वाराणसी में BJP को झटका, MLC स्नातक सीट भी जीती SP, आशुतोष सिन्हा बोले- “अभी तो ये झांकी है”

उत्तर प्रदेश MLC चुनाव के नतीजों के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 11 सीटों के चुनाव में बीजेपी ने 6 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की। हालांकि, बीजेपी को सबसे बड़ा झटका वाराणसी में लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्नातक MLC सीट भी सपा जीत ली है। सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी के केदारनाथ सिंह को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की।
वाराणसी खंड स्नातक MLC चुनाव में आशुतोष सिन्हा को 55,046 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को 35 हजार से अधिक वोट हासिल हुए। खास बात यह है कि वाराणसी में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के बाद स्नातक चुनाव में भी सपा ने जीत दर्ज की।
जीत के बाद आशुतोष सिन्हा बोले- “अभी तो ये झांकी है”
जीत के बाद मीडिया से मुखातिब हुए आशुतोष सिन्हा ने अपनी कामयाबी का श्रेय सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता पूरी-पूरी रात जागकर सड़कों पर डटे रहे। छोटे से कार्यकर्ता के लिए पार्टी का नेतृत्व तीन दिनों तक सुबह से रात तक सड़क पर मौजूद रहा। आशुतोष सिन्हा ने कहा कि कार्यकर्ताओं के दबाव के चलते प्रशासन ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने अपने सभी साथियों और शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा किया। अयोध्या के बाद काशी और प्रयागराज में मिली जीत को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “अभी तो ये झांकी है, उत्तर प्रदेश में सरकार बनना बाकी है। हम सरकार बनाने जा रहे हैं।”
वाराणसी शिक्षक सीट पर भी सपा की जीत
वहीं, वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे बुधवार को आए। वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्रा को 4,898 मतों से हराया। वर्ष 2020 के चुनाव में मिश्रा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे और लाल बिहारी यादव से महज 936 मतों से हार गए थे। इस बार जीत का अंतर काफी बढ़ गया। जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने शिक्षकों का समर्थन मिलने का दावा करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को इसका श्रेय दिया।
लाल बिहारी यादव ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण सपा प्रदेश की सभी सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ सकी। उन्होंने कहा कि जिस तरह मुलायम सिंह यादव को शिक्षक समुदाय का नेता माना जाता था, उसी तरह अखिलेश यादव की भी शिक्षकों के प्रति वैसी ही सोच है। लाल बिहारी यादव ने यूजीसी से जुड़े विवाद का चुनाव पर कोई खास प्रभाव पड़ने से इनकार किया। उनके मुताबिक, नौकरी की सुरक्षा चाहने वाले लोग सपा के साथ खड़े रहे।



