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भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से 2 अरब लोगों के बाजार को मिलेगा लाभ: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत और यूरोप के किसानों, मछुआरों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), छोटे उद्योगों, नवोन्मेषकों, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों, विनिर्माताओं तथा सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर खोलता है।

पीयूष गोयल ने मुंबई में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारत-बेल्जियम के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इस समझौते पर कुशलतापूर्वक बातचीत की गई है। इस अवसर पर बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बातचीत पूरी होने से पहले करीब 25 वर्षों तक काम किया गया। उन्होंने कहा कि यह समझौता 2 अरब लोगों को एक साथ लाता है और इसके तहत वैश्विक जीडीपी का एक-चौथाई, विश्व व्यापार का एक-तिहाई तथा 24 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का विशाल बाजार शामिल है। यूरोपीय संघ के सभी 27 देश इस समझौते के पक्ष में हैं, इसका समर्थन कर रहे हैं और जल्द से जल्द आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करके इसे लागू करना चाहते हैं। उनकी समझ के अनुसार, यूरोप के संदर्भ में किसी व्यापार समझौते को लेकर इस तरह का सर्वसम्मत सहयोग मिलना दुर्लभ है। इसी तरह, भारत में भी समाज के सभी वर्गों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का पूरे दिल से समर्थन किया है।

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से व्यापार संबंध मजबूत होंगे और कंपनियों, युवा प्रतिभाओं तथा निवेश के लिए नए मार्ग खुलेंगे। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाएं किसी भी तरह की रुकावट या वैश्विक चुनौती का बेहतर ढंग से सामना करने में सक्षम होंगी। बार्ट डी वेवर ने भारत व यूरोप के बीच एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह को एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक कड़ी बताते हुए कहा कि एफटीए से हीरा, खाद्य प्रसंस्करण, औषधि, समुद्री सेवाओं, हरित हाइड्रोजन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 95 प्रतिशत से अधिक भारतीय और यूरोपीय वस्तुओं के निर्यात पर लागू शुल्क या तो समाप्त कर दिए जाएंगे या उनमें कमी की जाएगी।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत एवं बेल्जियम के पास आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है, क्योंकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं पांच प्रमुख क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक हैं। भारत और बेल्जियम रत्न एवं आभूषणों, जिसमें प्रयोगशाला में निर्मित हीरे भी शामिल हैं, के क्षेत्र में संयुक्त रूप से नए उत्पाद व डिजाइन विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं। पीयूष गोयल ने एंटवर्प, मुंबई व सूरत जैसे प्रमुख हीरा केंद्रों को ध्यान में रखते हुए प्रौद्योगिकी तथा प्रमाणन के क्षेत्र में अधिक सहयोग और एक-दूसरे की प्रमाणन प्रणालियों को परस्पर मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि बेल्जियम की विश्वस्तरीय माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान क्षमता को भारत के बड़े पैमाने, कुशल कार्यबल और प्रतिभा के साथ जोड़कर सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में डिजाइन से लेकर विनिर्माण तक का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकता है। भारत का हरित हाइड्रोजन मिशन एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह की ईंधन आपूर्ति और हरित जहाजरानी से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से यूरोप की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे सकता है। उन्होंने इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच और अधिक सहयोग का आह्वान किया।

