उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

UP Census 2027 : व्हाट्सएप पर जुड़ेंगे जनगणना कर्मी, ट्रेनिंग से गायब 518 कर्मियों को नोटिस जारी

अपर प्रमुख जनगणना अधिकारी/नगर आयुक्त गौरव कुमार ने जनगणना प्रशिक्षण के दौरान कहा कि प्रगणक और सुपरवाइजर का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर मास्टर ट्रेनों से जोड़ा जाए। आवश्यकता पड़ने पर किसी तरह की जानकारी या मार्गदर्शन तुरंत मिलेगा। नगर आयुक्त ने रविवार को शहर के जोन-5 स्थित इंडिया लिटरेसी बोर्ड व जोन-2 स्थित ईदगाह परिसर में चल रहे प्रशिक्षण सत्रों का निरीक्षण किया।

 कक्षाओं में जाकर प्रगणकों और सुपरवाइजर से संवाद किया और उन्हें जनगणना कार्य के महत्व बताए। कर्मियों का उत्साहवर्धन किया। कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, जिसके आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं का निर्माण होता है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अनुपस्थित रहने पर निलंबन के साथ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। प्रशिक्षित और जिम्मेदार कर्मी ही जनगणना प्रक्रिया को सफल बना सकते हैं।

जनगणना के साथ : 518 कर्मी अनुपस्थित

नगर में जनगणना प्रशिक्षण केंद्रों का अफसरों ने निरीक्षण किया। प्रशिक्षण सत्र में बड़ी संख्या में कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। लगातार बड़ी संख्या में गैरहाजिरी देख प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। जारी आंकड़ों के अनुसार, जोन-2 में 300 में 112 कर्मचारी अनुपस्थित रहे। इसी तरह जोन-3 में 450 में से 178, जोन-5 में 135 में से 47 व जोन-6 में 581 में से 181 प्रगणक और सुपरवाइजर प्रशिक्षण में शामिल नहीं हुए। इन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और संतोषजनक जवाब न मिलने पर निलंबन किया जाएगा।

वहीं, इतने बड़े पैमाने पर अनुपस्थिति को प्रशासन ने गंभीरता से लिया। स्पष्ट किया कि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 के तहत यदि कोई नियुक्त अधिकारी बिना उचित कारण अपने कर्तव्यों से इनकार करता है या लापरवाही बरतता है, तो दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अनुपस्थिति या कार्य से इनकार करने पर तत्काल विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

जनगणना प्रशिक्षण ने परिषदीय विद्यालयों की पढ़ाई की चौपट

आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत चल रहे शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम ने जिले के परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार आधे से अधिक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को सामूहिक रूप से प्रशिक्षण शिविरों में भेज दिया गया है। परिणामस्वरूप कई स्कूलों में कक्षाएं ठप पड़ गई हैं या केवल वैकल्पिक एकल शिक्षक व्यवस्था से औपचारिकता निभाई जा रही है।

बिना शिक्षक बच्चे हो रहे प्रभावित, घट रही उपस्थिति

प्राथमिक विद्यालयों में जहां सुबह मध्याह्न भोजन कराने के बाद शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों के लिए रवाना हो जाते हैं, वहीं दोपहर की कक्षाएं लगभग बंद हो जाती हैं। कुछ स्कूलों में तो सभी शिक्षक एक साथ प्रशिक्षण पर चले गए हैं, जिससे छात्रों को घर लौटना पड़ रहा है। शिक्षक संघों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक ओर शिक्षकों की कमी है, दूसरी ओर गैर-शैक्षणिक कार्यों में उन्हें लगाया जा रहा है। अभिभावक भी नाराज हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी वैकल्पिक व्यवस्था का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। बेसिक शिक्षा अधिकारी लालचंद ने बताया कि प्रशिक्षण आवश्यक है। बहुत प्रभाव नहीं पड़ा है।

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