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युद्ध ने बदला आम निर्यात का रूट…. यूरोपीय देशों में भेजने की तैयारी, दिल्ली-नोएडा से उड़ान भरेगा मलिहाबादी दशहरी

  • प्रत्येक वर्ष की तरह आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से भी ऑर्डर मिलने की उम्मीद दिल्ली या नोएडा से हवाई जहाज के मध्यम से विदेशों को भेजा जाएगा आम

लखनऊ : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर आम निर्यात पर भी दिख रहा है। इस बार मलिहाबादी आम खाड़ी देशों में नहीं जा पाएगा। बागवानों और निर्यातकों को नुकसान से बचाने के लिए यूरोपीय देशों को आम का निर्यात करने की संभावनाएं तलाशी जाने लगी हैं। मलिहाबाद के रहमानखेड़ा स्थित मैंगो पैक हाउस प्रबंधन के साथ कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार निदेशालय, उद्यान विभाग और मंडी परिषद ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।

पैक हाउस के संचालक अमित अग्रवाल ने कहा कि पूरी कोशिश है कि आम का निर्यात प्रभावित न हो। इसके लिए यूरोपीय देशों फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, इटली, स्पेन आदि से बात चल रही है। हर साल की तरह आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से भी ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। बागवानों से संपर्क करके ग्लोबल जीएपी के मानकों पर आम की पैदावार कराई जा रही है।

मई के आखिरी से आम का निर्यात शुरू हो जाएगा, समय भी कम है और जल्द बातचीत कर सब फाइनल करना है। लखनऊ के अलावा सहारनपुर में संचालित मंडी परिषद के पैक हाउस से प्रोसेसिंग करके ज्यादातर आम का निर्यात खाड़ी देशों होता रहा है।

इस बार युद्ध के चलते वहां निर्यात मुश्किल है, इससे अन्य देशों में निर्यात करने की तैयारी है। आम के अलावा भिंडी, लौकी और हरी मिर्च का निर्यात भी किया जाएगा। फल व सब्जियां लखनऊ से वैन से दिल्ली भेजी जाएंगी। वहां से हवाई जहाज से बाहर भेजी जाएंगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर से भी वार्ता चल रही है। यदि सहमति बनी तो नोएडा से निर्यात करना और आसान होगा।

फल व सब्जियाें के निर्यात के बताए सिद्धांत और मापदंड

”मेंटरशिप” कार्यक्रम में केन्या से आए अच्छी कृषि पद्धति (ग्लोबल जीएपी) के मास्टर ट्रेनर डैनियल महिंदा वाहोमे ने गुरुवार को दूसरे दिन गोमती नगर स्थित किसान मंडी भवन में कार्यशाला की। विकसित देशों में फल व सब्जियों के निर्यात के लिए ग्लोबल जीएपी के प्रमाणन से संबंधित दस्तावेजीकरण पर प्रशिक्षित किया। किसानों, बागवानों के साथ कृषि, उद्यान और कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार निदेशालय के अधिकारियों से सवाल किए। प्रतिभागियों को रिकॉर्ड कीपिंग, ट्रेसबिलिटी, आंतरिक निरीक्षण, अनुपालन दस्तावेज एवं ऑडिट तैयारी से संबंधित बिंदुओं पर विस्तार से समझाया।

दूसरे दिन ग्लोबल जीएपी के दस्तावेजीकरण पर किया प्रशिक्षित

ग्लोबल जीएपी के सिद्धांत एवं मापदंड के क्रियान्वयन संबंधित व्यावहारिक ज्ञान भी दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न असाइनमेंट दिए गए। सक्रिय रूप से सहभागिता करके अपने निष्कर्षों का प्रस्तुतीकरण भी किया। इससे प्रतिभागियों की समझ को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायता प्राप्त हुई। कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार निदेशालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपनिदेशक मुख्यालय डॉ. सुग्रीव शुक्ला, सहायक निदेशक संजय कुमार व गंगा दयाल, सहायक निदेशक वाराणसी अमित यादव, उपनिदेशक उद्यान लखनऊ मंडल डॉ. डीके वर्मा समेत अन्य मंडलों के 40 अधिकारी उपस्थित रहे।

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