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भगवंत मान सरकार ने ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त करके पंजाब के कर्मचारियों की भलाई के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया, 65,000 से अधिक कर्मचारी होंगे रेगुलर

चंडीगढ़, 30 मई 2026:  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने आज कर्मचारियों के हक में पंजाब के इतिहास के अब तक के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक लेते हुए दशकों पुरानी ठेकेदारी रोजगार प्रणाली को समाप्त करने और सरकारी विभागों में 65,000 से अधिक कामगारों को रेगुलर करने का रास्ता प्रशस्त करने के लिए रूपरेखा को मंजूरी दे दी है।

सरकारी रोजगार व्यवस्था से निजी ठेकेदारों की भूमिका को खत्म करते हुए सरकार और कामगारों के बीच सीधा सरकार-कर्मचारी संबंध स्थापित करने के लिए भगवंत मान सरकार ने हजारों कर्मचारियों, जिन्होंने रेगुलर दर्जे के बिना सालों तक पंजाब को अपनी सेवाएं दी हैं, के लिए रोजगार सुरक्षा, सम्मान और रेगुलर सेवा के लिए स्पष्ट रूप से रास्ता प्रदान करने का फैसला लिया है।

मंत्रिमंडल ने इस फैसले को लागू करने के लिए दो नए अध्यादेशों, लंबित महंगाई भत्ते (डी.ए.) और पेंशन से संबंधित बकाए के समाधान के लिए मंत्री पैनल का पुनर्गठन करने तथा भ्रष्टाचार के मामलों की तेज सुनवाई के लिए 7 विशेष अदालतों की स्थापना को भी मंजूरी दे दी है।

इस फैसले के विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि मंत्रिमंडल ने ‘पंजाब एडहॉक, कॉन्ट्रैक्टुअल, डेली वेज, टेम्पररी, वर्क चार्ज्ड एंड आउटसोर्स्ड एम्प्लॉयीज वेलफेयर एक्ट, 2016’ को निरस्त करने तथा ‘पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्टुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026’ और ‘पंजाब कॉन्ट्रैक्टुअल पर्सनल (मंजूरशुदा खाली असामियों विरुद्ध एब्जॉर्प्शन) बिल, 2026’ को मंजूरी दे दी है। यह कदम आउटसोर्स्ड कर्मचारियों को सीधे सरकारी ठेके के अधीन लाने और रेगुलर रोजगार के लिए स्पष्ट रूपरेखा तैयार करने का रास्ता प्रशस्त करता है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के 65,000 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट वर्करों ने सूबे की सेवा में अपनी जिंदगी के कई-कई साल दिए हैं। इस फैसले के साथ पंजाब सरकार ने उन्हें वह दे दिया है, जो उनका हक है। अब कोई भी ठेकेदार इन कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच खड़ा नहीं होगा।”

इस सुधारात्मक कदम के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन कर्मचारियों को अब सीधा रोजगार, पूरा सम्मान और पक्की नौकरी का स्पष्ट रास्ता मिलेगा। पंजाब सरकार के विभागों और संस्थाओं में निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों को सीधे राज्य सरकार की अपनी रोजगार प्रणाली के अधीन लाया जाएगा, जिससे बिचौलिया ठेकेदारी प्रथा समाप्त हो जाएगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्टुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026’ के तहत आउटसोर्स्ड ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के कर्मचारियों, जिन्होंने पांच साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, को सीधे सरकारी ठेके पर रोजगार के अधीन लाया जाएगा। जोखिम वाली श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारी तीन साल की सेवा पूरी करने के बाद योग्य हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पांच साल की निरंतर आउटसोर्स्ड सेवा के बाद सीधे राज्य सरकार के अधीन रोजगार प्रदान किया जाएगा। इसके बाद सरकारी ठेके पर 10 साल सेवा पूरी करने के बाद, कर्मचारियों को रेगुलर मंजूरशुदा असामियों के विरुद्ध रेगुलर करने के लिए विचार किया जाएगा। दो नए कानून लाए जा रहे हैं, जिनमें से एक आउटसोर्स्ड रोजगार से सीधे राज्य सरकार के अधीन ठेके पर करने के लिए और दूसरा मंजूर खाली असामियों के विरुद्ध सरकारी ठेके से रेगुलर कैडर में करने के लिए है।”

इस पहल के पैमाने को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “51 विभागों में कुल 65,048 आउटसोर्स कामगार इस सुधार के दायरे में आते हैं और 26,000 से अधिक कामगार पहले लाभार्थियों में शामिल होंगे।”
उन्होंने आगे घोषणा की कि जीवन और स्वास्थ्य के लिए जोखिम से संबंधित ड्यूटी निभाने वाले कामगारों पर नीति के तहत तेजी से विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिन कामगारों की रोजाना ड्यूटी में खतरा होता है, उन्हें पांच साल की बजाय तीन साल बाद विचार किया जाएगा। इनमें फायर सर्विसेज कर्मचारी, पी.एस.पी.सी.एल. लाइनमैन, सीवर वर्कर, शहरी स्थानीय संस्थाओं के सेनिटेशन कर्मचारी, कूड़ा-कर्कट संभालने वाले कर्मचारी और फील्ड शिकायत स्टाफ शामिल हैं।”

