राजस्थान के कृषि राज्य मंत्री को खीरे की खेती के लिए मिली 99 लाख रुपये की सब्सिडी, बोले- ‘मैं किसान हूं, कुछ नहीं छिपाया’

अजमेर: कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके खीरे की खेती के लिए एक स्कीम के तहत 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है। सब्सिडी लेने का बचाव करते हुए मंत्री ने कहा, “मैं एक किसान हूं और बचपन से ही खेती-बाड़ी से जुड़ा रहा हूं। मैंने कुछ भी नहीं छिपाया है। हज़ारों किसान पॉलीहाउस लगाते हैं और सब्सिडी का फ़ायदा उठाते हैं। इसलिए मैंने भी ऐसा ही किया।
भागीरथ चौधरी ने कहा कि सब्सिडी के लिए मैंने 2018 में अप्लाई किया था। मैंने वहां एक बोर्ड लगाया है और लिए गए सभी लोन और सब्सिडी की जानकारी दी है। मैं वहां किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग भी देता हूं। सभी स्थानीय अधिकारियों ने उस जगह का दौरा किया है। मैंने किसी से कुछ भी नहीं छिपाया है।
मंत्री के विभाग ने ही सब्सिडी को दी मंजूरी
बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री को तीन महीने पहले ही अपने ही मंत्रालय की एक योजना के तहत सब्सिडी मिली थी। इस योजना को उस बोर्ड ने मंज़ूरी दी थी जिसके वे पदेन उपाध्यक्ष हैं। चुनिंदा सब्ज़ियों और फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने वाली यह योजना ‘मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ़ हॉर्टिकल्चर’ (MIDH) के तहत आती है। इसे 2014-15 में शुरू किया गया था और इसका संचालन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) करता है, जो चौधरी के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में एक स्वायत्त संस्था है।
NHB की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसके कामकाज का प्रबंधन एक निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स) करता है, जिसके प्रमुख केंद्रीय कृषि मंत्री (पदेन अध्यक्ष के तौर पर) होते हैं और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री (पदेन उपाध्यक्ष के तौर पर) होते हैं।
लागत का 50 प्रतिशत मिलती है सब्सिडी
यह स्कीम शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और गुलाब, एंथुरियम व ऑर्किड सहित आठ तरह के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है, जिसकी सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये है। 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती के लिए चौधरी का प्रोजेक्ट उन 467 प्रोजेक्ट्स में से एक है जिन्हें NHB ने बागवानी फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद प्रबंधन के माध्यम से “व्यावसायिक बागवानी का विकास” नामक योजना के तहत मंज़ूरी दी थी।



