देशबड़ी खबर

जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप साबित, आवास पर मिले थे भारी मात्रा में नोट

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है। समिति ने कहा है कि उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में 500 रुपये के जले और अधजले नोट मिले थे, लेकिन इन नोटों के स्रोत या मालिकाना हक को लेकर जस्टिस वर्मा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 और 15 मार्च 2025 की रात दिल्ली के 30 तुगलक क्रिसेंट स्थित सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। आग बुझाने पहुंचे दिल्ली पुलिस और दमकल के अधिकारियों ने वहां बड़ी संख्या में जले, अधजले, गीले और बिखरे हुए 500 रुपये के नोट देखे। कई अधिकारियों के बयान और फोटो-वीडियो रिकॉर्ड भी इसकी पुष्टि करते हैं।

कितनी नकदी थी, यह साफ नहीं हो सका

समिति ने कहा कि मौके से नोटों को जब्त नहीं किया गया, न उनकी गिनती हुई और न ही उनकी पूरी सूची बनाई गई। इसी वजह से रिपोर्ट में नकदी की सही रकम बताना संभव नहीं है। लेकिन समिति के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि वहां कम नोट थे। उपलब्ध सबूतों से साफ है कि स्टोर रूम में 500 रुपये के नोट बड़ी संख्या में थे।

पहला आरोप- नकदी का कोई संतोषजनक जवाब नहीं

पहले आरोप में कहा गया था कि न्यायमूर्ति वर्मा के नियंत्रण वाले सरकारी परिसर में बड़ी मात्रा में ऐसी नकदी मिली, जिसका कोई साफ स्रोत या मालिकाना हक सामने नहीं आया। समिति ने इस आरोप को साबित माना। रिपोर्ट में कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा नोटों के मिलने, उनके स्रोत और उनके मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

दूसरा आरोप- सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए

दूसरे आरोप में आग बुझने के बाद घटनास्थल और वहां मौजूद सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं रखने की बात थी। समिति ने यह आरोप भी साबित माना। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों की जांच और जगह को सील करने से पहले स्टोर रूम की स्थिति में बदलाव हुआ और बाद में वहां मौजूद नोट भी नहीं मिले। समिति ने कहा कि इस आरोप को साबित करने के लिए यह जरूरी नहीं था कि न्यायमूर्ति वर्मा ने खुद जाकर नोट हटाए हों। उनके नियंत्रण वाले परिसर में सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए और इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए।

तीसरा आरोप- जवाब टालमटोल वाला और अधूरा बताया

तीसरे आरोप में न्यायमूर्ति वर्मा के अलग-अलग स्पष्टीकरण को लेकर सवाल उठाए गए थे। समिति ने कहा कि उनके जवाब में वह साफ-साफ जानकारी नहीं थी जिसकी इस मामले में एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से उम्मीद की जाती है। समिति के मुताबिक, 22 मार्च 2025 के जवाब में न्यायमूर्ति वर्मा ने नकदी के बारे में जानकारी होने से इनकार किया था। बाद में उनके रुख में बदलाव आया और उन्होंने घटनास्थल की जब्ती, नकदी की गिनती और बाद में हुई सफाई जैसे मुद्दे उठाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा ने स्टाफ की भूमिका, नकदी को वहां रखे जाने, नकदी हटाए जाने या किसी साजिश जैसी बातों की ओर इशारा किया, लेकिन इन दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या गवाह पेश नहीं किया गया।

Khwaza Express

Khwaza Express Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2008. The proud journey since 16 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2008.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button