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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पीएम मोदी का पहला पोस्ट, भगवान बुद्ध के आदर्शों का जिक्र किया

धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर पहला पोस्ट सारनाथ के बारे में किया है। उन्होंने यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) के एक पोस्ट को दोबारा शेयर करते हुए लिखा कि यह भारतीय के लिए गर्व की बात है। इस पोस्ट में बताया गया था कि सारनाथ के प्राचीन बौद्ध तीर्थ स्थल को यूनेस्को ने अपनी वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया है।

पीएम मोदी ने लिखा, “हर भारतीय के लिए गर्व का पल! बहुत खुशी है कि उत्तर प्रदेश के सारनाथ को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया है। सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा नाता है, जिनके ज्ञान, दया और मेलजोल का हमेशा रहने वाला संदेश दुनिया को प्रेरणा देता है। यह पहचान भारत की गहरी सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत का जश्न मनाती है। यह दुनिया भर के और लोगों को सारनाथ आने और भगवान बुद्ध के आदर्शों से जुड़ने के लिए भी प्रेरित करेगी।”

भारत की 45वीं विश्व धरोहर बना सारनाथ

सारनाथ उत्तर प्रदेश की चौथी और देश की 45वीं यूनेस्को विश्व धरोहर है। लगभग 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को यह घोषणा की गई। इस उपलब्धि के साथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल सारनाथ को वैश्विक विरासत के सर्वोच्च मंच पर नई पहचान मिली है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मानचित्र पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। सारनाथ को तीन जुलाई 1998 को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था। लगभग 28 वर्षों बाद मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश के लिए भी विशेष महत्व रखती है। अब तक राज्य में तीनों विश्व धरोहर स्थल- ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी (आगरा क्षेत्र) थे। सारनाथ के शामिल होने से उत्तर प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है।

विश्व धरोहर में सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल

यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। ये दोनों स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर हैं। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के मिलन की स्मृति का प्रतीक है, जबकि पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष तथा अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्मारक शामिल हैं। ये सभी मिलकर सारनाथ के विश्व के प्रमुख बौद्ध आस्था और ज्ञान केंद्र के रूप में हुए विकास की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाते हैं।

सारनाथ में गौतम बुद्ध ने दिया था पहला उपदेश

सारनाथ, वह पावन धरती है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद मानवता को अपना प्रथम उपदेश देकर ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ की शुरुआत की थी। बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल सारनाथ को प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में ‘ऋषिपत्तन’ के नाम से वर्णित किया गया है। यही वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को धर्म का उपदेश देकर करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का संदेश समस्त मानवता तक पहुंचाया। करीब 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध आस्था और तीर्थ परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। यह स्थल आज भी बौद्ध मठ जीवन, प्राचीन स्थापत्य और समृद्ध कला विरासत का साक्षी है।

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