उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

बदायूं, गोरखपुर और लखनऊ महिला पीएसी परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई तथा उदा देवी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी: मुख्यमंत्री

  • पीएसी बैंड कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति के लिए नियमावली तैयार करें: मुख्यमंत्री
  • कानून-व्यवस्था से आपदा प्रबंधन तक, सुरक्षा तंत्र के व्यापक आधुनिकीकरण पर मुख्यमंत्री का जोर, कहा सिविल पुलिस से मिलता-जुलता नहीं, विशिष्ट हो पीएसी का गणवेश
  • संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा
  • बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के सुदृढ़ीकरण पर मुख्यमंत्री का फोकस

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की वास्तविक शक्ति उसके प्रशिक्षित, अनुशासित और तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक होते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक और तकनीक आधारित बनाया जाए, ताकि सुरक्षा बलों के जवान हर परिस्थिति में प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों।

गुरुवार को उत्तर प्रदेश प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी), एसडीआरएफ तथा उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास एवं भावी कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कहा कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ प्रदेश की सुरक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और इन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने पीएसी बल का गणवेश सिविल पुलिस से अलग करने की आवश्यकता भी जताई।

मुख्यमंत्री ने पीएसी के डिजिटलीकरण एवं तकनीकी उन्नयन की समीक्षा करते हुए कहा कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि सभी पीएसी वाहनों में जीपीएस एवं डैशकैम स्थापित करने तथा त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश पीएसी एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसके माध्यम से प्रदेश की सभी पीएसी वाहिनियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी, लाइव कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली विकसित किए जाएंगे। इससे कानून-व्यवस्था, चुनावी तैनाती, महिला सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन में बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से महिला बटालियनों के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बदायूं, लखनऊ और गोरखपुर में महिला बटालियनों का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने तीनों बटालियन परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, वीरांगना उदा देवी और वीरांगना झलकारी बाई की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने के निर्देश दिए। यह भी बताया गया कि बलरामपुर, मीरजापुर और जालौन में नई महिला वाहिनियों से संबंधित कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आगामी मानसून को देखते हुए बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी तटों पर 17 पीएसी कंपनियों का विशेष बाढ़ राहत प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मुख्यमंत्री ने सभी उपकरणों की नियमित जांच और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में एसडीआरएफ की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि इसकी टीमें वर्तमान में 12 जनपदों में तैनात हैं तथा संभावित बाढ़ परिस्थितियों को देखते हुए 15 जनपदों में अतिरिक्त तैनाती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। एसडीआरएफ कर्मियों को एनडीआरएफ अकादमी नागपुर, नादिया, पश्चिम बंगाल तथा नंदा देवी इंस्टीट्यूट ऑफ एयरो रेस्क्यू सहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने पीएसी बैंड के कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति की नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए, साथ ही एसडीआरएफ को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से खोज एवं बचाव कार्यों के लिए ह्यूमन लिफ्टिंग ड्रोन की उपयोगिता पर विचार को भी कहा।

उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट, मेट्रो नेटवर्क, आरआरटीएस, न्यायालय परिसरों, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों तथा प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के क्षेत्र में इसकी जिम्मेदारी निरंतर बढ़ रही है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में यूपीएसएसएफ 11 एयरपोर्ट, 4 मेट्रो नेटवर्क, मेरठ आरआरटीएस, लोकभवन, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तथा 5 जनपदीय न्यायालयों की सुरक्षा का दायित्व निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने एसएसएफ में तैनाती के लिए मानकीकरण के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के माध्यम से एयरपोर्ट सुरक्षा संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाते हुए प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता को और मजबूत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने यूपीएसएसएफ की विभिन्न वाहिनियों के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि मुख्यालय एवं प्रथम वाहिनी, लखनऊ के निर्माण कार्य में लगभग 77 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है। गोरखपुर स्थित द्वितीय वाहिनी का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रयागराज, मथुरा, सहारनपुर एवं अयोध्या में प्रस्तावित वाहिनियों से संबंधित कार्यवाहियां भी प्रगति पर हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, तकनीकी उन्नयन, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास तथा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण से जुड़े सभी प्रस्तावों एवं परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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