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इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रकाश हत्याकांड : सभी 7 आरोपी उम्रकैद की सजा से बरी, 35 साल पहले की घटना में सुनाई गई थी सजा

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगभग 35 साल पहले बुलंदशहर में पुलिस इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रकाश गौड़ की हत्या में सजायाफ्ता सभी अभियुक्तों को आरोप से बरी कर दिया है. इस हत्याकांड में सात अभियुक्तों को बुलंदशहर की सेशन कोर्ट ने 3 अगस्त 2015 को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी. सजा के खिलाफ अभियुक्तों की अपील पर न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने सुनवाई की.

अपील पर निर्णय सुनाते हुए खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन अभियुक्तों के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में नाकाम रहा. ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाते समय उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया. मामले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात देवेंद्र प्रकाश गौड़ 9 अक्टूबर 1989 को सुबह पौने दस बजे करीब अपनी कार से पिता क्रांति प्रकाश गौड़, भाई देवेश प्रकाश गौड़ और एक पुलिस इंस्पेक्टर महेंद्र कुमार कौशिक के साथ किसी काम से नरोरा से बुलंदशहर जा रहे थे. जब वह लोग डिबाई रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंचे तो वह पहले से बंद थी. सभी ट्रेन के गुजरने का इंतजार करने लगे. इसी बीच एक बुलेट मोटरसाइकिल से प्रमोद कुमार और संजय दीक्षित तथा एक सफेद रंग की एंबेसडर कार से योगेंद्र, वीरपाल, हरपाल और संजय पहुंचे. संजय दीक्षित और योगेंद्र के हाथ में बंदूके थीं. उन्होंने देवेंद्र पर फायर कर दिया. गोली लगने से वह गिर गया.

वादी मुकदमा और उसके पिता ने उसे उठाकर कार की पिछली सीट पर लिटा दिया, तभी हरपाल व वीरपाल कार के पास पहुंचे और उन्होंने भी देवेंद्र पर फायर कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई. हरपाल और वीरपाल देवेंद्र की राइफल लेकर घटनास्थल से भाग गए. देवेश प्रकाश ने सभी अभियुक्तों को नामजद करते हुए प्राथमिक दर्ज कराई थी. अभियोजन की ओर से कहा गया कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की रंजिश के कारण अभियुक्तों ने देवेंद्र प्रकाश की हत्या की है. इससे पूर्व भी अभियुक्तों ने नरोरा थाने में देवेंद्र प्रकाश पर फायरिंग की थी. अपील पर सुनवाई के दौरान अभियुक्त संजय कुमार साहनी और चंद्रपाल की मृत्यु हो गई. अपील लंबित रहने के दौरान योगेंद्र को छोड़कर अन्य अभियुक्तों को हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा किया था.

अपील पर निर्णय सुनाते हुए पीठ ने कहा कि अभियोजन की ओर से साक्ष्य एकत्र करने में लापरवाही की गई है. जिससे अभियुक्तों की घटनास्थल पर उपस्थित संदेश से परे साबित नहीं होती है. मृतक पर माया त्यागी हत्याकांड में शामिल होने का भी आरोप था. जिसमें कई पुलिसवालों को सजा हुई है तथा मृतक के खिलाफ इस मामले में सुनवाई पर हाईकोर्ट की ओर से रोक थी. माया त्यागी हत्याकांड में शामिल दो पुलिस कर्मियों की अज्ञात लोगों द्वारा हत्या की जा चुकी है. ऐसे में इस आशंका को नकारा नहीं जा सकता है कि इस तरीके से अज्ञात लोगों ने देवेंद्र की भी हत्या की होगी.

देवेंद्र गौड़ पर कई अन्य आपराधिक मामले भी थे, जिसकी वजह से वह पिछले तीन वर्षों से निलंबित चल रहा था. कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने पंचनामा और अन्य दस्तावेजों में आईपीसी की धारा 147 148 को बाद में जोड़ा, इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है. जहां तक राइफल लूटने का प्रश्न है, अभियोजन की ओर से यह कभी नहीं साबित कराया गया कि मृतक के पास कोई वैध लाइसेंस था या उसके पास राइफल थी. घटना में शामिल चश्मदीद गवाह महेंद्र कुमार कौशिक ने भी अपने बयान में कहा कि वह घटनास्थल पर मृतक के पिता के साथ मौजूद नहीं था. घटनास्थल के आसपास के गवाहों ने भी घटना वाले दिन और उस वक्त किसी सफेद एंबेसडर कार को देखने की बात स्वीकार नहीं की. कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है.

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