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देश में ईंधन की कोई कमी नहीं, सरकारी तेल कंपनियां आसानी से कर रही आपूर्ति का प्रबंधन : बीपीसीएल के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर

देश में ईंधन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन ने रविवार को कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सरकारी तेल कंपनियां आसानी से ईंधन की आपूर्ति और खपत का प्रबंधन कर रही हैं।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए जैन ने कहा कि देश में मौजूद करीब एक लाख फ्यूल पंप में से 85,000 का प्रबंधन सरकारी तेल कंपनियों की ओर से किया जाता है और इन सभी पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

हालांकि, जैन ने कहा, “अन्य कई कारणों से छिटपुट मामले हो सकते हैं, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार देश में ईंधन कोई कमी नहीं है।”

बाजार की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए जैन ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें और अन्य संबंधित लागतें अत्यधिक अस्थिर बनी हुई हैं।

उन्होंने बताया कि शिपिंग लागत, बीमा खर्च और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव ने तेल कंपनियों को काफी प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा, “ मौजूदा समय में स्थिति बेहद अस्थिर है और इसके कई पहलू हैं। अगर आपने कच्चे तेल, शिपिंग लागत, बीमा और यहां तक ​​कि विनिमय दरों में आए बदलावों को ध्यान से देखा है, तो आप समझ जाएंगे।”

जैन के अनुसार, विनिमय दरें जो पहले लगभग 89-90 थीं, अब 96 के आसपास पहुंच गई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर बोझ बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव के कारण, तेल कंपनियां वर्तमान में प्रतिदिन 600 करोड़ रुपए से 700 करोड़ रुपए तक का नुकसान उठा रही हैं।

मार्जिन पर दबाव के बावजूद, जैन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पूरे देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना जारी रखे हुए हैं।

इससे पहले, बीपीसीएल के डायरेक्टर फाइनेंस वीआरके गुप्ता ने कहा कि मध्य पूर्व संकट के बीच सरकारी तेल कंपनी रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ रही है और मौजूद समय में कंपनी के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत पहुंच गई है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) में 31 प्रतिशत थी।

मीडिया से बातचीत में गुप्ता ने बताया कि मध्य पूर्व में तनाव के चलते कंपनी ने विविध स्रोतों विशेषकर रूस से कच्चे तेल की खरीद को बढ़ाया है।

इससे पहले वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर 2025) में कंपनी के आयात बास्केट में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत थी।

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