गोयल ने जॉन कॉकरिल के साथ समझौता ज्ञापनों के आदान-प्रदान का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा एवं उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। इनमें ड्रोन-रोधी प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सटीक मारक हथियार तथा भारत में डिजाइन की गई ब्रह्मोस और पिनाका मिसाइलों के पश्चिमी देशों को निर्यात के अवसर शामिल हैं। भारत और बेल्जियम के बीच औद्योगिक तालमेल पहले कभी इतना गहरा नहीं रहा। गोयल ने यह भी बताया कि जॉन कॉकरिल भारत की बोफोर्स तोपों के लिए गोला-बारूद का निर्माण करती है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में यूरोप में रक्षा खर्च में बढ़ोतरी और भारत की अपनी सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में मौजूद अवसरों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इनमें आलू प्रसंस्करण, शीत भंडारण एवं शीत श्रृंखला से लेकर खाद्य प्रसंस्करण के अन्य क्षेत्र शामिल हैं। गोयल ने कहा कि प्रौद्योगिकी व टिकाऊ कृषि-मूल्य श्रृंखला के माध्यम से बेल्जियम और भारत मिलकर पूरी दुनिया की जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे सकते हैं। बेल्जियम, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से पैदा होने वाले अवसरों का प्रवेश द्वार है। उन्होंने बताया कि एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है और इसे उस महत्वपूर्ण द्वार के रूप में देखा जा सकता है, जिसके माध्यम से एफटीए के तहत होने वाला व्यापार यूरोप पहुंचेगा या भारत भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि एंटवर्प के विश्वस्तरीय अंतर्देशीय जलमार्ग, रेल और सड़क नेटवर्क को ब्रुग्स के समुद्री संपर्क, गहरे पानी, रोल-ऑन/रोल-ऑफ तथा ऑटोमोबाइल सुविधाओं के साथ जोड़कर यह बंदरगाह भारतीय निर्यातकों को यूरोप के औद्योगिक व उपभोक्ता बाजारों तक पहुंचने का एक बेजोड़ मार्ग उपलब्ध कराता है। पिछले एक दशक में यूरोपीय संघ के साथ भारत का व्यापार दोगुना होकर लगभग 140 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। संरक्षणवाद, बाधित आपूर्ति श्रृंखला, भोजन और ईंधन की आपूर्ति में आने वाली रुकावटों, दो युद्धों, अस्थिरता, अनिश्चितता और गंभीर वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और बेल्जियम के सामने एक विकल्प था या तो मौजूदा अफरातफरी में बह जाएं या फिर भरोसे और विश्वसनीयता के केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करें।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बेल्जियम के नोबेल पुरस्कार विजेता इल्या प्रिगोगाइन का जिक्र करते हुए ”अराजकता से व्यवस्था के उभरने” के विचार का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बेल्जियम और भारत के प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में, ”हम निर्माण करने, जुड़ने तथा मिलकर काम करने का रास्ता चुनते हैं।”

पीयूष गोयल ने भारत की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं पर जोर देते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा अभी शुरू ही हुई है। उन्होंने बताया कि आज भारत पीपीपी के आधार पर 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था है और 20 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के जीडीपी के साथ पीपीपी के आधार पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। 1.4 अरब भारतीयों का लक्ष्य और सामूहिक संकल्प है कि 2047 तक, जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की मौजूदा अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदला जाए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रोडमैप तैयार हो चुका है और भारत में सामूहिक प्रयासों के तहत सामाजिक उत्थान, बुनियादी ढांचे का निर्माण, बड़े पैमाने पर विनिर्माण व वैश्विक कंपनियों के लिए भारत को डिजाइन, सह-डिजाइन, सह-निर्माण तथा संयुक्त विनिर्माण के लिए एक गंतव्य बनाने पर काम किया जा रहा है। भारत और उसके साझेदार न केवल यूरोप और भारत, बल्कि पूरी दुनिया को अपना बाजार मानकर सामूहिक रूप से काम कर सकते हैं।

पीयूष गोयल ने सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भारत के बड़े कार्यक्रम के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ‘सेमीकॉन इंडिया’ के पहले संस्करण को दुनिया भर के निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिला था और हाल ही में 14 अरब अमेरिकी डॉलर के बजट के साथ इसका दूसरा संस्करण ‘सेमीकॉन इंडिया 2.0’ लॉन्च किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर, यह मिशन भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को बढ़ावा देगा।

पीयूष गोयल गोयल ने कहा कि भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन शुरू हो चुका है और यह स्टार्टअप्स को मदद कर रहा है। साथ ही, देश अपने ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ पर भी तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘शांति अधिनियम’ के तहत भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम 60 साल बाद अब निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है। अगले 20 वर्षों में जीवाश्म ईंधन की जगह लेने के लिए 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता, बेसलोड क्षमता के तौर पर विकसित करने की योजना तैयार है।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभी 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर का है और यह अगले आठ वर्षों में बढ़कर 44 अरब अमेरिकी डॉलर का हो सकता है। इसकी मुख्य वजह नई निजी पहल, स्टार्ट-अप, नवोन्मेषक और डिजाइनर होंगे, जो अनोखे समाधान तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जहां किसी निजी कंपनी ने अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च किया है और पहला ऐसा देश है, जहां कोई निजी पहल अपने पहले ही प्रयास में सफल रही है।

