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राज्यसभा से खुद भी रिटायर हो रहे उपसभापति हरिवंश, विदाई भाषण में साझा किए अनुभव

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को भावुक विदाई दी। उन्होंने सदन में मल्लिकार्जुन खरगे के संबोधन के बाद अपनी बात रखते हुए 59 रिटायर हो रहे सांसदों को शुभकामनाएं दीं। खास बात यह रही कि हरिवंश नारायण सिंह खुद भी इन 59 सांसदों में शामिल हैं और अब सदन में वापस नहीं लौटेंगे।

अपने संबोधन में उन्होंने संसदीय अनुभवों को साझा करते हुए कई नेताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से उन्होंने शालीनता के साथ अपनी बात रखना सीखा और सदन के नियमों का पालन करना हमेशा याद रहेगा।

मल्लिकार्जुन खरगे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सदन में उनके साथ बैठने का सौभाग्य मिला। उनके व्यापक अनुभव से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला और देश की राजनीति को करीब से समझने का मौका मिला।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की भी उन्होंने सराहना की और कहा कि उनकी शालीनता और संयम से बात रखने का तरीका हमेशा याद रहेगा।

हरिवंश नारायण सिंह ने सदन के अनुभवों को याद करते हुए कहा कि वे खुद को एक ऐसे उपसभापति के रूप में देखते हैं, जो सदन में धैर्यपूर्वक सबकी बातें सुनता रहा। उन्होंने कहा कि इस भूमिका ने उन्हें एक अच्छा श्रोता बनने का संयम और धैर्य सिखाया।

अपने व्यक्तिगत जीवन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका जन्म एक ऐसे गांव में हुआ, जहां अक्सर बाढ़ आती थी। एक साधारण परिवार से निकलकर यहां तक पहुंचने की यात्रा का भी उन्होंने जिक्र किया।

उन्होंने संसद के बदलते स्वरूप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार संसद में आए थे, तब सारी कार्यवाही कागजों पर होती थी लेकिन आज संसद पूरी तरह पेपरलेस हो गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

डिजिटल इंडिया की प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केवल 10 सालों में गांवों की अर्थव्यवस्था भी डिजिटल हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यूपीआई को दुनिया की सबसे बड़ी भुगतान प्रणाली बताया है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी सांसदों के साथ बिताए गए समय को याद करते हुए इसे एक समृद्ध अनुभव बताया और सभी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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