
पंजाब के लुधियाना (जगराओं) के गांव राजोआणा कलां स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा पातशाही दसवीं मंजी साहिब में हुई फायरिंग की घटना ने पूरी सिख संगत और इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। लेकिन अब लुधियाना देहात पुलिस ने इस मामले को सुलझाते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने फायरिंग करने वाले मुख्य शूटर को गिरफ्तार कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह खूंखार अपराधी महज 5 दिन पहले ही नशा तस्करी के एक मामले में जमानत पर जेल से बाहर आया था और बाहर आते ही उसने रंगदारी वसूलने के लिए गुरुद्वारे जैसे पवित्र स्थान को अपना निशाना बना लिया।
वारदात वाली रात क्या हुआ था? (The Night of the Incident) यह खौफनाक घटना 28 अक्टूबर की सुबह करीब 3:10 बजे की है। रात के अंधेरे में दो नकाबपोश बदमाश मोटरसाइकिल पर सवार होकर गुरुद्वारा मंजी साहिब पहुंचे। इनमें से एक बदमाश माथा टेकने का बहाना बनाकर गुरुद्वारे के अंदर दाखिल हुआ। उस वक्त वहां मौजूद हेड ग्रंथी भाई कुलवंत सिंह ने जब उससे इतनी रात में आने का कारण पूछा, तो उसने बड़ी चालाकी से कहा कि वह माथा टेकने आया है और उसका एक साथी भी पीछे आ रहा है। इंसानियत के नाते हेड ग्रंथी ने उसे चाय आदि पीने के लिए भी पूछा। लेकिन कुछ ही देर बाद, जैसे ही हेड ग्रंथी दूसरी तरफ गए, उस बदमाश ने अपना असली रूप दिखा दिया। उसने अपनी बंदूक निकाली और सीधे मुख्य सेवादार बाबा बलदेव सिंह के रिहायशी कमरे की तरफ फायर कर दिया। गोली लकड़ी और एल्युमीनियम के गेट को चीरती हुई सीधा दीवार में जा लगी। गनीमत यह रही कि उस वक्त कमरे में कोई मौजूद नहीं था या गोली किसी को नहीं लगी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों बदमाश मोटरसाइकिल पर फरार हो गए।
पुलिस की जांच: 200 किलोमीटर खंगाली CCTV फुटेज इस घटना के बाद सिख संगत में भारी रोष था। मामले की गंभीरता को देखते हुए लुधियाना देहात पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। जांच टीमों ने बैकवर्ड और फॉरवर्ड रूट की करीब 200 किलोमीटर तक की सीसीटीवी फुटेज खंगाली। तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) और ह्यूमन इंटेलिजेंस के बेहतरीन तालमेल से पुलिस ने आखिरकार मुख्य शूटर को ट्रेस कर लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान राज सिंह उर्फ राजू के रूप में हुई है, जो फिरोजपुर जिले के नूरपुर (मछीवाड़ा) का रहने वाला है।
साजिश का असली मकसद: ब्लैकमेलिंग और रंगदारी (The Motive) शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि यह कोई धार्मिक द्वेष का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी आपराधिक साजिश थी। यह पूरी वारदात मुख्य सेवादार बाबा बलदेव सिंह को ब्लैकमेल कर उनसे मोटी रंगदारी वसूलने के इरादे से रची गई थी। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि वारदात से कुछ दिन पहले भी आरोपियों ने मुख्य सेवादार को फोन पर धमकियां दी थीं और पैसे की मांग की थी। जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने दहशत फैलाने के लिए इस फायरिंग को अंजाम दिया।
आरोपी राजू का लंबा आपराधिक इतिहास (Criminal Record) एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार किया गया आरोपी राजू जरायम की दुनिया का कोई नया खिलाड़ी नहीं है। पिछले 16 सालों से वह अपराध के दलदल में फंसा हुआ है। साल 2010 से लेकर अब तक उस पर जबरन वसूली, आर्म्स एक्ट और नशा तस्करी (NDPS) के 7 गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। यह इस तरह है:
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2010: धारा 384 (जबरन वसूली), थाना सदर कोटकपूरा।
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2011: धारा 382, 411, थाना सिटी फरीदकोट।
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2016: आर्म्स एक्ट, थाना शाहकोट (जालंधर)।
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2020: धारा 385, 511 और आर्म्स एक्ट, थाना सिटी फरीदकोट।
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2022 से 2025 तक: NDPS एक्ट के तहत सदर जीरा (फिरोजपुर) थाने में लगातार तीन अलग-अलग केस।
हैरानी की बात यह है कि 23 अक्टूबर को ही वह जेल से बाहर आया था और 28 अक्टूबर को उसने इस गोलीकांड को अंजाम दे दिया। अब गुरुद्वारे में फायरिंग का यह मामला उसके खिलाफ आठवां केस बन गया है।
आगे की कार्रवाई (Future Action) इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल 4 आरोपियों को ट्रेस कर लिया है। मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर राजू पुलिस की गिरफ्त में है। दूसरे शूटर और धमकियां देकर इस वारदात की साजिश रचने वाले बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी सलाखों के पीछे डाल दिया जाएगा।