केंद्रीय मंत्री ने नवाचार के लिए भारत में हाल ही में शुरू किए गए 12 अरब अमेरिकी डॉलर के अनुसंधान और विकास कोष का भी उल्लेख किया। भले ही यूरोप के नजरिए से 12 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि कम लग सकती है, लेकिन भारत की पीपीपी की मजबूती के कारण सरकार का योगदान, निजी क्षेत्र का निवेश और भारतीय अकादमिक जगत की क्षमताएं मिलकर नवाचार के क्षेत्र में यूरोप के बराबर नतीजे दे सकती हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि यह बहुत कम लागत में और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ नवाचार के स्तर के अनुरूप है।

पीयूष गोयल ने बेल्जियम और यूरोपीय संघ को भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत के बड़े पैमाने, प्रतिभा, युवा ऊर्जा, युवा आबादी व निर्णायक नेतृत्व के साथ बेल्जियम की प्रौद्योगिकी, नवाचार और पूंजी को भारत में फलने-फूलने का अवसर मिल सकता है। महाराष्ट्र कारोबार के लिए एक बेहद आकर्षक जगह है। उन्होंने इसे भारत की वित्तीय एवं वाणिज्यिक राजधानी, औद्योगिक राजधानी और देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताया।

पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री डी वेवर व बेल्जियम की कंपनियों को खुले मन और खुले दिल से भारत के साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत में आधुनिक उद्योगों के लिए जरूरी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन सभी अवसरों के केंद्र में लोग हैं, जिनमें भारतीय समुदाय, छात्र और शोधकर्ता शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कार्यबल की आवाजाही को बेहतर बनाने, योग्यताओं की आपसी मान्यता, मिलकर कौशल विकास करने और दोहरी डिग्री वाले शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने पर जोर दिया, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बेल्जियम को प्रतिभाओं तथा युवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। गोयल ने कहा कि भारत और बेल्जियम के बीच 1947 में भारत की आजादी के समय से ही बहुत अच्छे तथा मजबूत संबंध रहे हैं। उन्होंने बताया कि बेल्जियम उन शुरुआती यूरोपीय देशों में से एक था, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। भारत इस कदम के लिए बेल्जियम के लोगों का हमेशा आभारी रहेगा।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री डी वेवर को उनके नेतृत्व, सहयोग और बेल्जियम-भारत तथा यूरोपीय संघ – भारत संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने 25 वर्षों की इस यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बेल्जियम की अपनी हालिया यात्रा के दौरान, उन्होंने बेल्जियम की कंपनियों में वास्तविक ऊर्जा महसूस की। उन्होंने कहा कि बेल्जियम और भारत मिलकर बेल्जियम की प्रौद्योगिकी, नवाचार और पूंजी को भारत के बड़े पैमाने, प्रतिभा, युवा ऊर्जा, युवा आबादी तथा निर्णायक नेतृत्व के साथ जोड़कर “बेहद जबरदस्त ताकत” खड़ी कर सकते हैं।

अपने भाषण के अंत में गोयल ने हीरे के बनने की प्रक्रिया का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक हीरा धरती के बहुत नीचे भारी दबाव में बनता है, जबकि प्रयोगशाला में बनाए जाने वाले हीरे लगातार चलने वाली कार्बन जमाव प्रक्रियाओं के जरिए तैयार किए जाते हैं। दबाव और उथल-पुथल से भरी इस दुनिया में भारत व बेल्जियम मिलकर हीरे की तरह टिकाऊ, सुंदर एवं कीमती चीज बना सकते हैं। भारत और बेल्जियम मिलकर कुछ ऐसा बनाएं, जो हीरे की तरह ही टिकाऊ, सुंदर व कीमती हो। ऐसा हीरा, जो सिर्फ बेल्जियम और भारत के लिए नहीं, सिर्फ यूरोप के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए हो।

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