प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा, जिले में बनेंगे 54 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर

- गौपालक और जैविक खेती से जुड़े उद्यमियों को मिलेगा बीआरसी संचालन का मौका
गौरव कुशवाहा
देवरिया। जिले में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (एनएमएनएफ) के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उप कृषि निदेशक सुभाष मौर्य ने बताया कि जनपद में इस योजना के अंतर्गत कुल 54 क्लस्टरों का चयन किया गया है, जहां प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) की स्थापना प्रस्तावित है।
बीआरसी ऐसे केंद्र होंगे जहाँ प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक आदानों जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत, दशपर्णी अर्क आदि का निर्माण व वितरण किया जाएगा। इन केंद्रों का चयन जिला स्तरीय निगरानी समिति द्वारा किया जाएगा। चयन के लिए उन्हीं उद्यमियों, समूहों या एफपीओ को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके पास प्राकृतिक खेती का अनुभव है या जिनके समूह में प्रशिक्षित सदस्य मौजूद हैं।
बीआरसी संचालकों को अपने खेतों में भी प्राकृतिक खेती अपनानी होगी। यदि चयनित क्लस्टर में कोई सक्रिय जैविक किसान उपलब्ध नहीं है, तो राज्य प्राकृतिक खेती सेल के माध्यम से प्रशिक्षित इच्छुक किसानों की पहचान की जाएगी। बीआरसी के संचालन के लिए गौशालाओं से समन्वय, विशेष रूप से उसी ग्राम पंचायत में स्थित संस्थाओं से, अनिवार्य होगा ताकि गाय का गोबर, गौमूत्र व बायोमास जैसे आवश्यक कच्चे जैव इनपुट आसानी से उपलब्ध हो सकें।
बीआरसी को जैविक आदानों के निर्माण, भंडारण और वितरण हेतु पर्याप्त भौतिक संसाधनों से युक्त होना अनिवार्य है। इच्छुक आवेदकों को 9 जून 2025 तक उप कृषि निदेशक कार्यालय, देवरिया में अपना व्यवसाय प्रस्ताव सहित आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन में बीआरसी की संभावित अवस्थिति, जैविक खेती की वर्तमान स्थिति, बाजार विश्लेषण, किसान जागरूकता योजना, निर्माण किए जाने वाले जैविक उत्पादों का विवरण और कच्चे माल के स्रोत का उल्लेख अनिवार्य होगा।
यदि किसी एफपीओ, ग्राम पंचायत, गौशाला या अन्य पंजीकृत संस्था के साथ भागीदारी का प्रस्ताव है, तो उसकी स्पष्ट रूपरेखा भी आवेदन में शामिल करनी होगी। साथ ही यदि संचालन के लिए फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट (PSC) या अन्य दस्तावेज आवश्यक हैं, तो उन्हें भी संलग्न किया जाना जरूरी होगा।



