देवरिया पुलिस का नया विज़न; थानों में शुरू हुआ गांववार डेस्क सिस्टम, भटकते फरियादियों को तत्काल मिली राहत
शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस में लागू हुआ नया डेस्क सिस्टम, खुद खामपार थाने पहुंचे पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर

- गौरव कुशवाहा/देवरिया- थाना स्तरों पर होने वाली जनसुनवाई की पुरानी और शिथिल व्यवस्था को बदलते हुए जिला पुलिस प्रशासन ने शनिवार को एक बेहद पारदर्शी और परिणामोन्मुखी प्रयोग धरातल पर उतारा है। पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर के विज़नरी निर्देशन में जनपद के समस्त थानों पर इस बार थाना समाधान दिवस का आयोजन एक बिल्कुल नए और आधुनिक गांववार डेस्क सिस्टम के तहत किया गया। इस बदली हुई व्यवस्था के तहत अब फरियादियों को अपनी बारी या किसी बड़े बाबू की संस्तुति के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ा, बल्कि थानों के भीतर बकायदा हल्का प्रभारियों, बीट दरोगाओं और बीट पुलिस अधिकारियों ने अपने-अपने आवंटित गांवों और क्षेत्रों की पृथक-पृथक डेस्क लगाई। इस नई कार्यप्रणाली का सीधा उद्देश्य पुलिस के भीतर उत्तरदायित्व की भावना का निर्धारण करना, आम जनता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और पुलिसिंग में कॉरपोरेट स्तर की पारदर्शिता लाना है।
इस अभिनव विधिक और प्रशासनिक प्रयोग की जमीनी हकीकत परखने के लिए पुलिस अधीक्षक स्वयं सुदूर सीमावर्ती थाना खामपार पहुंचे। वहां उन्होंने न केवल खुद मौजूद रहकर जनता की पैतृक और तात्कालिक समस्याओं को बेहद संजीदगी से सुना, बल्कि नव-लागू डेस्क सिस्टम की कार्यकुशलता का भी गहनता से मूल्यांकन किया। एसपी ने मौके पर उपस्थित राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि हल्का स्तर पर तैनात पुलिसकर्मी केवल थानों में बैठकर रिपोर्ट न लगाएं, बल्कि अपनी डेस्क पर आने वाली हर शिकायत को सीधे अपने रजिस्टर में दर्ज कर उसकी भौतिक पड़ताल सुनिश्चित करें। इस नई व्यवस्था से सबसे बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि पीड़ित सीधे अपने गांव के बीट अधिकारी की डेस्क पर पहुंचे, जिससे मामले को समझने और उस पर त्वरित निर्णय लेने में अत्यधिक सहूलियत हुई।
शनिवार को आयोजित इस जनपद स्तरीय समाधान दिवस के आंकड़ों पर यदि एक खोजी नजर डाली जाए, तो पूरे जिले के समस्त थानों में कुल 249 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। नए डेस्क सिस्टम की तत्परता और राजस्व विभाग के साथ बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय के चलते कुल 48 जटिल मामलों का मौके पर ही दोनों पक्षों की आपसी सहमति से स्थाई निस्तारण करा दिया गया। वहीं, शेष बचे 201 भूमि, रास्ते और पारिवारिक विवादों से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों के निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण के लिए मौके पर ही पुलिस और राजस्व कर्मियों की संयुक्त टीमों का गठन कर उन्हें रवाना किया गया। पुलिस कप्तान ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में टीमें मौके पर भेजी जा रही हैं, उनकी क्लोजर रिपोर्ट और गुणवत्ता की क्रॉस-चेकिंग खुद उनके कार्यालय स्तर से की जाएगी।