लाभ लेने वाले विभागों का विवरण देते हुए बयान में कहा गया है कि सुधार में बिजली क्षेत्र के 15,753 कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जिसमें शिकायतों का समाधान करने वाला स्टाफ, पैसको कर्मचारी, मीटर रीडर और नोडल सेंटर वर्कर शामिल हैं। स्थानीय सरकार विभाग के 8,436 कर्मचारी, जिनमें मुख्य रूप से सफाई कर्मचारी, चीनी मिलों, स्पिनफेड और मार्कफेड समेत सहकारी संस्थाओं के 8,373 कामगार; स्कूल शिक्षा के 7,704 कर्मचारी, परिवहन विभाग के 4,746 कर्मचारी और 1,472 आउटसोर्स्ड फायर कर्मचारी शामिल हैं।

इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के 2,688 कर्मचारी, जल आपूर्ति और सेनिटेशन के 1,575 कर्मचारी, कृषि के 1,533 कर्मचारी, जेलों के 1,311 कर्मचारी, तकनीकी शिक्षा के 1,251 कर्मचारी, पी.डब्ल्यू.डी. (बी एंड आर) के 1,570 कर्मचारी, सामान्य प्रशासन विभाग के 1,322 कर्मचारी और मेडिकल शिक्षा के 1,231 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मजदूरों का अब मालिकों से सीधा संपर्क होगा। इस प्रणाली में अब ठेकेदारों के लिए कोई जगह नहीं होगी।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मेहनताने के बिना किसी एजेंसी की कटौती या कमीशन के सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा की जाएंगी। कर्मचारियों को हर कैलेंडर वर्ष में कानूनी प्रसूति लाभ और 10 दिनों की कैजुअल छुट्टी मिलेगी। वे बायोमेट्रिक हाजिरी और आई.एच.आर.एम.एस. प्रणालियों के अधीन भी कवर किए जाएंगे।”

कर्मचारियों की सुरक्षा के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा, “यहां पारदर्शिता और मनमानी वाली कार्रवाई नहीं चलेगी। किसी भी कर्मचारी को लिखित कारण दर्ज किए बिना और सुनवाई का मौका दिए बिना हटाया नहीं जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के 45 दिनों के अंदर लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और अमला एवं वित्त विभागों द्वारा योग्य श्रेणियों को चरणबद्ध तरीके से नोटिफाई किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुख्य सचिव की अगुवाई वाली राज्य स्तरीय अधिकृत समिति इस फैसले को लागू करने की निगरानी करेगी। जबकि कई राज्य ठेकेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, पंजाब इस रुझान को उलट रहा है और ठेकेदारी प्रणाली को समाप्त किया जा रहा है।”

मंत्रिमंडल की ओर से डी.ए. और पेंशन के बकाए की जांच के लिए पैनल का पुनर्गठन

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रिमंडल ने संशोधित वेतन, पेंशन, छुट्टियों के बकाये से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर पर आधारित कैबिनेट सब-कमेटी के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है।

कमेटी 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 के दौरान संशोधित वेतन और पेंशन लाभों के कारण हुए बकाए के भुगतान पर विचार करेगी। इसके अलावा 1 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2024 तक के बकाया डी.ए. और महंगाई राहत के बकाए का अध्ययन करेगी। कमेटी कर्मचारियों और विभिन्न महंगाई भत्तों तथा महंगाई राहत से संबंधित मुद्दों का अध्ययन करेगी।

भ्रष्टाचार के मामलों में तुरंत सुनवाई के लिए 7 विशेष अदालतों को मंजूरी

भ्रष्टाचार निवारक कानून, 1988 के तहत भ्रष्टाचार के मामलों के तेज निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रिमंडल ने पंजाब भर में 7 विशेष अदालतों की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

एस.ए.एस.नगर में तीन अदालतें स्थापित की जाएंगी जबकि जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में एक-एक अदालत स्थापित की जाएगी। मंत्रिमंडल ने इन अदालतों के कामकाज के लिए अतिरिक्त जिला एवं सेशन जजों की 7 रिक्तियों के साथ-साथ सहायक स्टाफ की 63 रिक्तियों के सृजन को भी मंजूरी दे दी है।

पंजाब सुपीरियर जुडिशियल सर्विस रूल्स में संशोधन को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने पंजाब सुपीरियर जुडिशियल सर्विस रूल्स, 2007 के नियम 7, 10, 12 और अनुच्छेद ‘बी’ में संशोधनों को भी मंजूरी दे दी है।

प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य पंजाब में सेवा निभा रहे उच्च न्यायिक अधिकारियों को तरक्की से संबंधित लाभ प्रदान करना है और इससे राज्य की न्यायिक सेवाओं में करियर तरक्की के अवसरों के मजबूत होने की उम्मीद है।

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