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हजरत कासिम की शहादत और प्यास के मंजर ने रुलाया…अजादारों ने बहाए आंसू

मोहर्रम की 7 तारीख को हजरत इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम की शहादत का मंजर पेश किया गया। अपनी शादी के अगले ही दिन शहीद होने वाले हजरत कासिम को याद कर अजादारों ने खूब आंसू बहाए। इमामबाड़ा गुफरानमआब में मौलाना कल्बे जवाद ने 7वीं मजलिस को खिताब किया। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हसन जब दुनिया से रुख्सत हो रहे थे तब उन्होंने हजरत कासिम के बाजू पर एक ताबीज बांधा था और कहा था कि जब बहुत मुश्किल वक्त आये तो यह ताबीज खोल देना। हजरत इमाम हुसैन ने जब हजरत कासिम को जंग पर जाने की इजाजत नहीं दी तो उन्होंने ताबीज खोल दिया। उसमें लिखा था कि मैं कर्बला में मौजूद नहीं रहूंगा। मेरी जगह पर तुम अपने चचा पर अपनी जान कुर्बान करना। इमाम हुसैन उसे पढ़कर खूब रोये और इसके बाद कासिम को गोद में उठाकर घोड़े पर सवार कर दिया। 13 साल के हजरत कासिम कर्बला के मैदान में शहीद हो गए।

अकबरी गेट स्थित इमामबाडा सैय्यद तक़ी साहब में मंगलवार को अशरा ए मजालिस की 7वीं मजलिस को मौलाना सैफ अब्बास ने विलायत के शीर्षक पर खिताब किया। उन्होंने कहा कि कुरान पढ़ना तिलावत होती है और अली अली करना इबादत होती है। जैसे कुरान सुनना इबादत है वैसे ही मजलिस में बैठकर फजायल ए अली सुनना भी इबादत है। उन्होंने कहा कि गदीर में अल्लाह का हुक्म हुआ कि पैगम्बर उस संदेश को पहुंचा दीजिये जो अल्लाह की तरफ से आप पर अवतरित हो चुका है। अल्लाह ने अली को अपना वली बना कर दीन की सुरक्षा के लिए भेजा ताकि पैगम्बर मोहम्मद के बाद दीने इस्लाम को कयामत तक के लिए सुरक्षित कर दिया जाए।

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लखनऊ में मुहर्रम का जुलूस।

मौलाना ने अलीगंज कोचिंग में हुए हादसे में मरे बच्चों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि अल्लाह उनके परिवारों को सब्र अता करे। अंत में मौलाना सैफ अब्बास ने हजरत इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम की शहादत को बयान किया, जिसको सुन कर अजादारों ने आसूं बहाए।

मक़बरा सआदत अली खां में मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना प्रो. हुसैन कलामुद्दीन अकबर ने कहा यह मजलिस ए हुसैन ऐसी जगह है जहां सब मजहब ओ मिल्लत के लोग आते हैं और सब हुसैनी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया के सामने अगर इमाम हुसैन का किरदार और यजीद का किरदार रखा जाये और पूछा जाये कि तुम किधर हो, यकीनन वो हुसैनी होगा। मौलाना ने अलीगंज कोचिंग में पढ़ाई कर रहे बच्चों की आग लगने से हुई मौतों पर दुख जाहिर करते हुए उन सबको ताजियत पेश की और उनके घर वालों को सब्र अता करने के लिए दुआ की।

उन्होंने कहा कि खिदमते इंसानियत यह है कि इंसान को बचाओ। क़ुरआन कह रहा है कि जिनसे एक इंसान को बचा लिया उसने पूरी कायनात को बचा लिया। मौलाना ने हजरत इमाम हुसैन के भतीजे और हजरत इमाम हसन के 13 साल के बेटे हजरत क़ासिम की शहादत के मंजर को बयान किया।

इमामबाड़ा आगा बाकर में मौलाना मीसम जैदी ने कर्बला की प्यास का मंजर बयान किया तो हर तरफ कोहराम मच गया। उन्होंने कहा कि 7वीं मोहर्रम को खेमों में पानी पूरी तरह से खत्म हो गया था। छोटे-छोटे बच्चे प्यास से तड़प रहे थे। माएं तो न जाने कब से प्यासी थीं, जो पानी था वो 6 मोहर्रम तक बच्चों को दिया जाता रहा। बड़ों ने पीना छोड़ दिया। उन्होंने कहा :- गुलुए खुल्द से टूटा न प्यास का रिश्ता, सितम ने बीच में खंजर भी रख के देख लिया। मौलाना ने कहा कि आज तो जगह-जगह सबीलें लगी हैं, कहीं भी पानी की कमी नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे दौड़-दौड़कर पानी पिला रहे हैं लेकिन कर्बला में बच्चे प्यास से तड़प रहे थे।

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लखनऊ में 7वीं मुहर्रम का जुलूस।

आसिफी इमामबाड़े से शाही जुलूस 

एतिहासिक आसिफी इमामबाड़े से 7 मोहर्रम की रात को हजरत कासिम की मेंहदी का शाही जुलूस निकाला गया। हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से निकाले गए इस जुलूस में हजरत कासिम की मेंहदी, हजरत अब्बास का अलम, हजरत इमाम हुसैन का घोड़ा जुलजनाह शामिल किया गया था।

हजरत कासिम की शहादत से एक रात पहले ही शादी हुई थी। उसी की याद में 7 मोहर्रम को मेंहदी का जुलूस निकाला जाता है। इस जुलूस में शादी में दिए जाने वाले उपहार भी साथ चल रहे थे। शादी की रस्म मेंहदी के जुलूस में लोग जारोकतार रो रहे थे।

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लखनऊ में 7वीं मुहर्रम पर रूमीगेट के पास का मंजर।

मेंहदी का जुलूस आसिफी इमामबाड़े से निकलकर रूमी गेट, नीबू पार्क, घंटाघर, रईस मंजिल होता हुआ देर रात में छोटे इमामबाड़े पहुंचकर खत्म हुआ। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये थे। ड्रोन कैमरों के जरिये चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही थी।

हजरत कासिम हाल में मर्सिया

अमृत विचार। इदारा-ए- तहफ़्फ़ुज़े मर्सियाख़्वानी की ओर से विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित इमामबाड़ा नाज़िम साहब में आले मोहम्मद की पसंदीदा ज़ाकिरी विषय से अशरे की 7वीं मजलिस आयोजित की गई। मजलिस में तस्वीर रिज़वी सीतापुरी ने हज़रत क़ासिम के हाल का मार्सिया पेश किया।

तस्वीर रिज़वी सीतापुरी ने सुनाया : लाशे से लिपट कर शह-ए-आलम ये पुकारे, क्यों सोते हो, उठो मेरे प्यारे मेरे प्यारे। करते नहीं अब नर्गिसी आंखों से इशारे, मुरझा गए ये फूल से लब प्यास के मारे। देखा किए हम हश्र का सामां हुआ बेटा, पामाल तेरा लाश-ए-बेजां हुआ बेटा।

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