पंजाबराज्य

‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के अंतर्गत शीर्ष 10 प्रक्रियाओं के तहत 316.50 करोड़ रुपये की लागत से 2.44 लाख कैशलेस उपचार मुहैया कराए गए

चंडीगढ़, 9 अगस्त

गंभीर बीमारी न केवल मरीज़ की सेहत की परीक्षा लेती है, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी चुनौती देती है। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब में इस स्थिति को लगातार बदल रही है और परिवारों को महंगे चिकित्सा उपचार के खर्चे की चिंता से मुक्त करने में अहम भूमिका निभा रही है।

आँकड़े अपने आप पूरी कहानी बयान करते हैं। योजना के तहत सबसे अधिक कराई जाने वाली 10 चिकित्सा प्रक्रियाओं के अंतर्गत अब तक 316.50 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 2,44,468 कैशलेस उपचार मुहैया कराए जा चुके हैं। सप्ताह में कई बार डायलिसिस की आवश्यकता वाले मरीज़ों से लेकर हृदय सर्जरी, घुटने बदलने की सर्जरी या आपातकालीन सीज़ेरियन डिलीवरी कराने वाली महिलाओं तक—योजना ऐसे सभी उपचारों को कवर कर रही है, जिनके खर्च के लिए कई परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।

यह रुझान कोई संयोग नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में हृदय रोग, मधुमेह और गुर्दे से जुड़ी समस्याओं जैसी जटिल बीमारियों में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है। पंजाब भी इससे अलग नहीं है। योजना के तहत डायलिसिस, हृदय उपचार और जोड़ बदलने की  सर्जरी की बढ़ती माँग ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली की ओर इशारा करती है, जो उन बीमारियों से निपट सके, जो एक बार अस्पताल जाने से समाप्त नहीं होतीं, बल्कि इन्हें जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर, विशेषज्ञ और अक्सर महंगे इलाज की आवश्यकता होती है।

स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के आँकड़ों के अनुसार, क्रॉनिक हीमोडायलिसिस योजना के तहत अब तक सबसे अधिक कराई जाने वाली प्रक्रिया है। कुल 1,87,656 डायलिसिस सत्र, जिनकी लागत 30.65 करोड़ रुपये से अधिक है, मुहैया कराए जा चुके हैं। इससे गुर्दे की बीमारी से लंबे समय से जूझ रहे मरीज़ों के लिए हर बार अस्पताल जाने पर पैसे का प्रबंध करने की चिंता किए बिना अपना इलाज जारी रखना सुनिश्चित किया गया है।

योजना के तहत गॉल ब्लैडर की 17,698 लेप्रोस्कोपिक सर्जरी भी की गई हैं, जो दूसरी सबसे अधिक कराई जाने वाली प्रक्रिया है। इसके बाद 10,751 घुटने बदलने की सर्जरी की गई हैं, जिससे हजारों बुज़ुर्ग मरीज़ों को फिर से चलने-फिरने और आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिली है। इसके अलावा, 9,317 महिलाओं की कैशलेस सीज़ेरियन डिलीवरी की गई हैं, जिससे परिवारों पर उस महत्वपूर्ण समय के दौरान पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है।

हृदय का उपचार भी योजना का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है। कुल 8,734 मरीज़ों ने पर्क्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (पीटीसीए) के साथ डायग्नोस्टिक एंजियोग्राफी कराई, जबकि 554 मरीज़ों की कोरोनरी आर्टरी बाइपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) की गई। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि खर्चे के कारण जान बचाने वाले हृदय उपचार में देरी न हो।

योजना के तहत गुर्दे की पथरी के उपचार के लिए 5,770 पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (पीसीएनएल) प्रक्रियाएँ, 2,247 लोअर यूरेटर सर्जरी, 911 सीमेंटलेस टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी और 830 रेडिकल सर्जिकल प्रक्रियाएँ भी कवर की गई हैं। यह विभिन्न चिकित्सा विशेषताओं में उन्नत और महंगे उपचार मुहैया कराने की योजना की क्षमता को दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम की वास्तविक सफलता का पैमाना कागज़ों पर दर्ज लाभार्थियों की संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों की संख्या है जिन्हें बिना किसी आर्थिक संकट के समय पर इलाज मिला है। किसी स्वास्थ्य योजना की सफलता उन जीवनों में दिखती है जिन्हें वह बदलती है। ये आँकड़े उन हजारों परिवारों की तस्वीर पेश करते हैं जिन्हें अस्पताल के बिलों की चिंता किए बिना गुणवत्तापूर्ण उपचार मिला। चाहे जीवन भर डायलिसिस की आवश्यकता वाला मरीज़ हो, हिप रिप्लेसमेंट कराने वाला बुज़ुर्ग व्यक्ति हो, सुरक्षित सीज़ेरियन डिलीवरी की आवश्यकता वाली महिला हो या आपातकालीन हृदय उपचार की आवश्यकता वाला मरीज़—मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक मजबूरियाँ कभी स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने में बाधा न बनें।”

उन्होंने कहा कि योजना के तहत कवर की जाने वाली विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाएँ पंजाब में ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के प्रयासों का प्रमाण हैं, जो केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर और जटिल बीमारियों के महंगे उपचार में भी मरीज़ों को सहायता प्रदान करने में सक्षम है।

आँकड़ों के अलावा, यह डेटा एक बड़े बदलाव की ओर भी इशारा करता है। आर्थिक रूप से सुलभ उपचार के कारण अधिक लोग गंभीर बीमारियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त कर रहे हैं। अधिक बुज़ुर्ग मरीज़ फिर से चलने-फिरने में सक्षम हो रहे हैं। अधिक महिलाओं को अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं और अधिक परिवार अस्पताल के बिलों के लिए पैसे जुटाने के बजाय मरीज़ के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

योजना के विस्तार के साथ यह पंजाब के सबसे मजबूत सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभर रही है, जो न केवल स्वास्थ्य उपचार के लिए वित्तीय सहायता मुहैया करा रही है, बल्कि गंभीर बीमारी के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से भी उन्हें बचा रही है।

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