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रिहर्सल की कमी से कमजोर हो रहा अभिनय? जतिन सरना बोले- सिर्फ तकनीक के भरोसे नहीं बनते अच्छे कलाकार

आज के समय में डिजिटल कैमरों और एडिटिंग तकनीक ने शूटिंग को आसान बना दिया है। अब एक सीन को कई बार शूट किया जा सकता है और बाद में एडिटिंग के जरिए उसे बेहतर भी बनाया जा सकता है। लेकिन इस बदलते दौर में एक चीज धीरे-धीरे कम होती जा रही है, और वह है कलाकारों की तैयारी।

पहले कलाकार अपने किरदार को लेकर कई बार रिहर्सल करते थे। थिएटर और वर्कशॉप के जरिए अभिनय को निखारा जाता था, लेकिन अब कई जगह जल्दबाजी देखने को मिलती है। इसी मुद्दे पर अभिनेता जतिन सरना ने आईएएनएस संग बातचीत में खुलकर अपनी राय रखी है।

‘सेक्रेड गेम्स’ और ‘दरबार’ जैसे प्रोजेक्ट्स में अपने अभिनय से पहचान बना चुके जतिन सरना ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “आज के समय में कलाकारों को फिर से रिहर्सल और तैयारी की तरफ लौटने की जरूरत है। तकनीक ने सुविधाएं जरूर बढ़ाई हैं, लेकिन इससे कलाकारों की मेहनत कम नहीं होनी चाहिए।”

जब आईएएनएस ने उनसे पूछा कि आज की फास्ट शूटिंग कल्चर में रिहर्सल और वर्कशॉप जैसी चीजें कम होती जा रही हैं और कई कलाकार जल्दी रीटेक और एडिटिंग पर निर्भर हो गए हैं, तो इस पर जतिन ने कहा, ”बिल्कुल ऐसा हो रहा है। आज सब कुछ डिजिटल रिकॉर्ड होता है, इसलिए लोगों को लगता है कि अगर एक टेक सही नहीं हुआ तो दूसरा ले लेंगे, लेकिन सिर्फ रीटेक और एडिटिंग के भरोसे कोई भी अच्छा कलाकार नहीं बन सकता।”

जतिन ने कहा, ”तकनीक की सुविधा होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कलाकार मेहनत करना छोड़ दें। अभिनय सिर्फ कैमरे के सामने खड़े होकर डायलॉग बोलने का नाम नहीं है। किसी किरदार को अच्छे से निभाने के लिए उसकी सोच, भावनाओं और व्यवहार को समझना पड़ता है, और यह सब बिना तैयारी के संभव नहीं है।”

उन्होंने पुराने दौर को याद करते हुए कहा, ”पहले फिल्मों के पास इतने संसाधन नहीं होते थे। कैमरे सीमित होते थे और रीटेक लेना आसान नहीं होता था। कलाकार और पूरी टीम बहुत समर्पण के साथ काम करती थी। लोग घंटों रिहर्सल करते थे ताकि कैमरे के सामने एक-एक सीन सही तरीके से निकल सके। उसी मेहनत और अनुशासन की वजह से पुराने समय की कई फिल्में आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।”

आज के माहौल पर बात करते हुए जतिन ने कहा, ”अब हर कोई जल्दबाजी में दिखाई देता है। मैंने ऐसे कलाकार भी देखे हैं जो शूटिंग शुरू होने से पहले ही पैकअप का समय पूछने लगते हैं। यह सोच कहीं न कहीं काम के प्रति जुनून को कमजोर करती है। अगर कलाकार सिर्फ समय पूरा करने के लिए काम करेगा तो उसके अभिनय में वह गहराई नहीं आ पाएगी जो दर्शकों को प्रभावित करती है।”

अपनी सोच के बारे में जतिन ने कहा, “मेरे लिए सिनेमा सिर्फ एक प्रोफेशन नहीं बल्कि प्यार है। मैं सिनेमा को जीता हूं। मेरी कोशिश रहती है कि हर प्रोजेक्ट अपना सबसे अच्छा रूप लेकर सामने आए। यह तभी संभव है जब पूरी टीम ईमानदारी और पूरी तैयारी के साथ काम करे। एक अच्छा कलाकार वही होता है जो हर किरदार को पूरी मेहनत और सच्चाई के साथ निभाए।”

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