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MP विधानसभा में भारी हंगामे के बीच UCC बिल पास, शादी, तलाक से लेकर लिव-इन तक बदल जाएंगे ये नियम

भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल पास हो गया है। इस बिल में बहुविवाह पर रोक और सभी धर्मों के लिए शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का प्रावधान है। मध्य प्रदेश विधानसभा में काफी शोरगुल और हंगामे के बीच इसे पास कराया गया। विपक्षी दल कांग्रेस इस बिल के प्रावधानों का कड़ा विरोध कर रही है।

दो बार स्थगित हुई सदन की कार्यवाही

भारी हंगामे के बीच विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विधेयक को पास घोषित कर दिया। विपक्ष ने भारी हंगामे के बीच बिल का विरोध किया और कहा कि बिल की विशेष समीक्षा के लिए इस सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। कांग्रेस बिल का विरोध जताते हुए सदन के वेल में जाकर जमकर नारेबाजी की। विधानसभा अध्यक्ष ने पहले 10 मिनट और बाद में 15 मिनट के लिए किया सदन की कार्यवाही स्थगित की।

सभी के लिए समान कानूनी अधिकार

इस बिल में तीन तलाक और निकाह हलाला को दंडनीय बनाने, बहुविवाह पर रोक लगाने तथा एक महीने के भीतर लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर तीन महीने तक की जेल का प्रावधान  है। इस बिल में जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी य सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) से जन्मे बच्चों को समान कानूनी अधिकार तथा सभी बच्चों को समान उत्तराधिकार अधिकार देने का प्रस्ताव है।

अनुसूचित जनजातियां UCC के दायरे से बाहर

वहीं अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। प्रस्तावित कानून में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैधानिक दर्जा देने का प्रस्ताव किया गया है। यदि पुरुष साथी महिला साथी को छोड़ देता है तो वह अदालत से भरण-पोषण की मांग कर सकेगी। इसबिल में जनजातीय समुदायों को छोड़कर सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का भी प्रावधान किया गया है।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) का पास होना सच में मध्य प्रदेश के 8.5 करोड़ लोगों के लिए एक सुनहरा दिन है। प्रदेश विधानसभा में इस कानून का लागू होना ‘एक देश संविधान, एक नेता, एक नेता’ के विज़न के प्रति हमारी सच्ची लगन दिखाता है, जिसे डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आगे बढ़ाया था। ह कदम महिलाओं को एक से ज़्यादा शादी से होने वाली तकलीफ़ से आज़ादी दिलाएगा और उनके अधिकारों के लिए सरकार का सपोर्ट पक्का करेगा।  पूरे राज्य को बधाई देना चाहता हूं और कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूं, ‘वे हमेशा हिंदुओं के बीच फूट क्यों डालना चाहते हैं।और यह हिंदू ही थे’? कांग्रेस की इसी गलत सोच की वजह से आज़ादी के समय देश का बंटवारा हुआ था।

जनता के हित के मुद्दों को नजरअंदाज कर रही सरकार-कांग्रेस

वहीं कांग्रेस ने विधानसभा में जबरदस्त  विरोध प्रदर्शन किया वहीं। कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने कहा, “ विधायकों का आज का विरोध प्रदर्शन जनता के हित के कई मुद्दों को दिखाता है जिन्हें BJP नज़रअंदाज़ कर रही है। फिर भी, जब भी मुद्दा सांप्रदायिक भेदभाव या हिंदू-मुस्लिम बंटवारे की ओर जाता है, BJP जाग जाती है और Gen Z के बंटवारे को हवा देती है। हम यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की मांग नहीं कर रहे हैं। वे एक ऐसा सिस्टम चाहते हैं जो पेपर लीक को खत्म करे, रोज़गार दे, और युवाओं को आगे बढ़ने का रास्ता बनाए।” वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि इस बिल पर मेरी गंभीर आपत्ति है। बिल को असंवैधानिक तरीके से पारित किया गया। मैं धरना दे रहा हूं। सुप्रीम कोर्ट में भी चैलेंज करूंगा।

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