पंजाबराज्य

बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन सबसे महत्वपूर्ण, सही पोषण और प्रारंभिक प्रेरणा से रखी जाएगी मजबूत नींव: डॉ. बलजीत कौर

चंडीगढ़, 26 जून:

मुख्यमंत्री स.भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब के बच्चों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव रखने के उद्देश्य से पंजाब सरकार के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस संबंध में जानकारी देते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने आज यहां आयोजित विशेष कॉन्क्लेव के दौरान प्रेस वार्ता में कहा कि विभाग द्वारा “पंजाब बाल विकास सम्मेलन 2026” के अंतर्गत बच्चों के समग्र विकास के लिए “नन्हे कदम, बड़ा विकास” अभियान की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने मुख्यमंत्री स.भगवंत सिंह मान की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “पंजाब के बच्चे हमारी सबसे बड़ी पूंजी और प्रदेश का भविष्य हैं। उनके जीवन के प्रारंभिक वर्षों में उचित पोषण, स्नेह और स्कूल-पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराकर हम एक मजबूत और बुद्धिमान पंजाब की नींव रख रहे हैं। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक सभी सुविधाएं पहुंचें।”

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि बच्चे के मस्तिष्क का अधिकांश विकास जीवन के शुरुआती वर्षों में होता है। इसलिए जीवन के पहले 1000 दिन (गर्भावस्था के 270 दिन तथा जन्म के बाद पहले दो वर्षों के 730 दिन) अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में उचित पोषण, प्रेम, संवाद, खेल तथा उत्तरदायी देखभाल (प्रारंभिक प्रेरणा) बच्चे के भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं। उन्होंने बताया कि खेल, बातचीत, स्पर्श, गीत, कहानियों और संवेदनशील देखभाल से बच्चे के मस्तिष्क के तंत्रिका संबंध मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि 0 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए “नन्हे कदम” अभियान के अंतर्गत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रत्येक माह घर-घर जाकर भ्रमण करेंगे, खेल आधारित गतिविधियां करवाएंगे तथा अभिभावकों को आयु के अनुसार मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत जन्म से तीन वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे के लिए एक विशेष रिपोर्ट कार्ड जारी किया जाएगा। इसमें बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास से जुड़े व्यावहारिक प्रश्न होंगे, जैसे कि तीन माह का बच्चा आंखों से वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करता है, मुस्कुराता है या आवाज सुनकर प्रतिक्रिया देता है। इन प्रश्नों के उत्तर “हाँ” या “नहीं” में दर्ज कर बच्चे के विकास का विस्तृत चार्ट तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही चित्रों वाली एक विशेष पुस्तक के माध्यम से अभिभावकों को आयु के अनुसार बच्चों के साथ किए जाने वाले विकासात्मक खेल एवं गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में किसी भी प्रकार की विकासात्मक समस्या या दिव्यांगता की समय रहते पहचान कर उसका समाधान सुनिश्चित करना है।

डॉ. बलजीत कौर ने बाल विकास के पांच प्रमुख स्तंभों की जानकारी देते हुए कहा कि जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम एवं संपूर्ण आहार है। इस दौरान बच्चे को पानी, शहद अथवा घुट्टी देने की आवश्यकता नहीं होती। छह माह के बाद मां के दूध के साथ गाढ़ा, ताजा एवं घर का बना अर्द्धठोस भोजन शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने पूरक आहार के लिए न्यूनतम आहार विविधता, न्यूनतम भोजन आवृत्ति तथा न्यूनतम स्वीकार्य आहार के सिद्धांतों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रतिदिन कम-से-कम पांच खाद्य समूहों—अनाज, दालें/प्रोटीन, सब्जियां, दूध एवं दुग्ध उत्पाद आदि—से संतुलित भोजन मिलना चाहिए।

उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के वजन एवं लंबाई की नियमित निगरानी कर कम वजन, अवरुद्ध वृद्धि तथा गंभीर कुपोषण की शीघ्र पहचान की जाएगी। बच्चों को सामान्य, मध्यम कुपोषण तथा गंभीर कुपोषण की श्रेणियों में वर्गीकृत कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए पोषण ट्रैकर ऐप पर समयबद्ध एवं सटीक डेटा दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।

आंगनवाड़ी केंद्रों में आधारशिला आधारित साझा पाठ्यक्रम तथा खेल आधारित शिक्षा—जैसे कहानियां, फ्लैश कार्ड एवं डिजिटल सामग्री—के माध्यम से बच्चों को विद्यालय के लिए तैयार किया जा रहा है। अब तक 27,307 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन पूरा किया जा चुका है। मिशन आरंभ के अंतर्गत पंजाब के सभी 23 जिलों के 26,209 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भागीदारी से लगभग 1.6 लाख अभिभावक व्हाट्सएप होम लर्निंग अभियान से जुड़े हैं।
वर्ष 2025-26 के दौरान आयोजित ई.सी.सी.ई. दिवस में रिकॉर्ड 15,59,994 अभिभावकों ने भाग लिया, जिनमें 10,76,064 माताएं तथा 4,83,930 पिता शामिल रहे। यह बाल विकास में अभिभावकों की बढ़ती सहभागिता का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बड़े भावुक लहजे में कहा कि यह केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पंजाब के प्रत्येक घर तक खुशहाली पहुंचाने का एक जन आंदोलन है। उन्होंने कहा, “जब एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किसी लाभार्थी के घर जाती है, तो वह केवल जानकारी नहीं बल्कि बच्चे के सुरक्षित भविष्य का विश्वास और माता-पिता के सपनों को साकार करने की उम्मीद भी लेकर जाती है। हमारी सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सम्मानजनक, स्वस्थ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है, जिसका वह अधिकार रखता है।”

सम्मेलन के अंत में सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित गृह भ्रमण करने, पोषण ट्रैकर का सही उपयोग सुनिश्चित करने, देखभाल दिवस एवं ई.सी.सी.ई. दिवस आयोजित करने तथा विशेष सहायता की आवश्यकता वाले मामलों में आशा कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक ही परिसर में संचालित केंद्रों तथा आंगनवाड़ी स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र जैसी अभिनव पहलें लागू की जा रही हैं। विभाग द्वारा पोषण अभियान के अंतर्गत पोषण जागरूकता के लिए वार्षिक कैलेंडर भी जारी किया गया।

सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि पोषण, प्रारंभिक प्रेरणा, विकास निगरानी, स्कूल-पूर्व शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़कर ही पंजाब के प्रत्येक बच्चे के स्वस्थ एवं समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस अवसर पर आयोजित विशेष कॉन्क्लेव में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव श्री गुरकिरत किरपाल सिंह (आईएएस), विशेष सचिव श्री केशव हिंगोनिया (आईएएस), निदेशक डॉ. शेना अग्रवाल (आईएएस) सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं सभी जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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