सेबी भारतीय बाजार की पहुंच बढ़ाने और निवेशक सुरक्षा को मजबूत करने पर लगातार कर रहा फोकस : तुहिन कांत पांडे

कोलकाता/नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि पूंजी बाजार नियामक भारत के बाजारों की पहुंच बढ़ाने और कुशल एवं लचीला बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसमें पूंजी निर्माण को सुविधाजनक बनाने, कारोबार करने में आसानी को बेहतर बनाने और निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कोलकाता में ‘भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स इन्वेस्टर्स फोरम’ में बोलते हुए, पांडे ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत में बाजार पूंजीकरण में काफी विस्तार हुआ है। इस दौरान कंपनियों ने इक्विटी और डेट जारी करके हर साल औसतन 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पूंजी जुटाई है।
पांडे ने कहा, “हम जहां एक ओर व्यवसायों के लिए बाजारों को मजबूत कर रहे हैं, वहीं निवेशकों की सुरक्षा भी हमारे लिए उतनी ही महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। विश्व-स्तरीय बाजारों को न केवल सामान्य समय में कुशल होना चाहिए, बल्कि तनाव के दौर में भी मजबूत बने रहना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में मार्केट कैपिटलाइजेशन में काफी वृद्धि हुई है। इस दौरान कंपनियों ने इक्विटी और डेट जारी करके हर साल औसतन 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पूंजी जुटाई है।
उन्होंने आगे कहा, “हम जहां एक ओर व्यवसायों के लिए बाजारों को मजबूत कर रहे हैं, वहीं निवेशकों की सुरक्षा भी हमारे लिए उतनी ही महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। विश्व-स्तरीय बाजारों को न केवल सामान्य समय में कुशल होना चाहिए, बल्कि तनावपूर्ण स्थितियों में भी मजबूत बने रहना चाहिए।”
पूंजी बाजारों में पश्चिम बंगाल की बढ़ती भागीदारी का जिक्र करते हुए, पांडे ने बताया कि सिक्योरिटीज मार्केट में निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2015 के लगभग 12 लाख से बढ़कर 90 लाख से अधिक हो गई है। इनमें से लगभग 36 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम उम्र के युवा हैं।
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में 379 सूचीबद्ध कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय हैं। राज्य की 40 से अधिक एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) कंपनियों ने पूंजी बाजार का रुख किया है और एसएमई आईपीओ के जरिए 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की पूंजी जुटाई है।
पांडे ने बताया कि सेबी ने फंड जुटाने की प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य अनावश्यक अनुपालन के बोझ को कम करना और कामकाज की दक्षता में सुधार करना है।
इन कदमों में आईपीओ प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, राइट्स इश्यू के लिए समय-सीमा कम करना, बड़ी कंपनियों के लिए लिस्टिंग की शर्तों को तर्कसंगत बनाना, लिस्टिंग के बाद कुछ शर्तों के साथ कर्मचारियों को स्टॉक विकल्प (ईएसओपी) देने की अनुमति देना, और पब्लिक इश्यू के लिए लिस्टिंग की समय-सीमा को घटाना शामिल है।
इसके साथ ही, कम फेस वैल्यू वाले डेट सिक्योरिटीज को जारी करने की सुविधा दी गई है, और प्राइवेट प्लेसमेंट करने वाली पात्र कंपनियों के लिए अनिवार्य मर्चेंट बैंकिंग की शर्तों में ढील दी गई है।
पांडे ने आगे कहा कि निवेशकों के लिए वित्तीय शिक्षा और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि जागरूक निवेशक ही सुरक्षा की पहली पंक्ति होते हैं।
उन्होंने कहा, “विश्व-स्तरीय पूंजी बाजार बनाने का मतलब केवल अधिक मार्केट कैपिटलाइजेशन, बड़ा ट्रेडिंग वॉल्यूम या तेज लेनदेन हासिल करना नहीं है। असली पैमाना यह है कि बाजार कितनी प्रभावी ढंग से बचत को उत्पादक निवेश से जोड़ते हैं, व्यवसायों को पूंजी जुटाने में मदद करते हैं, और निवेशकों को आर्थिक विकास में भागीदार बनने के अवसर प्रदान करते हैं।”



