पंजाबराज्य

भारत के हितों की रक्षा करने के लिए मोदी सरकार में हिम्मत नहीं, विदेशी ताकतें हमारी ‘कमजोर’ विदेश नीति को खुलेआम डराती हैं: हरपाल सिंह चीमा

चंडीगढ़। पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए आज पंजाब विधानसभा में प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन किया और भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया, जबकि भाजपा विधायक सदन में अनुपस्थित रहे।

सदन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी विदेश नीति इतनी कमजोर हो गई है कि हमें विदेशी ताकतों द्वारा लगातार डराया-धमकाया जा रहा है। चाहे यह पिछले वर्ष सीमा तनाव के दौरान केवल एक ट्वीट के माध्यम से किया गया हस्तक्षेप हो या हाल ही में ईरान में हुई जान-माल की हानि पर पूरी तरह चुप्पी, केंद्र सरकार ने यह साबित कर दिया है कि उसमें भारत के रणनीतिक हितों के लिए मजबूती से खड़े होने का साहस नहीं है। हम भाजपा को भारत को अमेरिका का अधीन बाज़ार बनाने नहीं देंगे और न ही देश के लोगों को गुलाम बनने देंगे।”

पंजाब के वित्त मंत्री ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने बार-बार राष्ट्रीय संप्रभुता से ऊपर निजी और पार्टी हितों को रखा है। केंद्र सरकार बार-बार अमेरिकी दबाव के आगे झुकती रही है, जिससे भारत वैश्विक मंच पर कमजोर दिखाई दे रहा है। महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भाजपा नेतृत्व की लंबी चुप्पी इस बात की गंभीर आशंका पैदा करती है कि कहीं केंद्र सरकार को संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों को लेकर विदेशी ताकतों द्वारा बेनकाब या ब्लैकमेल किए जाने का डर तो नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस और भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकारें दशकों से देश के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने में असफल रही हैं, जिसके कारण भारत आज कमजोर स्थिति में है। ईरान की ओर से खुले तौर पर तेल आपूर्ति की पेशकश के बावजूद केंद्र सरकार चुप बैठी है। अमेरिका-ईरान के चल रहे टकराव के परिणामस्वरूप ईंधन और रसोई गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे देशभर और पंजाब के किसानों, मजदूरों तथा मध्यम वर्ग पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।”

हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता हमारी अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है। विश्व स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ने की संभावना है और इसका सबसे अधिक असर आम आदमी—किसान, मजदूर और दुकानदार—पर पड़ेगा, जिन्हें भाजपा की कूटनीतिक अक्षमता का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। भाजपा योजनाबद्ध तरीके से भारत के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है और विपक्ष शासित राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है और ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत पंजाब के हजारों करोड़ रुपये गैरकानूनी तरीके से रोके गए हैं।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मोगा में होने वाली रैली से पहले वित्त मंत्री ने कहा, “सुनील जाखड़ और कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित पंजाब भाजपा के नेताओं को गृह मंत्री से पंजाब के रोके गए आरडीएफ, एनएचएम और प्रधानमंत्री आवास योजना के फंडों के बारे में सवाल पूछने का साहस करना चाहिए।”

जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने वाली समिति में अपने अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा,
“पंजाब, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के कड़े विरोध के बावजूद देर रात की आपात बैठकों में जीएसटी नियमों को जबरन लागू किया गया। पंजाब, जिसने ऐतिहासिक रूप से देश की आजादी और अखंडता के लिए सबसे अधिक बलिदान दिया है, एक बार फिर भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और संघीय ढांचे को भाजपा की तानाशाही नीतियों से बचाने के लिए संघर्ष का नेतृत्व करेगा।”

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