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अमित असावा: राजस्थान को अपनी कोचिंग में लगातार दो बार रणजी चैंपियन बनाया

भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे नाम हैं जिन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बहुत कम मौके मिले। इसकी वजह से उनकी अंदर मौजूद पूर्ण क्षमता का प्रदर्शन नहीं सका। ऐसे खिलाड़ी एक साधारण और गुमनाम क्रिकेटर के रूप में खेल से विदा हो जाते हैं। लेकिन, कुछ ऐसे भी खिलाड़ी होते हैं जो एक क्रिकेटर के तौर मिली असफलता से निराश नहीं होते और कोच के तौर पर बड़ी सफलता प्राप्त करते हैं।

क्रिकेटर के तौर पर असफल लेकिन कोच के तौर पर बड़ी सफलता हासिल करने वाले भारतीय क्रिकेट के प्रमुख नामों में से एक नाम अमित असाव का है।

अमित असावा का जन्म 12 सितंबर 1963 को इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज थे और दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी किया करते थे।

असावा ने राजस्थान के लिए घरेलू क्रिकेट खेला। 1984 से 1991 के बीच राजस्थान के लिए उन्होंने 26 प्रथम श्रेणी और 1 लिस्ट ए मैच खेले। 42 प्रथम श्रेणी पारियों में अमित ने 1 शतक और 6 अर्धशतक लगाते हुए 1,125 रन बनाए। उनका सर्वाधिक स्कोर 128 रन था। वहीं, 2 विकेट हासिल किए। एकमात्र लिस्ट ए मैच में उन्होंने नाबाद 34 रन की पारी खेली थी।

अमित असावा को एक खिलाड़ी के तौर पर बेशक बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन कोच के तौर पर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। अमित असावा की कोचिंग में हीं राजस्थान ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था। राजस्थान ने असावा की कोचिंग में न सिर्फ पहला रणजी (2010-11) का खिताब जीता, बल्कि अगले साल (2011-12) में इस खिताब का सफलतापूर्वक बचाव भी किया। राजस्थान लगातार दो रणजी खिताब जीतने के बाद फिर से कभी इस खिताब को नहीं जीत सका है।

राजस्थान को अपने निर्देशन में लगातार 2 बार भारतीय घरेलू क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में चैंपियन बनाना अमित असावा के नेतृत्व कौशल और रणनीति और क्रिकेट के प्रति गहरे लगाव को दिखाता है।

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