
भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन से एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी को 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम चुकाने का आदेश दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब नीरव मोदी पहले से ही भारत प्रत्यर्पण और बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का सामना कर रहा है। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया की उस याचिका को सही माना, जिसमें दावा किया गया था कि नीरव मोदी ने अपनी कंपनी से जुड़े एक कर्ज की पर्सनल गारंटी दी थी। अदालत ने माना कि बैंक की मांग वैध है और नीरव मोदी इस बकाया राशि के भुगतान के लिए जिम्मेदार हैं। इस फैसले के बाद बैंक ऑफ इंडिया अब ब्रिटेन के कानूनी प्रावधानों के तहत रकम की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। यह भारतीय बैंकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद दुबई स्थित फायरस्टार डायमंड एफजेडई को दिए गए लोन से जुड़ा है। यह कंपनी नीरव मोदी के कारोबारी समूह का हिस्सा थी। बैंक का आरोप था कि कंपनी द्वारा लिया गया लोन वापस नहीं किया गया और नीरव मोदी ने इसकी पर्सनल गारंटी दी थी। नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालत में इस दावे को चुनौती दी थी। इतना ही नहीं, वह इस मामले में खुद भी कोर्ट में पेश हुआ था। हालांकि, अदालत ने उसकी दलीलों को खारिज करते हुए बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया।
प्रत्यर्पण मामले में भी झटके
यह फैसला नीरव मोदी के लिए कानूनी मोर्चे पर लगातार मिल रही हार की कड़ी में एक और बड़ा झटका है। इसी साल मार्च में लंदन हाई कोर्ट ने उसके भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर याचिका को भी खारिज कर दिया था। नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद है और उसकी कई जमानत याचिकाएं भी पहले ही खारिज की जा चुकी हैं।
पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी
नीरव मोदी 2018 में सामने आए पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उस पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में हजारों करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ था। भारत सरकार और बैंक लगातार देश-विदेश में उसकी संपत्तियों की तलाश और वसूली की कार्रवाई कर रहे हैं।
भारतीय बैंकों के लिए अहम संदेश
यह फैसला सिर्फ बैंक ऑफ इंडिया की जीत नहीं है, बल्कि उन सभी भारतीय बैंकों के लिए अच्छा संकेत है, जो विदेशों में बैठे डिफॉल्टरों से पैसा वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। इससे यह संदेश जाता है कि आर्थिक अपराध करके विदेश भागने वाले लोगों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी कार्रवाई संभव है।



