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यूपी में ईको टूरिज्म परियोजनाओं को नई उड़ान, इन 10 स्थलों का होगा कायाकल्प

लखनऊः उत्तर प्रदेश में हरित और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने राज्य के 10 प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों के संचालन और देखरेख के लिए इच्छुक संस्थाओं, कंपनियों और अनुभवी एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इस पहल से प्राकृतिक धरोहरों के पेशेवर प्रबंधन, दीर्घकालिक निवेश और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि चयनित एजेंसियों को ईको टूरिज्म परियोजनाओं का संचालन प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय स्थानीय समुदायों को रोजगार देने के साथ-साथ पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन के संस्थागत ढांचे को मजबूत करेगा।

बोर्ड द्वारा जिन 10 प्रमुख स्थलों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं, उनमें अयोध्या की उधेला झील, ललितपुर के बदरौन स्थित करकरावल जलप्रपात, बाराबंकी की बघर झील, बलिया का मैरीटार गांव, सीतापुर की अज्जेपुर झील, महाराजगंज का देवदह स्थल, कुशीनगर की रामपुर सोहरौना झील, चित्रकूट का रामनगर, जालौन का पचनदा तथा बांदा जनपद की नरैनी तहसील में कालिंजर किले के समीप पर्यटन सुविधा केंद्र शामिल हैं। सभी परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित होंगी। इच्छुक आवेदक 27 फरवरी 2026 तक अपने प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। आवेदन से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश, पात्रता शर्तें और प्रक्रिया बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्राकृतिक संपदा, जैव-विविधता और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है और यह पहल प्रदेश को एक प्रमुख ईको टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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