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मुख्यमंत्री योगी से मिला जेवर एयरपोर्ट डेलीगेशन: एरोड्रम लाइसेंस मिलने से कमर्शियल फ्लाइट्स भरेगी उड़ान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में मंगलवार को एक अहम कदम पूरा हो गया। एयरपोर्ट के एक डेलीगेशन ने मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात कर भारत सरकार द्वारा जारी एरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। लाइसेंस मिलने के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बैठक के दौरान एयरपोर्ट प्रबंधन ने मुख्यमंत्री को प्रोजेक्ट की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एरोड्रम लाइसेंस जारी होने के बाद अब अंतिम नियामकीय अनुमोदनों की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट का एरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम फिलहाल सिविल एविएशन के पास समीक्षा के लिए लंबित है।

सुरक्षा मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर औपचारिक उद्घाटन और व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत की तारीख तय करेगा। जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश-विदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा।

एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ़ स्नेलमैन हैं और इसे चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़ यात्रियों तक की जाएगी, जबकि तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता लगभग सात करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

पहले चरण में टर्मिनल बिल्डिंग का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्ग मीटर होगा, जिसमें 48 चेक-इन काउंटर, नौ सुरक्षा जांच लेन और नौ इमिग्रेशन काउंटर होंगे। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज और 28 एयरक्राफ्ट पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे को इस तरह विकसित किया गया है कि वह प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन को संभाल सके। एयरपोर्ट परिसर में एक आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी विकसित किया जा रहा है।

शुरुआती चरण में कार्गो क्षमता लगभग 2.5 लाख टन प्रतिवर्ष होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 1.5 मिलियन टन तक करने की योजना है। तकनीकी दृष्टि से भी एयरपोर्ट को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।

यात्रियों को तेज और सहज यात्रा अनुभव देने के लिए डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रोसेसिंग, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसे प्रावधान लागू किए जा रहे हैं। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा प्रणाली, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना जैसी सुविधाएं भी स्थापित की जा रही हैं।

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