इसलिए मान लिया क्योंकि सेनाओं ने भारतीय नेतृत्व द्वारा उन्हें दिए गए लक्षण को हासिल कर लिया था। एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख ( संचालन) लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में तबाही मचाने वाली एस 400 रक्षा प्रणाली की रूस से एक खेप एक महीने के अंदर और दूसरी इस वर्ष के अंत तक भारत को मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ एस 400 मिसाइल प्रणाली के तर्ज पर स्वदेशी कुशा मिसाइल प्रणाली पर तेजी से कम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोई अन्य स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास का भी काम किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत में व्यापक नुकसान करने के पाकिस्तान के दावों से जुड़े सवालों पर अधिकारियों ने कहा कि लड़ाइयां केवल आख्यानों या झूठे बयानों से नहीं जीती जाती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के यह दावे निराधार और तथ्यहीन है। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान में की गई और सैन्य कार्रवाई का सबूत और तथ्य पेश किए हैं जबकि पाकिस्तान ने केवल बयान बाजी की है और कोई सबूत तथा आंकड़े पेश नहीं किए हैं।

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