उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

लखनऊ अग्निकांड : “मुझ जैसे छोटे अधिकारी का निलंबन अन्याय! “गाड़ी देरी से पहुंचने के जिम्मेदार हैं सीएफओ”, सवाल उठाने वाले FSSO का एक और वीडियो जारी

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह ने सीएफओ को बताया जिम्मेदार! फिर नया वीडियो जारी करके क्यों मांग रहे माफी

यूपी की राजधानी लखनऊ को दहलाने वाला अलीगंज अग्निकांड, जिसमें 15 होनहार युवाओं की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस खौफनाक घटना में जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करने का वक्त है। एसआईटी जाचं कर रही है। चार आरोपी गिरफ्तार हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इनमें इंदिनानगर के फायर स्टेशन सेकेंड इंचार्ज (एफएसएसओ) कमलेंद्र कुमार सिंह भी शामिल हैं। लेकिन एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह ने घटनास्थल पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचने में देरी के लिए सीधे तौर पर सीएफओ को जिम्मेदार ठहराया है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र और वीडियो संदेश में एफएसएसओ ने कहा कि, ” मुझ जैसे छोटे अधिकारी पर कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। मुख्य जिम्मेदारी सीएफओ की है। आग लगने के बाद दमकल प्रक्रिया में देरी और समन्वय की कमी, सीधी सीएफओ की लापरवाही दर्शाती है। घटना की संपूर्ण जिम्मेदारी सीएफओ की है। सीएफओ के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करके पीड़ितों को न्याय दिया जाए”

एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह ने पत्र में लिखा कि, ” मेरा सीमित कार्यक्षेत्र है। भवनों को फायर क्लियरेंस देना या सुरक्षा मानकों को लागू करवाना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह जिम्मेदारी सीएफओ की है। जिस इमारत को आवासीय उपयोग के लिए पास किया गया था, उसे वर्षों से अवैध तरीके से व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था-यह तथ्य सीएफओ के संज्ञान में होना चाहिए था।”

कमलेंद्र सिंह का ये पत्र और वीडियो वायरल होने के बाद हंगामा खड़ा हो गया। लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं कि छोटे अधिकारी को बलि का बकरा बना दिया गया। बड़ी मछलियां बच गईं। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद अब कमलेंद्र सिंह का एक और बयान सामने आया है। इसमें वह अपने पहले बयान को लेकर माफी मांगते सुने जा रहे हैं। कहते हैं कि उन्हें भ्रमित करके वीडियो बनवाया गया था। उन्हें शासन-व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास है।

45 मिनट देरी से पहुंची दमकल टीम 

अलीगंज अग्निकांड में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां, आग लगने के करीब 45 मिनट बाद पहुंची थीं। फिर भी उनके पास राहत के भरपूर संसाधन नहीं थे। पुलिसवालों ने हथौड़ों से दीवार तोड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अगर दमकल विभाग की टीम समय रहते पहुंच जाती तो शायद कुछ जानों को बचाया जा सकता था। इसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश भी दिखा और वे फायर सुरक्षा विभाग पर सवाल उठा रहे हैं। सनद रहे कि जब भी कहीं अग्निकांड होते हैं। फायर ब्रिगेड की टीम के वक्त न पहुंचने के आरोप सामने आते रहते हैं। एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह अपने खिलाफ हुई सस्पेंशन कार्रवाई से दुखी होकर ही सही, अपने विभाग की सच्चाई बयान कर गए। उन्होंने गाड़ियां पहुंचने में देरी को लेकर विभाग के बीच समन्वय न होने की कमी का भी जिक्र किया है। जाहिर है कि सीएफओ भी अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकते हैं, क्योंकि पूरी जिम्मेदारी तो उन्हीं की है।

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