पंजाबराज्य

दशकों बाद नहरी पानी आखिरी छोर के गांवों तक पहुंचा; रोपड़ नहरी नेटवर्क के तहत सिंचित क्षेत्र में लगभग 200% तक की वृद्धि: बरिंदर कुमार गोयल

चंडीगढ़, 9 मई:

पंजाब के सिंचाई ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत रोपड़ नहरी नेटवर्क का पानी अब अंतिम छोर वाले गांवों तक भी पहुंच गया है। यह उन किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो रहा है, जो लंबे समय से अनिश्चित भूजल पर निर्भर थे। नहरी नेटवर्क के पुनर्जीवन से अब खेतों तक नियमित पानी पहुंच रहा है, जिससे खेती को मज़बूती मिली है और किसानों में नई उम्मीद जगी है।

पंजाब के जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि वर्ष 2025-26 में रोपड़ नहरी नेटवर्क के तहत सिंचित क्षेत्र 29,488 एकड़ से बढ़कर 85,447 एकड़ हो गया है। इसके साथ ही 3,882 एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र को भी सिंचाई के दायरे में शामिल किया जा रहा है, जिससे कुल सिंचित क्षेत्र बढ़कर 89,329 एकड़ तक पहुंच जाएगा। इस 200% वृद्धि को पंजाब में सिंचाई सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के समय पंजाब में नहरी पानी का उपयोग केवल 26.5% था। राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ती जल संकट की चुनौती को देखते हुए मान सरकार ने टिकाऊ जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी। इसी सोच के तहत वर्षों से उपेक्षित पड़ी नहरों, डिस्ट्रिब्यूटरीज़ और खालों का बड़े पैमाने पर सफाई, मरम्मत और पुनर्जीवन का कार्य शुरू किया गया।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के अब स्पष्ट और सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई मुहिम के तहत राज्य पहले ही अपने लक्ष्य का लगभग 78% कार्य पूरा कर चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य धान की बुवाई के मौसम में प्रत्येक किसान तक नहरी पानी पहुंचाना और भूजल पर निर्भरता को कम करना है। लुधियाना और मालेरकोटला क्षेत्र के गांव रुड़का, पंडोरी, जंगपुरा, ढट्ट, ढलेर कलां, नुथूहैड़ी, मनखेड़ी, सुल्तानपुर, बुढ्ढण, भदरावां, बड़ूंदी, राशिन, तुंगाहेड़ी, कंगनवाल सहित कई गांवों में लगभग 40 वर्षों बाद खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है। दशकों तक सूखे पड़े खालों और बंद पड़ी सिंचाई प्रणालियों के दोबारा चालू होने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। किसानों का कहना है कि अब उन्हें खेती के लिए महंगे ट्यूबवेल और बिजली पर पहले की तुलना में कम निर्भर रहना पड़ेगा।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस परिवर्तन का एक प्रमुख कारण लिफ्ट सिंचाई योजनाओं का पुनर्जीवन और विस्तार है। समलाह, पहाड़पुर, लाखेड़ और मिधवां जैसे गांवों में स्टोरेज टैंक और अन्य आवश्यक ढांचा तैयार किया गया है, जिससे पहले असिंचित रहे क्षेत्रों तक भी पानी पहुंचाया जा रहा है। श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र में भी लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के माध्यम से अतिरिक्त 3,882 एकड़ भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का कार्य जारी है।

उन्होंने बताया कि एक अन्य बड़ी उपलब्धि उन लिफ्ट सिंचाई प्रणालियों की बहाली है, जो एक दशक से अधिक समय से बंद पड़ी थीं। मान सरकार और किसानों के संयुक्त प्रयासों से पुरानी पाइपलाइन, पंप और कंट्रोल पैनल की मरम्मत एवं बदलाव किया गया है तथा पंप हाउसिज़ को दोबारा चालू किया गया है। किसानों ने भी खेत स्तर के ढांचे को आधुनिक बनाकर इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप रोपड़ ज़िले की नंगल तहसील में लगभग 1,539 एकड़ अतिरिक्त भूमि को सिंचाई के तहत लाया गया है। नहरी पानी के दीर्घकालिक लाभों को देखते हुए किसानों ने जल वितरण के बेहतर और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने में भी रुचि दिखाई है। इससे पानी की बचत के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार की संभावना बढ़ी है।

इन पहलकदमियों का प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह पंजाब में टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक मज़बूत कदम है। इससे भूजल पर निर्भरता कम होगी, कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मज़बूत होगी। अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंचाकर पंजाब सरकार न केवल सिंचाई ढांचे को पुनर्जीवित कर रही है बल्कि किसानों का विश्वास भी बहाल कर रही है।

श्री गोयल ने कहा कि यह पहल पंजाब के किसानों और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ बनाने की दूरदर्शी सोच के अनुरूप है। साथ ही यह राज्य के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन पानी के संरक्षण को सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।

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