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आयुर्वेदिक शोध को वैश्विक मंच पर नई पहचान : डॉ. रस्तोगी

'एनल्स ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन' अब एम्बेस में इंडेक्स्ड

लखनऊ। भारतीय आयुर्वेदिक अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में ‘एनल्स ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन’ को विश्व के प्रतिष्ठित बायोमेडिकल डेटाबेस एमबेस (एल्सेवियर) में सफलतापूर्वक इंडेक्स कर लिया गया है। यह उपलब्धि न केवल जर्नल की गुणवत्ता का अंतरराष्ट्रीय प्रमाण है, बल्कि आयुर्वेद के साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक साहित्य को वैश्विक चिकित्सा समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

विश्व के अग्रणी बायोमेडिकल एवं फार्मास्यूटिकल डेटाबेस में से एक है, जिसका उपयोग विश्वभर के चिकित्सक, शोधकर्ता, विश्वविद्यालय, अस्पताल, दवा उद्योग और स्वास्थ्य नीति-निर्माता नवीनतम वैज्ञानिक शोध की खोज और विश्लेषण के लिए करते हैं। एमबेस (एल्सेवियर) में इंडेक्सिंग के बाद ‘एनल्स ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन’  में प्रकाशित शोध लेख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध होंगे, जिससे भारतीय आयुर्वेदिक अनुसंधान की दृश्यता, विश्वसनीयता, उद्धरण व वैश्विक शोध सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. संजीव रस्तोगी ने इस अवसर पर कहा—
“एम्बेस में इंडेक्सिंग केवल हमारे जर्नल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेदिक अनुसंधान की बढ़ती वैज्ञानिक स्वीकार्यता का भी प्रमाण है। हमारा उद्देश्य सदैव आयुर्वेद को उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में सशक्त स्थान दिलाना रहा है। यह उपलब्धि सम्पादकीय टीम, समीक्षकों, लेखकों और पाठकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।”

उन्होंने कहा कि ‘एनल्स ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन’ ने अपनी स्थापना से ही कठोर समकक्ष समीक्षा  प्रकाशन नैतिकता, पारदर्शिता तथा अंतरराष्ट्रीय संपादकीय मानकों का पालन करते हुए आयुर्वेद एवं समन्वित चिकित्सा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा दिया है। यह पत्रिका आयुर्वेद, समन्वित चिकित्सा क्लिनिकल रिसर्च, औषधीय अनुसंधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा तथा अन्य संबंधित विषयों पर मौलिक शोधपत्र, व्यवस्थित समीक्षाएं, केस रिपोर्ट, संक्षिप्त संचार तथा संपादकीय प्रकाशित करती है। डॉ. रस्तोगी ने इस उपलब्धि के लिए सम्पादकीय मंडल, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों, लेखकों, पाठकों तथा सहयोगी संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए देश-विदेश के शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने उच्च गुणवत्ता वाले शोधपत्र ‘एनल्स ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन’ में प्रकाशन हेतु भेजकर आयुर्वेद के साक्ष्य-आधारित विकास में सहभागी बनें। यह उपलब्धि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आयुष क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

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