पंजाबराज्य

अमन अरोड़ा ने बच्चों की सुरक्षा के लिए आयु-आधारित सोशल मीडिया उपयोग नियम बनाने की वकालत की

चंडीगढ़।

डिजिटल दुनिया में बच्चों की जरूरत से अधिक रुचि को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच पंजाब के सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार नाबालिगों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर नियम बनाने के लिए यह मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाएगी। इसके अलावा राज्य सरकार बच्चों के हितों की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर प्रचलित अच्छी प्रथाओं का भी मूल्यांकन करेगी।

पंजाब विधानसभा में विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह द्वारा पेश किए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि डिजिटल सामग्री का उपयोग आयु-आधारित होना चाहिए। हमें यह तय करना चाहिए कि 8 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए कौन-सी सामग्री उपयुक्त है, 13 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए कौन-सी और 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं के लिए कौन-सी सामग्री उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने से अक्सर प्रतिबंधित चीजों के प्रति बच्चों की मनोवैज्ञानिक रुचि और बढ़ जाती है और ऐसी पाबंदियां कई बार युवाओं को इंटरनेट की अंधेरी दुनिया की ओर भी धकेल सकती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि डिजिटल युग गलत आदतों का माध्यम बनने के बजाय अवसरों का दौर बना रहे।

मोबाइल फोन की बढ़ती लत और बच्चों के हानिकारक ऑनलाइन सामग्री के संपर्क में आने की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार की व्यापक “डिजिटल सेफ्टी नेट” रणनीति की रूपरेखा बताते हुए श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार, स्कूलों और सबसे महत्वपूर्ण अभिभावकों की भागीदारी वाला सामूहिक प्रयास जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यह चिंता केवल पंजाब या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक चुनौती के रूप में उभर रही है। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया खातों पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाया है और कर्नाटक ने भी इसी तरह की पाबंदी का प्रस्ताव रखा है। वहीं आंध्र प्रदेश भी 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए डिजिटल सामग्री की पहुंच सीमित करने पर विचार कर रहा है।

श्री अमन अरोड़ा ने बताया कि इस चुनौती से सक्रिय रूप से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने कई पहलें भी शुरू की हैं। राज्य सरकार ने “साइबर जागो” अभियान शुरू किया है, जिसे पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम डिवीजन और आईटी विभाग के सहयोग से चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत 3,968 सरकारी हाई स्कूलों के शिक्षकों को “डिजिटल सलाहकार” के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे विद्यार्थियों को ऑनलाइन खतरों की पहचान करने और स्क्रीन समय के संतुलित उपयोग के बारे में जागरूक कर सकें।

साइबर शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 को राज्य के डायल-112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सिस्टम से जोड़ दिया है। अब नागरिक एक ही आपातकालीन नंबर के माध्यम से ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर धक्केशाही या अन्य साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके साथ ही सरकार ने प्रोजेक्ट जीवन ज्योत 2.0 भी शुरू किया है, जिसके तहत विशेष रूप से बच्चों के ऑनलाइन शोषण से जुड़े मामलों से निपटने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित की गई हैं।

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 का हवाला देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य नाबालिगों के डेटा की प्रोसेसिंग के लिए अभिभावकों की “सत्यापन योग्य सहमति” से संबंधित प्रावधानों को लागू करने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम कर रहा है। राज्य इन आयु-सीमाओं और “सुरक्षा-द्वारा-डिज़ाइन” सिद्धांतों के सख्ती से पालन के लिए प्रतिबद्ध है। स्कूलों को स्क्रीन की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काउंसलिंग सत्र आयोजित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि “इनडोर” डिजिटल लत से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने गांव स्तर पर 3,100 अत्याधुनिक स्टेडियम बनाए हैं और 6,000 और बनाने की योजना है। इसके साथ ही 1,000 इनडोर जिमों का निर्माण जारी है और 5,000 और बनाने की योजना है।

उन्होंने कहा कि यदि बच्चे शारीरिक गतिविधियों में शामिल नहीं होते तो वे स्क्रीन से चिपके रहने के आदी हो जाते हैं। हमारा लक्ष्य युवाओं की ऊर्जा को स्क्रीन से हटाकर खेलों जैसे स्वस्थ विकल्पों की ओर मोड़ना है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि नाबालिगों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर कानूनी प्रतिबंध भारत सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत बनाए गए नियमों के माध्यम से लागू किए जा सकते हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया सामग्री के संबंध में आयु-सत्यापन जैसी शर्तें भी लागू की जा सकती हैं।

Khwaza Express

Khwaza Express Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2008. The proud journey since 16 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2008.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button