पंजाबराज्य

नशों पर अंकुश लगाने के लिए डीजीपी गौरव यादव ने पंजाब पुलिस की एएनटीएफ में अत्याधुनिक स्पेशल इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल यूनिट का उद्घाटन किया

चंडीगढ़, 9 जून:

एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की कार्यक्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने आज एएनटीएफ पुलिस स्टेशन, एसएएस नगर में नवस्थापित अत्याधुनिक स्पेशल इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल यूनिट (एसआईटीयू) सहित कई आधुनिक तकनीकी और खुफिया सुविधाओं का उद्घाटन किया।

डीजीपी पंजाब के साथ इस अवसर पर स्पेशल डीजीपी एएनटीएफ कुलदीप सिंह तथा एडीजीपी एएनटीएफ नीलभ किशोर भी उपस्थित थे। उन्होंने एएनटीएफ पुलिस स्टेशन में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) कक्ष, पूछताछ कक्ष (इंटरोगेशन रूम), एमएचसी कक्ष तथा डीएसपी कार्यालय का भी उद्घाटन किया।

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2024 में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा उद्घाटित एएनटीएफ पुलिस स्टेशन, एसएएस नगर भवन को अब एक आधुनिक जांच एवं खुफिया केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जो नशा-विरोधी गतिविधियों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है।

डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि आज शुरू की गई सुविधाएं वैज्ञानिक जांच, साक्ष्यों के डिजिटल विश्लेषण, खुफिया सूचनाओं के संग्रह, तकनीकी निगरानी तथा आपराधिक डेटाबेस तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करेंगी। इससे नारकोटिक्स से जुड़े मामलों की जांच की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रकाश डालते हुए डीजीपी ने बताया कि पटियाला, जालंधर और बठिंडा में अत्याधुनिक एएनटीएफ कार्यालय परिसर पहले से ही कार्यरत हैं, जबकि लुधियाना और फिरोजपुर में नई सुविधाओं का निर्माण जारी है। उन्होंने कहा कि अमृतसर में भी एक समर्पित एएनटीएफ सुविधा स्थापित करने की योजना प्रगति पर है और इसके लिए भूमि का चयन एवं अंतिम रूप दिया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि तकनीक-आधारित नशा-विरोधी कानून प्रवर्तन तंत्र को विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान 11.50 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस राशि से एएनटीएफ मुख्यालय एवं रेंज कार्यालयों में निगरानी प्रणालियों, संचार अवसंरचना, साइबर इंटेलिजेंस क्षमताओं तथा डिजिटल जांच उपकरणों को उन्नत किया गया है। इसके अतिरिक्त एएनटीएफ की तकनीकी क्षमता को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने के लिए 14.16 करोड़ रुपये और आवंटित किए गए हैं।

डीजीपी गौरव यादव ने आगे बताया कि एएनटीएफ पंजाब को स्टेट एनसीओआरडी (नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर) सचिवालय के रूप में नामित किया गया है। इस नई भूमिका के तहत एएनटीएफ विभिन्न विभागों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने, खुफिया जानकारी साझा करने तथा राज्यभर में नशा-विरोधी पहलों की निगरानी के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

पंजाब को नशा-मुक्त राज्य बनाने के लिए पंजाब पुलिस की प्रतिबद्धता दोहराते हुए डीजीपी ने कहा, “हम खुफिया-आधारित पुलिसिंग और आधुनिक प्रवर्तन क्षमताओं के माध्यम से नशा तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने, नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को तोड़ने तथा पंजाब को नशा-मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

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