कारोबार

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में शहरीकरण अहम: अरविंद पनगढ़िया

तिरुवनंतपुरम। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने बुधवार को कहा कि भारत के आर्थिक परिवर्तन और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में शहरीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राजभवन द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत 2047 के लिए विकास के इंजन के रूप में शहरी क्षेत्र’ विषय पर लोक भवन कन्वर्सेशन के छठे संस्करण को संबोधित करते हुए पनगढ़िया ने कहा कि भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर की विकसित और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य उत्पादक, मजबूत और कुशल तरीके से संचालित शहरों के बिना हासिल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि लगभग हर विकसित देश में शहरीकरण का स्तर ऊंचा है। भारत का भी शहरी विकास का लंबा इतिहास रहा है और उसे शहरीकरण को आगे बढ़ाने को लेकर संकोच नहीं करना चाहिए।

पनगढ़िया ने कहा कि शहरीकरण का उद्देश्य केवल मौजूदा शहरी आबादी की जीवन स्थितियों में सुधार तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहरों को कारोबार और रोजगार के अनुकूल बनाना होगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों को आकर्षित किया जा सके और रोजगार के अवसर पैदा हों।

उन्होंने कहा, “आर्थिक गतिविधियां शहरीकरण को बढ़ावा देती हैं।” उन्होंने जोर दिया कि रोजगार सृजन से ग्रामीण बस्तियों और बड़े शहरों एवं कस्बों के आसपास के क्षेत्रों को भी जीवंत शहरी क्षेत्रों में बदलने में मदद मिलेगी।

पनगढ़िया ने कहा कि शहरी जमीन की कमी और उसकी ऊंची लागत भारतीय शहरों में आर्थिक गतिविधियों के सामने सबसे बड़ी बाधाओं में से हैं।

औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों के लिए बड़े भूखंडों का अधिग्रहण बेहद मुश्किल बना हुआ है, क्योंकि जमीन के स्वामित्व अत्यधिक बंटे हुए हैं और जमीन के स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेज अक्सर उपलब्ध नहीं होते।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के सिंगूर परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हजारों अलग-अलग भूखंडों का अधिग्रहण करना पड़ा। इसके विपरीत, अमेरिका जैसे देशों में बड़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन का स्वामित्व अपेक्षाकृत कम बंटा हुआ है।

उन्होंने उत्पादक आर्थिक गतिविधियों के लिए जमीन की उपलब्धता आसान बनाने और भूमि अधिग्रहण तथा शहरी विकास में आने वाली अड़चनों को कम करने के लिए सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया।

वित्त आयोग के अध्यक्ष ने मजबूत नगरपालिका प्रशासन और शहरी विकास के लिए जिम्मेदार विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि शहरों में ऐसी शासन व्यवस्था होनी चाहिए जो आर्थिक गतिविधियों, बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन को समर्थन दे सके। शहरी नियोजन और भूमि उपयोग से जुड़ी नीतियों को नागरिकों की जीवन स्थितियों में सुधार के साथ-साथ उद्यमिता को भी बढ़ावा देना चाहिए।

इस अवसर पर राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने कहा कि शहरीकरण को पश्चिमीकरण के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा, “शहरीकरण की शुरुआत हमारी जड़ों से होनी चाहिए।”

उन्होंने जोर दिया कि भारत का शहरी विकास पश्चिमी मॉडल को केवल अपनाने के बजाय अपनी संस्कृति, परंपराओं और विचार प्रक्रियाओं से विकसित होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहरीकरण देश के आर्थिक विकास और विकसित भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

Khwaza Express

Khwaza Express Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2008. The proud journey since 16 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2008.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button