पंजाबराज्य

जालंधर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 1,201 मामले दर्ज किए, सात महीनों में 1,440 नशा तस्करों को किया गिरफ्तार

चंडीगढ़/जालंधर, 07 अगस्त 2026:

अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टरों से जुड़े विभिन्न अपराधों का पर्दाफाश करने से लेकर नशा तस्करों के नेटवर्क को कमजोर करने तक, जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने संगठित अपराध के लिए न्यूनतम गुंजाइश सुनिश्चित की है।

यह सकारात्मक परिणाम आधुनिक पुलिसिंग रणनीति और बेहतर समन्वय का नतीजा है, जिसके तहत जिला पुलिस ने विभिन्न आपराधिक गिरोहों के अवैध वित्तीय स्रोतों, हथियारों, परिवहन, गुमनामी तथा नए सदस्यों की भर्ती के नेटवर्क को निशाना बनाया।

पंजाब पुलिस द्वारा शुरू किए गए प्रत्येक अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने पिछले सात महीनों के दौरान एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) एक्ट के तहत 1,201 मामले दर्ज किए।

पंजाब पुलिस के ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान के तहत कमिश्नरेट पुलिस ने 1,440 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने 16.810 किलोग्राम हेरोइन, 119 ग्राम मेथामफेटामाइन (आईसीई), 9.274 किलोग्राम अफीम, 24.624 किलोग्राम गांजा, 33.750 किलोग्राम भुक्की, 20 ग्राम कोकीन, 15.200 किलोग्राम चरस तथा 3,130 नशीले कैप्सूल/गोलियां बरामद कीं। इसके अतिरिक्त 11,17,900 रुपये की ड्रग मनी तथा नशीले पदार्थों की तस्करी में प्रयुक्त वाहन भी जब्त किए गए। इस बरामदगी ने न केवल सड़कों से नशीले पदार्थ हटाए, बल्कि संगठित अपराध को वित्तीय सहायता देने वाले नेटवर्क को भी कमजोर किया।

यह कार्रवाई यहीं तक सीमित नहीं रही। इसे अवैध हथियारों के विरुद्ध भी आगे बढ़ाया गया, जिनका उपयोग भय का माहौल पैदा करने और हिंसक अपराधों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान के तहत अवैध हथियारों के सप्लायरों, गैंगस्टरों के सहयोगियों तथा उनकी सहायता करने वालों के विरुद्ध भी समानांतर कार्रवाई की गई। इसी अवधि में कमिश्नरेट पुलिस ने 51 अवैध पिस्तौल और 133 जिंदा कारतूस बरामद किए। साथ ही संगठित अपराधी गिरोहों का समर्थन करने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उन पर लगातार निगरानी रखी गई। इसका उद्देश्य हिंसा होने से पहले ही अपराधियों की हथियारों तक पहुंच रोकना तथा उनके सहयोगी ढांचे को ध्वस्त कर आपराधिक नेटवर्क को कमजोर करना है।

रोकथाम आधारित पुलिसिंग के माध्यम से अपराधियों पर शिकंजा और कसा गया है। कमिश्नरेट पुलिस ने 45 इमरजेंसी रिस्पांस वाहन (ईआरवी) और 14 मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग यूनिट तैनात की हैं, जिनमें 209 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात हैं। इसके अलावा शहर के प्रमुख प्रवेश एवं निकास मार्गों पर स्थापित स्थायी रात्रि नाकों ने निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया है। वाहन डेटाबेस के माध्यम से रियल-टाइम सत्यापन ने चोरीशुदा अथवा संदिग्ध वाहनों को बिना पहचान के ले जाने की संभावनाओं को भी काफी हद तक कम कर दिया है।

तकनीक ने भी अपराधियों के लिए काम करना और कठिन बना दिया है। पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (पीएआईएस), इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी), लगातार विस्तारित किए जा रहे सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क तथा डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला ने वैज्ञानिक पुलिसिंग को काफी मजबूत किया है। अब प्रत्येक जांच में सीसीटीवी फुटेज, वाहनों के रिकॉर्ड, मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिससे अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाना या अपराध के सबूत मिटाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है।

इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली में बुनियादी बदलाव करते हुए अब अलग-अलग अपराधों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय संगठित अपराध को समर्थन देने वाले पूरे आपराधिक तंत्र को ध्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा, “आधुनिक पुलिसिंग अब केवल अलग-अलग गिरफ्तारियों या बरामदगियों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य संगठित अपराधी नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों, हथियारों, लॉजिस्टिक व्यवस्था, तकनीकी संसाधनों और सहयोगी तंत्र को एक साथ निशाना बनाकर उन पर निरंतर दबाव बनाए रखना है। खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान, वैज्ञानिक जांच और जनसहयोग हमें पूरे पंजाब में अपराधियों के लिए उपलब्ध कार्यक्षेत्र को लगातार सीमित करने में मदद कर रहे हैं।”

यह रणनीति केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध की रोकथाम पर भी समान रूप से केंद्रित है। यह देखते हुए कि नशे की लत अक्सर संगठित अपराध को बढ़ावा देती है, जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने अवैध नशा कारोबार को बढ़ावा देने वाली मांग को कम करने के लिए पुनर्वास व्यवस्था को भी मजबूत किया है। जनवरी से अब तक 1,300 व्यक्तियों को नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया, 1,509 व्यक्तियों को आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) केंद्रों में भेजा गया तथा 504 पात्र लाभार्थियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 64-ए के तहत राहत प्रदान की गई।

पुलिस आयुक्त सतिंदर सिंह ने कहा कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक कार्रवाई आपराधिक श्रृंखला की कई कड़ियों को कमजोर करे, न कि केवल अलग-अलग अपराधों तक सीमित रहे। उन्होंने कहा, “चाहे नशा आपूर्ति श्रृंखलाओं को तोड़ना हो, अवैध हथियार बरामद करना हो, गैंग से जुड़े व्यक्तियों की पहचान करनी हो, तकनीक का उपयोग करना हो या रोकथाम आधारित पुलिसिंग को मजबूत करना हो—हर कदम का उद्देश्य संगठित अपराध के संचालन और उसे बनाए रखना कठिन बनाना है। हमारा लक्ष्य केवल अपराधों का खुलासा करना नहीं, बल्कि आपराधिक नेटवर्क को काम करने के लिए आवश्यक स्थान, संसाधन और हौसला ही समाप्त कर देना है।”

इस रणनीति से महत्वपूर्ण जांचों में भी सफलता मिली है। इस वर्ष कमिश्नरेट पुलिस ने बीएसएफ चौक विस्फोट मामले का सफलतापूर्वक खुलासा करते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा उनके पाकिस्तान स्थित संचालकों से संबंधों का पर्दाफाश किया। इसके अतिरिक्त पुलिस ने एक देशविरोधी मॉड्यूल का भी भंडाफोड़ किया, जिस पर पाकिस्तान स्थित संचालकों के साथ संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के आरोप हैं। यह जटिल आपराधिक साजिशों से निपटने में खुफिया-आधारित पुलिसिंग और वैज्ञानिक जांच की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

आंकड़ों से परे, पुलिसिंग में एक बड़ा बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जालंधर कमिश्नरेट पुलिस अब केवल अपराधों का खुलासा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध के लिए उपलब्ध स्थान, संसाधनों और नेटवर्क को भी योजनाबद्ध तरीके से समाप्त कर रही है।

Khwaza Express

Khwaza Express Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2008. The proud journey since 16 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2008.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button