अन्य

फसल विविधीकरण व प्राकृतिक खेती को अपनाएं किसान : सूर्यप्रताप शाही

उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि देश की मात्र 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर उत्तर प्रदेश लगभग 22 प्रतिशत खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन कर राष्ट्र के अन्न भंडार को सुदृढ़ता प्रदान कर रहा है। प्रदेश में फसल सघनता (क्रॉपिंग इंटेंसिटी) 196 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो वैश्विक स्तर की सघन कृषि पद्धतियों में शुमार है। कृषि मंत्री मंगलवार को आईसीएआर-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), लखनऊ के सभागार में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के 37वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी उत्पादकता से आगे: उत्तर प्रदेश की कृषि के भविष्य की पुनर्कल्पना के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

श्री शाही ने कहा कि कृषि एक सतत प्रवाहमान क्षेत्र है, जिसमें विकास की असीम संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के प्रभावी प्रयासों से राज्य का 80 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित हो चुका है तथा नहरों के संजाल से खरीफ के साथ-साथ रबी व जायद फसलों के लिए भी किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

किसानों की उत्पादन लागत घटाने और आमदनी में वृद्धि सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि चालू रबी सत्र में 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को भारी अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के 04 लाख क्विंटल के सापेक्ष तीन गुना रिकॉर्ड वृद्धि है। इसके साथ ही गेहूं और गन्ने की पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करने तथा फसल विविधीकरण को गति देने के उद्देश्य से 10 लाख किसानों को दलहन व तिलहन के उन्नत बीज मिनीकिट निःशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से बाजार मांग और उच्च मूल्य आधारित फसलों (वैल्यू-बेस्ड एग्रीकल्चर) पर अनुसंधान केंद्रित करने का आह्वान किया, जिससे देश दलहन और खाद्य तेलों के उत्पादन में पूर्णतः आत्मनिर्भर बन सके।

मौसम की अनिश्चितताओं और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री ने उपकार और कृषि विश्वविद्यालयों को कम अवधि में तैयार होने वाली प्रजातियों तथा आपातकालीन फसल प्रबंधन तकनीकों को त्वरित गति से किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। मृदा में घटते ऑर्गेनिक कार्बन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने गोवंश आधारित गोबर, गोमूत्र और बायोमास आधारित प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप देने पर विशेष बल दिया।

किसानों व वैज्ञानिकों को किया गया सम्मानित

उत्कृष्ट वैज्ञानिकों की श्रेणी में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के प्रसार निदेशक डॉ. राम बटुक सिंह तथा बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशक डॉ. एन. के. बाजपेई को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के लिए 9 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को सम्मानित किया गया।

फसल विविधीकरण व नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 07 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उपकार के वैज्ञानिक डॉ. रिन्नी सिंह (वैज्ञानिक अधिकारी – पादप प्रजनन एवं जैव प्रौद्योगिकी), डॉ. हिमांशु तिवारी (तकनीकी सचिव, डीजी उपकार) और प्रेमचंद चौरसिया (वैज्ञानिक अधिकारी – एग्रोफोरेस्ट्री) को भी उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

समारोह की अध्यक्षता उपकार के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, बीज प्रमाणीकरण संस्था के उपाध्यक्ष राधेश्याम सिंह, कृषि एवं अनुसंधान के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शनमुगा सुंदरम, उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय कुमार, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, वैज्ञानिक, प्रसार कार्यकर्ता, प्रगतिशील किसान और एफपीओ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Khwaza Express

Khwaza Express Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2008. The proud journey since 16 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2008.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button