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E20 Petrol Case : नई गाड़ी दो या पूरी रकम लौटाएं… उपभोक्ता आयोग से Maruti Suzuki को बड़ा झटका, E20 पेट्रोल से बार-बार बंद हुई कार तो दिया यह आदेश

लखनऊ। देश में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर एक अहम उपभोक्ता मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी मानते हुए निर्देश दिया है कि 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसी मॉडल की E20 अनुकूल नई कार उपलब्ध कराई जाए।

यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो कंपनी को वाहन की कीमत करीब 20.50 लाख रुपये, पंजीयन, बीमा और अन्य खर्च लौटाने होंगे। साथ ही एक लाख रुपये मानसिक प्रताड़ना और 10 हजार रुपये वाद व्यय भी अदा करना होगा। यह फैसला रायपुर निवासी डॉ. प्रेमराज देबता की शिकायत पर 14 जुलाई 2026 को सुनाया गया, जिसकी प्रति गुरुवार को उपलब्ध हुई।

जून 2024 में खरीदी थी Grand Vitara Hybrid, पांच महीने बाद शुरू हुई परेशानी

डॉ. प्रेमराज देबता ने जून 2024 में मारुति सुजुकी की नेक्सा डीलरशिप से Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus खरीदी थी। शिकायत के अनुसार, वाहन खरीदते समय डीलर ने इसे दिसंबर 2023 में निर्मित बताया था, जबकि आयोग के समक्ष पेश रिकॉर्ड से पता चला कि कार का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था। डॉ. देबता रोजाना 150 से 200 किलोमीटर की यात्रा करते हैं, इसलिए उन्होंने हाइब्रिड वाहन खरीदा था।

बार-बार बंद हुई कार, टैंक में मिली सफेद परत

करीब पांच महीने बाद, 11 नवंबर 2024 को कार के डैशबोर्ड पर इंजन खराबी का संकेत आया और वाहन बीच रास्ते में बंद हो गया। सर्विस सेंटर ने प्रारंभिक जांच में ईंधन की गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए टैंक खाली कराया। जांच के दौरान टैंक के निचले हिस्से में सफेद रंग का पदार्थ मिला। बाद में दोबारा सफाई के दौरान भी टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में सफेद परत और तरल पदार्थ पाए गए। शिकायत के मुताबिक, मरम्मत के बाद भी वाहन दोबारा खराब हो गया और ईवी मोड ने काम करना बंद कर दिया।

ईंधन जांच में E20 की पुष्टि

मामले की सुनवाई के दौरान पेट्रोल के नमूनों की जांच एसजीएस लैब में कराई गई। रिपोर्ट में ईंधन में एथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई। साथ ही यह भी पाया गया कि टैंक के निचले हिस्से में एथेनॉल अलग होकर सफेद परत के रूप में जमा था। रिपोर्ट के अनुसार ईंधन E20 श्रेणी का था, लेकिन एथेनॉल पृथक्करण के कारण उसकी प्रभावी मात्रा लगभग 6 से 7 प्रतिशत रह गई थी।

आयोग ने माना- उपभोक्ता को नहीं दी गई पर्याप्त जानकारी

आयोग ने अपने आदेश में माना कि संबंधित वाहन E20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, फिर भी उसे उपभोक्ता को बेचा गया। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना। आयोग की अतिरिक्त खंडपीठ के सदस्य डॉ. आनंद वर्गिस ने कहा कि वाहन खरीदते समय उपभोक्ता को यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि यह मॉडल E20 ईंधन के अनुरूप है या नहीं। इसलिए उपभोक्ता राहत पाने का अधिकारी है।

कंपनी ने जताई असहमति, अपील की तैयारी

मारुति सुजुकी की ओर से अधिवक्ता भूपेंद्र जैन ने आयोग के फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि वाहन में मिली समस्या मिलावटी ईंधन से भी जुड़ी हो सकती है। उनका कहना है कि यह मामला E20 से संबंधित नहीं है और कंपनी इस आदेश के खिलाफ अपील करेगी।

देश के शुरुआती अहम फैसलों में माना जा रहा मामला

14 जुलाई 2026 के आदेश में आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों में नई E20 अनुकूल कार नहीं दी जाती, तो कंपनी और अधिकृत डीलर को वाहन की पूरी कीमत, आरटीओ शुल्क, बीमा तथा अन्य सभी खर्च लौटाने होंगे। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे के खर्च का भुगतान भी करना होगा।

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