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ईएनटी डॉक्टर चला रहा फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर , नोडल अधिकारी पर मिलीभगत के आरोप

संवाददाता ख्वाजा एक्सप्रेस

फरीदपुर। जनपद बरेली मे स्वास्थ्य विभाग अपने थोडे से निजी लाभ को लेकर लोगो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने बिल्कुल भी गुरेज नही करता है। ऐसा ही एक मामला जनपद की तहसील फरीदपुर से देखने मे आया है जहा स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी सरकार की नीतियों पर पलीता लगाने में कोई कोर कसर नही छोड रहे है बताते चले कि तहसील मे संचालित ‘न्यू बरेली अल्ट्रासाउंड सेंटर’ पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मामला इतना संगीन है कि अब सीधे तौर पर नोडल अधिकारी डॉ. लईक अहमद की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि विभागीय संरक्षण और कथित सांठगांठ के दम पर सेंटर लंबे समय से नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए है। सूत्रों के मुताबिक, जिस सेंटर पर अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जांच की जा रही है, वहां कथित तौर पर रेडियोलॉजिस्ट की जगह ENT (नाक, कान, गला) विशेषज्ञ के दस्तावेजों के आधार पर फाइल पास कर दी गई। नियम साफ कहते हैं कि अल्ट्रासाउंड सेंटर का संचालन केवल योग्य रेडियोलॉजिस्ट या सोनोलॉजिस्ट की निगरानी में ही हो सकता है। मगर इसके बावजूद सेंटर अवैध रूप से धड़ल्ले से चल रहा है। बताया जा रहा है कि विभागीय जांच के दौरान भी इस गंभीर खामी को नजरअंदाज किया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके दबाव या संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा था।

क्या सुविधा शुल्क के दम पर पास
हो गयी फाइल

स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में चर्चा तेज है कि आखिर इतनी बड़ी तकनीकी खामी को नजरअंदाज कैसे कर दिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिना सही जांच-पड़ताल के फाइल को हरी झंडी दे दी गई? या फिर विभागीय अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी दिखाकर सेंटर को संचालन की अनुमति दे दी? लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते निष्पक्ष जांच होती तो इतना बड़ा मामला सामने ही नहीं आता।

मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

जानकारों का कहना है कि ENT विशेषज्ञ द्वारा पेट और अन्य हिस्सों का अल्ट्रासाउंड करना मेडिकल नियमों और नैतिकता दोनों के खिलाफ है। इससे गलत रिपोर्ट आने का खतरा बढ़ सकता है, जो मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। अगर किसी मरीज की रिपोर्ट गलत आती है तो उसका सीधा असर इलाज पर पड़ता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। ऐसे में यह मामला केवल नियम उल्लंघन नहीं बल्कि आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ माना जा रहा है।

नोडल अधिकारी पर उठे बड़े सवाल

अब लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं- क्या नोडल अधिकारी को इस गड़बड़ी की जानकारी होने के वाद भी सेंटर को संचालन करने मंजूरी कैसे मिल गयी। PCPNDT एक्ट के तहत निरीक्षण में यह खामी क्यों नहीं पकड़ी गई? क्या इस पूरे खेल के पीछे आर्थिक सांठगांठ काम कर रही है? क्या पहले भी इसी तरह अन्य फाइलों को मंजूरी दी गई?यह भी एक स्वास्थ्य विभाग पर बडा प्रश्न चिंह खडा करता है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सेंटर की तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन अधिकारियों ने ऐसी फाइलों को मंजूरी दी, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो। लोगों का कहना है कि अगर इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो स्वास्थ्य विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार को और बढ़ावा मिलेगा। अगर आरोप सही साबित हुए, तो यह मामला सिर्फ एक सेंटर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य विभाग में फैले बड़े खेल और भ्रष्ट तंत्र का बड़ा खुलासा साबित हो सकता है।।

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