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ईसीएलएसएस : स्पेस में जीवन बचाने वाला सिस्टम, जानें आईएसएस पर हवा और पानी कैसे होता है रिसाइकल

जब एस्ट्रोनॉट्स पृथ्वी से लाखों किलोमीटर दूर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर रहते हैं, तो वहां हवा, पानी और ऑक्सीजन की कोई नई सप्लाई नहीं आ सकती। ऐसे में स्पेस एजेंसीज की पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली यानी ईसीएलएसएस उन्हें जीवित रखने का सबसे महत्वपूर्ण काम करती है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस शानदार सिस्टम यानी ईसीएलएसएस मशीनों के बारे में जानकारी देता है, जिसके अनुसार यह एक जटिल लेकिन परस्पर जुड़ा नेटवर्क है जो हवा, पानी और तापमान को नियंत्रित रखता है। नासा के मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर ने ईसीएलएसएस के विकास, निर्माण और परीक्षण में अहम भूमिका निभाई है। यह सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों को सांस लेने योग्य ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है, कार्बन डाइऑक्साइड हटाती है, पानी को शुद्ध करके फिर से इस्तेमाल करने के लायक बनाने के साथ ही केबिन के अंदर आरामदायक वातावरण भी बनाए रखता है।

ईसीएलएसएस मुख्य रूप से तीन प्रमुख घटकों पर काम करता है- पहला वाटर रिकवरी सिस्टम, दूसरा है एयर रेविटलाइजेशन सिस्टम और तीसरा है ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम।

एक अंतरिक्ष यात्री को रोजाना लगभग एक गैलन पानी पीने, खाना खाने और स्वच्छता के लिए चाहिए होता है। ऐसे में वाटर रिकवरी सिस्टम अंतरिक्ष में पानी की बचत का चमत्कार करती है। यह चालक दल के यूरीन, केबिन की नमी से बनी संघनित पानी और स्पेस वॉक के दौरान पहने जाने वाले सूट ईवीए के अंदर से निकले पानी को इकट्ठा करती है।

सबसे पहले यूरीन प्रोसीजर मूत्र को संसाधित करता है। फिर इस पानी को अन्य अपशिष्ट जल के साथ मिलाकर वाटर प्रोसीजर में भेजा जाता है। यहां पानी बहु-छनन और उत्प्रेरक ऑक्सीकारक से गुजरता है। विद्युत चालकता सेंसर पानी की शुद्धता जांचते हैं। अगर पानी अशुद्ध हो तो उसे दोबारा संसाधित किया जाता है। स्वच्छ पानी भंडारण टैंक में रखा जाता है। वर्तमान में यह प्रणाली स्टेशन पर मौजूद पानी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा रिकवर कर सकती है।

एयर रेविटलाइजेशन सिस्टम केबिन की हवा को साफ रखने का जिम्मा संभालती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और मानव शरीर से निकलने वाली गैसों व सूक्ष्म प्रदूषकों को यह हटाती है। सबसे महत्वपूर्ण काम कार्बन डाइऑक्साइड को अलग करना है, जो सांस लेने के दौरान निकलती है। हवा को सक्रिय चारकोल, उत्प्रेरक ऑक्सीकारक और लिथियम हाइड्रॉक्साइड बिस्तर से गुजारा जाता है। मोलेक्यूलर छलनी कार्बन डाइऑक्साइड को उसके आकार के आधार पर अवशोषित कर लेती हैं।

तीसरा है ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम, जो अंतरिक्ष यात्रियों के सांस लेने के लिए ऑक्सीजन बनाती है। इसमें वाटर रिकवरी सिस्टम से मिले पानी को इलेक्ट्रोलाइस किया जाता है। पानी को विभाजित करने पर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन गैस बनती है। ऑक्सीजन केबिन में छोड़ दी जाती है जबकि हाइड्रोजन को या तो स्पेस में निकाल दिया जाता है या कार्बन डाइऑक्साइड न्यूनीकरण असेंबली में भेजा जाता है। यहां सबेटियर रिएक्टर में हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड से पानी और मीथेन बनता है। पानी फिर से इस्तेमाल होता है और मीथेन को स्पेस में छोड़ दिया जाता है।

यह प्रणाली वायुमंडलीय दबाव, आग का पता लगाने और बुझाने, उचित वेंटिलेशन, तापमान तथा नमी नियंत्रण भी करती है। इससे अंतरिक्ष स्टेशन पर पृथ्वी जैसा वातावरण बना रहता है। नासा के मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर और इंडस्ट्रियल भागीदारों ने इन प्रणालियों को संयुक्त रूप से डिजाइन और परीक्षण किया है। ये सिस्टम आईएसएस के अमेरिकी मॉड्यूल में रेफ्रिजरेटर के आकार वाले रैक में लगाए गए हैं।

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