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भगवंत मान सरकार की ऐतिहासिक पहल, पंजाब के 40 लाख गरीब-दलित-पिछड़े वर्ग के परिवारों को मुफ्त राशन किट मिलनी शुरू

संगरूर, 9 मई:

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज संगरूर जिले के गांव भलवान से गरीबों और जरूरतमंद परिवारों को पौष्टिक खुराक उपलब्ध करवाने के लिए राशन किट वितरित करके ‘मेरी रसोई’ स्कीम की शुरुआत की।

देश भर में जरूरतमंद परिवारों को पौष्टिक खुराक देने के लिए सबसे बड़ी पहलों में से एक ‘मेरी रसोई’ स्कीम के तहत राज्य के लगभग 40 लाख गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राशन किट मिला करेगी।

इस स्कीम को बढ़ती महंगाई के दौरान संघर्ष कर रहे परिवारों पर रसोई के बोझ को कम करने के लिए अत्यंत जरूरी मदद बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘आप’ सरकार न सिर्फ ऐलान कर रही है बल्कि मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य देखभाल, महिला-केंद्रित कल्याण स्कीमों और खाद्य सुरक्षा उपायों के माध्यम से हर घर को उचित राहत प्रदान कर रही है।

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि सामाजिक कल्याण को मजबूत करने के साथ-साथ ‘आप’ सरकार बुनियादी ढांचे का तेजी से आधुनिकीकरण कर रही है और आने वाले समय में पंजाब को पूरी तरह “खंभा-मुक्त” राज्य बनाने के लिए जमीनदोज बिजली केबलिंग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

स्कीम के शुभारंभ समारोह के दौरान विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछली सरकारों ने कल्याणकारी उपायों को सिर्फ गेहूं और दालों की वितरण तक सीमित कर दिया था, जबकि पंजाब सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रयास किया है कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की रसोइयों में रोजाना जरूरतों के लिए आवश्यक सभी चीजें उपलब्ध रहें।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “‘मेरी रसोई’ योजना के तहत हर लाभार्थी परिवार को हर तीन महीने में विशेष रूप से तैयार की गई राशन किट मिलेगी, जिसमें सरसों का तेल, दाल, चीनी, नमक, हल्दी और घरेलू रसोई चलाने के लिए जरूरी अन्य वस्तुएं होंगी।”

इस बात पर जोर देते हुए कि यह योजना आम परिवारों की सामान्य जरूरतों, खासकर घरेलू जिम्मेदारियां संभालने वाली महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि मजबूत और खुशहाल पंजाब तभी बनाया जा सकता है जब हर घर की रसोई चलती रहे और कोई बच्चा भूखा न सोए।

उन्होंने कहा, “बच्चों के लिए पौष्टिक खुराक उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और खेलों में भागीदारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमारी सरकार चाहती है कि हर घर में पौष्टिक और जरूरी भोजन पदार्थों की पहुंच हो ताकि बच्चे प्रोटीन की कमी के कारण कमजोरी का शिकार न हों।”

पंजाब सरकार के लोक कल्याण-मुखी शासन मॉडल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के लगभग 90 प्रतिशत घरों को अब जीरो बिजली बिल मिल रहे हैं, जिससे परिवारों को पैसे बचाने और घरेलू खर्च चलाने में काफी मदद मिल रही है।

कृषि और सिंचाई सुधारों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आप’ सरकार ने किसानों के लिए दिन में निर्बाध बिजली सप्लाई सुनिश्चित की है, जिससे वे रात की मुश्किलों की बजाय दिन में अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने पूरे पंजाब में लगभग 14,000 किलोमीटर लंबी रजवाहों, खालों और पाइपलाइनों को बहाल कर और बिछाकर नहरी सिंचाई प्रणाली को फिर से जीवित किया है। इस ऐतिहासिक पहल ने सिंचाई सुविधाओं में सुधार किया है और भूजल को संरक्षित करने में मदद की है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि नहरी पानी की बेहतर उपलब्धता ने किसानों की ट्यूबवेल पर निर्भरता कम की है, जिससे पंजाब में तेजी से कम हो रहे भूजल स्तर के भंडारण को बचाने में बड़ी सहायता मिलेगी।

महिला सशक्तिकरण के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि “मावां-धीयां सत्कार योजना” के लिए रजिस्ट्रेशन प्रगति पर है। इस योजना के तहत हर योग्य महिला को मासिक वित्तीय सहायता दी जाएगी।

उन्होंने कहा, “18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को आगे आना चाहिए और इस स्कीम के लिए रजिस्टर करवाना चाहिए। जनरल वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपए जबकि अनुसूचित जाति से संबंधित परिवारों की महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपए दिए जाएंगे।”

उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं के लिए सम्मान, आत्मविश्वास और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना है ताकि वे अपनी घरेलू जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें।
स्वास्थ्य देखभाल संबंधी सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 10 लाख रुपए तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवरेज प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा, “इस योजना के तहत लोग सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में नकद रहित इलाज प्राप्त कर सकते हैं। पंजाब में किसी भी परिवार को चिकित्सा इलाज के लिए जमीन या कीमती चीजें बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि 35 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्ड पहले ही जारी किए जा चुके हैं और सरकार पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का विस्तार कर रही है।
कल्याणकारी स्कीमों में पहले नौकरशाही द्वारा पैदा की गई अनावश्यक बाधाओं की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने असुविधा का कारण बनने वाली जटिल बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणालियों को हटा दिया है और सभी, खासकर महिलाओं तथा बुजुर्ग नागरिकों के लिए कल्याणकारी स्कीमों संबंधी रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं को सरल बना दिया है।
उन्होंने कहा, “घरेलू काम करने वाली बहुत सी महिलाओं को बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके उंगलियों के निशान समय के साथ फीके पड़ जाते हैं। इसलिए पंजाब सरकार ने फोटो-आधारित सत्यापन के माध्यम से प्रक्रिया को सरल बनाया है।”
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हाल ही में लागू किए गए बेअदबी विरोधी कानून से पंजाब के लोगों को बेहद राहत और संतोष मिला है।
उन्होंने कहा, “सालों तक लोगों को बेअदबी की घटनाओं के कारण दुख सहना पड़ा और बेअदबी में शामिल दोषी अक्सर कमजोर कानूनी प्रबंधों के कारण जमानत प्राप्त कर लेते थे। इस नए कानून में सख्त सजा, भारी जुर्माना, लंबी कैद और उम्रकैद तक की व्यवस्था की गई है।”
उन्होंने कहा कि कानून को पहले ही राज्यपाल से सहमति मिल चुकी है और कानून को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया भर की सिख संगत द्वारा इस कानून को भरपूर समर्थन मिला है। सिर्फ कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि पिछली सरकारें बार-बार लोगों की मांगों के बावजूद सख्त कार्रवाई करने में असफल रहीं, जबकि पंजाब सरकार ने भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
मुख्यमंत्री ने सरकार के प्रति लोगों के भारी समर्थन और प्यार के लिए उनका धन्यवाद करते हुए कहा, “उनकी सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों का पैसा स्कूलों, अस्पतालों, कल्याणकारी स्कीमों और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जाए।”
इस समारोह के दौरान खाद्य एवं सिविल आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक, सीनियर सिविल एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारी, पंचायतों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद थे।
इस समारोह की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर लिखा: “आज संगरूर में, हमने 40 लाख परिवारों की भलाई के लिए ‘मुख्यमंत्री मेरी रसोई योजना’ शुरू की है, जिसके तहत बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए साल में चार बार राशन किटें वितरित की जाएंगी।”
उन्होंने आगे लिखा, “हमारी सरकार मुफ्त बिजली, ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’, किसानों को दिन में निर्बाध बिजली सप्लाई और नहरी पानी जैसी सुविधाएं प्रदान करके समाज के हर वर्ग के जीवन को सुगम बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। गांव सतौज से, हम पूरे राज्य से खंभे हटाने के लिए बिजली की तारों को जमीनदोज करने की ऐतिहासिक पहल भी शुरू कर रहे हैं।”
पोस्ट में आगे लिखा, “पिछली सरकारों ने बेअदबी की घटनाओं पर सिर्फ सियासत की, लेकिन हमने उम्रकैद और 50 लाख रूपए के जुर्माने वाला सख्त कानून लाकर गुरु मर्यादा की रक्षा को सुनिश्चित किया है। ‘रंगला पंजाब’ बनाने की दिशा में यह सफर निरंतर जारी रहेगा।”
 *आप सरकार द्वारा ऐतिहासिक कदम, पूरे राज्य के 40 लाख परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा को मजबूत करके घरेलू बोझ को घटाया*
“मेरी रसोई योजना” भगवंत मान सरकार के कल्याण और लोक-केंद्रित मॉडल को दर्शाती है, जो राजनीतिक बयानबाजी की बजाय आम परिवारों के लिए सम्मान, पोषण और वित्तीय राहत को प्राथमिकता देती है।
ऐसे समय में जब बढ़ते घरेलू खर्च देश भर के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रभावित कर रहे हैं, भगवंत मान सरकार ने लगभग 40 लाख परिवारों को रोजाना जीवन के लिए रसोई की जरूरी सप्लाई की सीधी सहायता करके एक ऐतिहासिक और सहानुभूतिपूर्ण कदम उठाया है।
पिछली सरकारों के विपरीत, जो कल्याण को सिर्फ ऐलानों तक सीमित रखती थी, ‘आप’ सरकार ने खाद्य सुरक्षा के दायरे का विस्तार करते हुए गरीब परिवारों को गेहूं और राशन सहायता के अलावा पौष्टिक जरूरी भोजन पदार्थ उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया है।
पारदर्शी डिलीवरी प्रणालियों, मानक भोजन किटों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक व्यापक पहुंच के माध्यम से, भगवंत सिंह मान सरकार ने स्वस्थ, मजबूत और संतुष्ट पंजाब बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है, जहां कोई भी परिवार अपनी पोषण संबंधी जरूरतों के लिए संघर्ष करने को मजबूर न हो।

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