सआदतगंज ट्रिपल केस: एक ही घर से उठीं तीन अर्थियां, मृतक की बेटी की सरकारी नौकरी और एक-एक करोड़ रुपए देने की रखी मांग

लखनऊ का सआदतगंज इलाका इस वक्त सिर्फ चीखों, आंसुओं और गुस्से का गवाह बना हुआ है। सआदतगंज के ब्राह्मण टोला में जब एक ही घर से तीन-तीन अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा कांप गया। पुलिस की ढिलाई, दबंगों की गुंडागर्दी और एक हंसते-खेलते परिवार के तबाह होने की यह वो खूनी कहानी है जिसने पूरे शहर को सन्न कर दिया है।
खुशियों वाले घर में अब सन्नाटा और तीन अर्थियां
जिस घर में महज़ कुछ दिनों बाद यानी 5 दिसंबर को बेटे सुयश के सिर पर सेहरा सजने वाला था और शहनाइयां बजने वाली थीं, वहां आज मातम का पहाड़ टूट पड़ा है। सोमवार को हुई इस खूनी वारदात में शिवाजी तिवारी, उनके छोटे भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू तिवारी और बेटे सुयश की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम के बाद जब तीनों के शव एक साथ घर पहुंचे, तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा मोहल्ला दहल उठा। गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से पहले घर के बाहर रखीं तीन अर्थियों ने हर देखने वाले की आंखें नम कर दीं।
कैसे अंजाम दी गई यह खूनी वारदात?
मृतक शिवेंद्र तिवारी की पत्नी रुचि तिवारी बताया कि सोमवार सुबह करीब 10:35 बजे शुरू हुआ। शिवेंद्र जब मॉर्निंग वॉक के लिए निकल रहे थे, तभी आरोपी राजेश शुक्ला, ऋषभ शुक्ला, गिरीश शुक्ला, दिनेश शुक्ला, मुन्ना बाबू और अन्य लोगों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। आरोपियों ने पहले तो गाली-गलौज की और फिर लाठी-डंडों व पत्थरों से हमला बोल दिया। चीख-पुकार सुनकर जब शिवाजी तिवारी और उनका बेटा सुयश बीच-बचाव करने पहुंचे, तो दबंगों ने उन्हें भी दबोच लिया। तीनों की बेदर्दी से पिटाई करने के बाद आरोपियों ने उन्हें गोली मार दी और एक ही पल में परिवार के तीन चिराग बुझा दिए।
सड़कों पर उतरा आक्रोश: बुलडोजर और फांसी की मांग
हत्याकांड की खबर फैलते ही लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। देखते ही देखते मौके पर करीब 1500 लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपियों को फांसी देने, उनके अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने व एनकाउंटर करने की मांग रखी। भीड़ का गुस्सा इस कदर था कि पूरे इलाके में भारी तनाव बन गया।
चौकी प्रभारी अजय कुमार चौरसिया व इंस्पेक्टर संतोष आर्या सस्पेंड
इस तिहरे हत्याकांड ने लखनऊ पुलिस की चौकसी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक शिवाजी तिवारी की बहन रेखा ने सीधे तौर पर पुलिस से पूछा कि जब आरोपी राजेश शुक्ला को जिला बदर घोषित किए जाने की बात कही जा रही थी, तो वह खुलेआम थाने में और इलाके में कैसे घूम रहा था? उन्होंने मांग की कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को भी जेल के अंदर भेजा जाना चाहिए। लोगों के भारी विरोध और मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाया और लापरवाही के आरोप में चौकी प्रभारी अजय कुमार चौरसिया तथा इंस्पेक्टर संतोष आर्या को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
परिजन को 1-1 करोड़ और सरकारी नौकरी की मांग
मृतक शिवेंद्र तिवारी की बेटी सुमेधा तिवारी ने बताया कि इस वारदात से दो घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं। उन्होंने कहा, “मेरी मांग है कि प्रताड़ित दोनों परिवारों को योगी सरकार की तरफ से 1-1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाए। इसके साथ ही, मेरे पिता स्व. शिवेंद्र तिवारी की पत्नी (मेरी मां) को जीवन यापन के लिए सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।



