
देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रैक पर लापता सात ट्रैकर समेत आठ लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान मंगलवार सुबह फिर शुरू कर दिया गया। खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा था। मंगलवार 3 नवंबर को चलाए गए सघन सर्च अभियान के दौरान रेस्क्यू टीम को एक महिला और एक पुरुष पर्वतारोही का शव मिला। हालांकि, अभी 6 अन्य लापता लोगों का कोई सुराग नहीं लग पाया है। मौसम में सुधार होने के बाद एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) की टीमें दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर लापता लोगों की तलाश में जुट गई हैं।
उत्तरकाशी जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय के अनुसार, सुबह साढ़े सात बजे बचाव दल से मिली सूचना में बताया गया कि मौसम में सुधार होने के बाद खोज अभियान दोबारा शुरू कर दिया गया है। उत्तराखंड पुलिस के राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) के कर्मी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन मौसम के बीच लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।
13 लोगों का दल निकला था केदारताल ट्रैक पर, आठ अब भी लापता
SDRF ने सोमवार शाम बताया था कि करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर एक तंबू और कुछ अन्य सामान मिला है। इस बीच, उत्तरकाशी वन प्रभाग ने मौसम में सुधार होने तक 4,000 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाले ट्रैक के लिए परमिट जारी करना बंद कर दिया है। प्रभागीय वन अधिकारी जीवन मोहन डगाडे ने कहा, ”मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण फिलहाल 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ट्रैक के लिए परमिट जारी नहीं किए जा रहे हैं। मौसम में सुधार होने के बाद परमिट जारी किए जाएंगे। अगले आदेश तक यह प्रतिबंध लागू रहेगा।”
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और एनआईएम की टीमें जुटीं
लमखागा दर्रा और त्रिखंटा ट्रैक भी 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित मार्गो में शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, 27 अक्टूबर को सात ट्रैकर और छह सहायक कर्मियों समेत 13 लोगों का दल गंगोत्री से केदारताल ट्रैक के लिए रवाना हुआ था। अधिकारियों के अनुसार उन्हें 29 अक्टूबर को वापस लौटना था, लेकिन खराब मौसम, बर्फबारी और मार्ग में ग्लेशियर के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर को ट्रैकिंग एजेंसी ने कुलियों और गाइड का एक दल भेजा था, जिसने करीब छह किलोमीटर तक रास्ता साफ किया।
चार हजार मीटर से ऊंचे ट्रैक के परमिट पर रोक
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र ने शनिवार को बताया था कि चार लोगों को सुरक्षित ढूंढ लिया गया है, जबकि हिमस्खलन के बाद आठ लोग भोजखड़क से आगे फंसे हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के 10 सदस्यीय दल ने 31 अक्टूबर को उत्तरकाशी से गंगोत्री के लिए रवाना होकर बचाव अभियान में हिस्सा लिया था। इसके अलावा वन विभाग के दो कर्मियों, ट्रैकिंग एजेंसी के सात सदस्यों और एसडीआरएफ के छह कर्मियों के दल को भी केदारताल की ओर भेजा गया था। अधिकारियों ने बताया कि गंगोत्री से एसडीआरएफ का एक दल एक नवंबर को केदारताल क्षेत्र में स्थिति का जायजा लेने पहुंचा था, लेकिन भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण अभियान प्रभावित हुआ।



