छत्रपति शिवाजी की निर्माता- वीरमाता जीजाबाई

मृत्युंजय दीक्षित
बालपन से ही वीरता की प्रतिमूर्ति – मां जीजाबाई, बचपन से ही शस्त्र सञ्चालन सीखना चाहती थीं औरउनके पिता लखूजी जाधवराव ने जो अपनी कन्या से अत्यंत स्नेह करते थे उनकी इस इच्छा को पूरा करने में कोई कोई कसर नहीं छोड़ी । शस्त्र कौशल में निपुण जीजा को उनके भाई रणचंडिका कहते थे । समय आने पर पिता जाधवराव वीर पुत्री जीजाबाई के लिए शूरवीर वर खोजा । वीर बालिका जीजा ही शाह जी की पत्नी और छत्रपति शिवाजी की मां के रूप में विख्यात हुईं।
जिस समय जीजाबाई अपने भाईयों के साथ शस्त्र चलाना सीख रही थीं उस समय भारत पर मुगल आक्रमण हो रहा था। मुगल आक्रमणकारी भयानक रूप से हिंसा, मारकाट और लूट पाट कर रहे थे। मुगलों के सैनिक सामान्य हिन्दू जनता पर तरह- तरह के अत्याचार कर रहे थे। चारों ओर से मार काट, महिलाओं के अपहरण तथा शीलभंग, मंदिरों के ध्वंस, लूटपाट व आगजनी की ही सूचनाएं आ रही थीं । मुगलों के अमानवीय और निकृष्ट अत्याचारों के कारण हिंदू समाज विचलित था ।
जीजाबाई के पिता लखुजी जाधवराव स्वयं भी शस्त्रास्त्र चलाने में प्रवीण थे। लखुजी के पिता और दादा खेती में अधिक मन लगता थे परंतु लखुजी ने अपने घर के लोगों को सैनिक शिक्षा दी तथा निजी सेना रखना प्रारंभ किया। वेकुलाभिमानी, महत्वाकांक्षी और पराक्रमी थे।
जीजाबाई का विवाह काल और परिस्थिति के अनुकूल छोटी अवस्था में ही हो गया था। होली पर रंगपंचमी का उत्सव लखूजी के घर पर मनाया जा रहा था उस समय मोलाजी अपने बच्चे के साथ उत्सव में शामिल हुए थे नृत्य देखते हुए अचानक लखूजी जाधव ने जीजाबाई और मोलाजी के पुत्र शाहजी को एक साथ देखा तो और उनके मुख से निकला वाह क्या जोड़ी है।मोलाजी ने उनकी बात को सुन लिया और बोले, ”फिर तो मंगनी पक्की है।बालाजी के पुत्र शाहजी भोसले व लखुजी की पत्नी जीजाबाई का विवाह संपन्न हुआ। जीजाबाई ने 6 पुत्र व दो पुत्रों को जन्म दिया उसमें से ही एक शिवाजी थे।
शाह जी ने अपने बच्चों एवं जीजाबाई की रक्षा के लिये उन्हें शिवनेरी के दुर्ग में रखा था क्योंकि उस समय शाह जी को अनेक शत्रुओं से खतरा थ। जब शिवाजी का जन्म हुआ था उस समय उनके पिता शाह जी वहां पर नहीं थे उनको मुस्तफा खां ने बंदी बना लिया था।



