गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध का शंखनाद, छोटी काशी में आज होगा जगद्गुरु शंकराचार्य का पदार्पण
ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आगमन से रुद्रपुर में आध्यात्मिक हलचल

- 81 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान के तीसरे दिन बाबा दुग्धेश्वर नाथ मंदिर बनेगा वैचारिक क्रांति का केंद्र।
- गो-वंश संरक्षण हेतु विधिक और धार्मिक धरातल पर निर्णायक युद्ध का आह्वान।
गौरव कुशवाहा/देवरिया
भारतीय सनातन परंपरा के शीर्ष ध्वजवाहक और उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की इक्यासी दिवसीय गविष्टि गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा अपने तृतीय दिवस के महत्वपूर्ण पड़ाव पर आज छोटी काशी रुद्रपुर की धरा को स्पर्श करेगी। यह यात्रा मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता के आधार-स्तंभ गो-वंश की रक्षा हेतु एक संगठित शंखनाद है, जिसका केंद्र बिंदु आज सायं 4 बजे ऐतिहासिक बाबा दुग्धेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण बनेगा। गो-संरक्षण के प्रति जन-मानस को झकझोरने और संवैधानिक अधिष्ठान की मांग के साथ निकली यह यात्रा रुद्रपुर के आध्यात्मिक वातावरण में एक नवीन विमर्श को जन्म देने की ओर अग्रसर है।

जगद्गुरु का यह आगमन उस समय हो रहा है जब संपूर्ण राष्ट्र में गो-वंश की दशा और दिशा को लेकर व्यापक मंथन चल रहा है। गविष्टि शब्द की शास्त्रीय व्याख्या और उसके अनुपालन को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से संचालित यह धर्मयुद्ध यात्रा शासन और प्रशासन को गो-वध निषेध के विधिक प्रावधानों के प्रति सचेत करने का सामर्थ्य रखती है। रुद्रपुर के बाबा दुग्धेश्वर नाथ मंदिर में शंकराचार्य का प्रवास केवल एक रात्रि विश्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी रणनीतियों के निर्धारण और गौ-भक्तों को संगठित करने की एक वृहद योजना का हिस्सा है। जगद्गुरु के संबोधन में गो-माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग और इसके लिए आवश्यक विधायी हस्तक्षेप पर विशेष बल दिए जाने की प्रबल संभावना है, जो स्थानीय स्तर पर चल रहे आंदोलनों को वैश्विक वैचारिक ऊर्जा प्रदान करेगा।
धर्म और न्याय के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करती यह यात्रा बुधवार की ब्रह्मवेला में एक नए संकल्प के साथ पुनः गतिमान होगी। प्रातः 5 बजे देवाधिदेव महादेव की विशेष पूजा और आरती के उपरांत, जगद्गुरु के आशीर्वाद के साथ यह कारवां अपने अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान करेगा। उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के सर्वोच्च धर्माधीश का रुद्रपुर में यह प्रथम आगमन क्षेत्र के धार्मिक मानचित्र पर एक ऐतिहासिक लकीर खींचने जा रहा है। यात्रा के इस पड़ाव पर सुरक्षा प्रबंधों और प्रशासनिक सतर्कता के मध्य, जगद्गुरु का सानिध्य उन समस्त विसंगतियों पर प्रहार करेगा जो गो-संरक्षण के मार्ग में बाधक बनी हुई हैं। यह यात्रा स्पष्ट संदेश है कि सनातन धर्म की रक्षा हेतु गो-वंश की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, अपितु एक अनिवार्य प्राथमिकता है जिसे अब और विलंबित नहीं किया जा सकता।



