
चंडीगढ़/जालंधर, 20 अगस्त:
पंजाब पुलिस, आर.सी.टी. एन.जी.ओ.— जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (जे-पाल) एवं हार्टेक फाउंडेशन के सहयोग से, ‘लिंग संवेदनशीलता एवं पंजाब पुलिस में महिलाओं का मेनस्ट्रीमिंग’ विषय पर आधारित वर्ष भर चलने वाली प्रशिक्षण पहल आज 134 वर्ष पुरानी महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी (एम.आर.एस.पी.पी.ए.), फिल्लौर में सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। आज, तीसरे चरण का अंतिम दिन ग्रुप टी1 सी—केवल महिलाओं के लिए समूह पर केंद्रित रहा, जिसमें प्रदेश भर में महिला हेल्पडेस्कों पर तैनात पंजाब पुलिस महिला मित्र शामिल हुईं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंची, इंडियन एक्सप्रेस की रेजिडेंट/राष्ट्रीय संपादक (उत्तरी) मनराज ग्रेवाल शर्मा ने प्रतिभागी महिला अधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने इस पुरुष-प्रधान क्षेत्र में चुनौतियों का डटकर सामना करते हुए पत्रकारिता में सम्मानजनक स्थान हासिल किया।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शिखर तक पहुंचने के लिए बिना किसी समझौते के पूर्ण समर्पण की आवश्यकता होती है। उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि हमेशा ‘5% अतिरिक्त प्रयास’ हमें दूसरों से अलग एवं आगे कर देता है। उन्होंने महिला पुलिस कर्मियों से अडिग रहने, अपनी व्यावसायिक महत्ता बनाने और कार्यस्थल पर लिंग आधारित या अनुचित टिप्पणियों के विरुद्ध डटकर बोलने की अपील की।
इस अवसर पर बोलते हुए स्पेशल डी.जी.पी. कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (सी.ए.डी.) गुरप्रीत कौर दिओ ने कहा कि पंजाब पुलिस की 80,000 कर्मचारियों की मजबूत संख्या में 11% महिला कर्मियों को गौरव एवं समानता के साथ मुख्यधारा में शामिल करने के लिए ऐसी प्रशिक्षण पहल अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने महिला अधिकारियों को यह अहसास दिलाया कि उन्हें सम्मान और उचित स्थान तभी मिल सकता है जब वे अपने स्वाभिमान, व्यावसायिकता, दृढ़ता और योग्यताओं में पूर्ण विश्वास रखें। उन्होंने महिलाओं से प्रशासनिक डेस्कों से आगे बढ़ने, चुनौतीपूर्ण फील्ड असाइनमेंट चुनने और स्टेशन हाउस अधिकारी (एस.एच.ओ.) के रूप में पोस्टिंग सहित फ्रंटलाइन नेतृत्व भूमिकाओं के लिए सक्रिय रूप से आगे आने की अपील की।
स्पेशल डी.जी.पी. ने घरेलू हिंसा पर कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन की पहलों के बारे में भी बताया, जिसमें ‘सांझ राहत केंद्र’ परियोजना शामिल है। इसके बाद घरेलू हिंसा पर आधारित 15 मिनट की दस्तावेजी फिल्म भी दिखाई गई। उन्होंने कहा कि यह साक्ष्य-आधारित पहल 21वीं सदी की चुनौतियों, जिनमें साइबर अपराध, प्रॉक्सी आतंकवाद, संगठित गैंगस्टर नेटवर्क और नशों का उपयोग शामिल हैं, से निपटने में सक्षम एक समावेशी, भविष्योन्मुखी बल बनाने के लिए पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इससे पहले, महाराष्ट्र कैडर की पूर्व डी.जी.पी. मीरन चड्ढा बोरवांकर ने 80 के दशक के आरंभ में एक महिला पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी चुनौतियाँ साझा कीं, जब वह 1981 के भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस.) बैच में एकमात्र महिला अधिकारी थीं। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय के सहयोग से महाराष्ट्र पुलिस में महिला पुलिस अधिकारियों के संतुष्टि स्तर पर की गई एक शोध और उस दौरान जुटाई गई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
पंजाब के पूर्व डी.जी.पी. आर.सी. सिंह ने संयुक्त राष्ट्र में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी वाली नीति अपनाई गई थी। उन्होंने सहायक प्रमुख के रूप में अपने अनुभव भी साझा किए जब उन्होंने अपने अधीन कार्यरत महिला अधिकारियों को समान चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं सौंपीं और उन कर्तव्यों को पूरा करने के लिए उचित लोजीस्टिक सहायता भी प्रदान की थी।
इस अवसर पर स्पेशल डी.जी.पी. गुरप्रीत कौर दिओ ने 51 मास्टर ट्रेनरों को प्रदेश भर में इस कैस्केडिंग प्रशिक्षण मॉडल को सफलतापूर्वक लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए बधाई दी और सम्मानित किया।
इस दौरान इस अनोखी एवं प्रभावी परियोजना के तहत पंजाब भर के 384 पुलिस थानों से लगभग 1500 पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। दिसंबर 2025 में 51 मास्टर ट्रेनरों के लिए ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ (टी.ओ.टी.) कोर्स के साथ शुरू हुई, यह पहल 2026 के आरंभ में दो जमीनी स्तर के जिला-स्तरीय दौरों से गुज़री और तीन-दिवसीय अकादमी-स्तरीय चरण-3 में जाकर संपन्न हुई। जे-पाल द्वारा अब संस्थागत माहौल और कम्युनिटी पुलिसिंग प्रथाओं पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए एंडलाइन सर्वेक्षण किया जाएगा।




