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घाघरा नदी के पुल की दो महीने में होगी मरम्मत, छोटे वाहनों के लिए पंटून पुल, भारी वाहनों का होगा डायवर्जन

  • हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गोंडा, बहराइच और बाराबंकी के जिलाधिकारियों से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा 

घाघरा नदी पर बने संजई पुल की जर्जर हालत के बीच जान जोखिम में डालकर गुजरने वालों के लिए अच्छी खबर है।  राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से कहा कि, दो महीने के भीतर पुल का मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। मानसून से पहले पुल दुरुस्त करने की कोशिश है। छोटे वाहनों के लिए अस्थायी पंटून पुल बनाया जा रहा है। 15 अप्रैल तक आंशिक यातायात सुचारू किया जाएगा।

घाघरा नदी के इस खस्ताहाल पुल से किसी अप्रिय हादसे को टालने की ये कोशिशें हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सामने आ रही हैं।

एडवोकेट आशीष कुमार सिंह ने वक्त रहते पुल की मरम्मत के संबंध में पीआईएल दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने बड़े जनमानस की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई शुरू की और अब इसमें महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।

हाईकोर्ट ने बहराइच, गोंडा और बाराबंकी के जिलाधिकारी को निर्देशित किया है कि वे अगली सुनवाई से पहले इस प्रकरण की प्रगति के संबंध में शपथ पत्र दाखिल करें। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एवं उसकी कार्यदायी संस्था को भी मरम्मत कार्य की प्रगति रिपोर्ट (Status Report) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

याचिकाकर्ता द्वारा दायर अंतरिम राहत प्रार्थना-पत्र, जिसमें टोल शुल्क को स्थगित करने की मांग की गई है, उस पर भी कोर्ट ने संज्ञान लेकर राज्य एवं अन्य विपक्षी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि मरम्मत कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। मानसून सत्र शुरू होने से पहले काम पूरा करने का प्रयास सुनिश्चित करें। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 25 मई मुकर्रर की है।

बड़े वाहनों के लिए डायवर्जन 

लखनऊ से घाघरा होकर जाने वाले भारी वाहनों को पुल की मरम्मत होने तक अयोध्या–गोंडा–बहराइच मार्ग के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा। डायवर्जन से लोगों की थोड़ी मुश्किलें जरूर बढ़ेंगी। क्योंकि लखनऊ से संबंधित जिलों की दूरी पहले की अपेक्षा दोगुनी हो सकती है। रोडवेज हो या फिर निजी यातायात वाहन-उनका किराया भी बढ़ने की संभावना है। बहरहाल, पुल की मरम्मत के लिए भारी वाहनों के डायवर्जन के सिवाय प्रशासन के पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है।

बढ़ जाएगी जिम्मेदारी 

चूंकि ये मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है। ऐसे में क्षेत्रीय जनता, व्यापारिक गतिविधियों एवं आवागमन पर इसके प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए सभी पक्षों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।

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