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भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में आकर्षित किया 942 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

सरकार ने बुधवार को बताया कि भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में 942 मिलियन डॉलर (करीब 7,800 करोड़ रुपए) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे को 2014-15 से दिसंबर 2025 के बीच कुल 942 मिलियन डॉलर का एफडीआई मिला, जो इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों की लगातार बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑटोमेटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है।

उन्होंने कहा कि इस नीति के चलते विदेशी निवेश को हाई-स्पीड ट्रेन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, सिग्नलिंग सिस्टम और यात्री व माल ढुलाई टर्मिनलों जैसे कई अहम क्षेत्रों में बढ़ावा मिला है।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अपने खर्च में भी काफी बढ़ोतरी की है। रेलवे के लिए ग्रॉस बजटरी सपोर्ट (जीबीएस) 2013-14 में 29,055 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

इस बढ़े हुए निवेश का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क का विस्तार करना, सुरक्षा बढ़ाना, नई तकनीक अपनाना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना है।

उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू फंडिंग के कारण भारतीय रेलवे को इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिकीकरण में ज्यादा निवेश करने का मौका मिला है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहा है।

रेल मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है। भारत ने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस और स्पेन जैसे देशों के साथ समझौते किए हैं। इन समझौतों के तहत हाई-स्पीड रेल, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट, आईटी सॉल्यूशंस और रेलवे मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जा रहा है।

पिछले एक दशक में भारत ने रेलवे सेक्टर में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस भी तैयार किया है। अब देश में लोकोमोटिव, कोच, वैगन और ट्रैक्शन मोटर, ट्रांसफॉर्मर तथा मेट्रो सिस्टम सहित विभिन्न प्रकार के उपकरण बनाए जा रहे हैं।

इन उत्पादों का संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई विकसित और विकासशील देशों में निर्यात भी किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार, भारत का कुल रेलवे निर्यात 2016-17 से जनवरी 2026 तक 3.35 अरब डॉलर (करीब 26,000 करोड़ रुपए) रहा है।

निर्यात में यह बढ़ोतरी भारत के रेलवे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

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