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आयुष चिकित्सा प्रणालियों ने नागरिकों के स्वास्थ्य में अमूल्य योगदान दिया है : राष्ट्रपति मुर्मु

बुलढाणा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में ‘राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026’ का उद्घाटन किया। उन्होंने आयुष स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले छह वरिष्ठ वैद्यों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हमारी परंपरा में संपूर्ण स्वास्थ्य को सबसे बड़ा सुख माना जाता है। स्वस्थ नागरिक देश को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयुष चिकित्सा पद्धतियों ने नागरिकों के स्वास्थ्य में अमूल्य योगदान दिया है। योग, आयुर्वेद और सिद्ध जैसी प्रणालियां आधुनिक चिकित्सा के उदय से ही लोगों की सेवा कर रही हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे खेतों, रसोई घरों और जंगलों में औषधीय पौधों और स्वास्थ्यवर्धक जड़ी-बूटियों का अनमोल भंडार मौजूद है। इस बहुमूल्य संपदा का संरक्षण और संवर्धन औषधियों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है, बल्कि मृदा स्वास्थ्य और संरक्षण में भी योगदान देती है। इसलिए, आयुष प्रणालियों को बढ़ावा देना न केवल लोगों के शारीरिक और आर्थिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होता है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष प्रणालियां स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। आज विश्व रोगों की रोकथाम में एकीकृत चिकित्सा के महत्व को पहचान रहा है। दुनिया भर के लोग तनाव मुक्त और स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग अपना रहे हैं और आयुर्वेदिक उपचारों और दवाओं से लाभ उठा रहे हैं। साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, औषधियों का मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कदम आयुष प्रणालियों की मान्यता और स्वीकृति को और बढ़ाएंगे।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि आयुष मंत्रालय इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। अनुसंधान और औषधि विकास के लिए सामान्य दिशानिर्देश अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापित किए गए हैं। आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के विश्वसनीय, वैज्ञानिक समाधान के रूप में स्थापित करने के लिए अनेक वैज्ञानिक प्रयास जारी हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक वैज्ञानिक हस्तक्षेपों, नवाचारों और वैश्विक सहयोग के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अधिक सुलभ और लोकप्रिय बनाकर, हम उन्हें समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का अभिन्न अंग बनाने में सफल होंगे।

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