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यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर बढ़ी हलचल, 7 सीटों के बाद किसके खाते में जाएगी 10वीं सीट?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। अगले दो महीनों में इन सीटों से जुड़ी चुनाव और चयन की प्रक्रिया पूरी होने की बात कही जा रही है। राज्यसभा की 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इनमें बीजेपी की आठ, सपा की एक और बसपा की एक सीट शामिल है।

बसपा के राज्यसभा में भी खाली होने की स्थिति के बीच अब राजनीतिक दलों की नजर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास मौजूद अतिरिक्त वोटों पर है। वहीं, मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर सपा के खाते में दो सीटों का गणित बनता दिखाई दे रहा है।

किन सांसदों का कार्यकाल हो रहा खत्म?

25 नवंबर को कार्यकाल पूरा करने वाले बीजेपी के राज्यसभा सदस्यों में पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं।

डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। ऐसे में उनकी सीट भी चुनाव के दायरे में आएगी।

इसके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।

अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में कार्यक्रम आने की चर्चा

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में घोषित हो सकता है। आमतौर पर अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया में करीब 20 दिन का समय लगता है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। हालांकि, पिछले एक वर्ष में छह विधायकों के निधन के बाद मौजूदा संख्या 397 रह गई है। दिए गए मौजूदा गणित के अनुसार राज्यसभा की एक सीट के लिए करीब 37 विधायकों के वोट की जरूरत होगी।

सपा के खाते में दो सीटों का गणित

विधानसभा में बसपा के पास पहले ही कोई विधायक नहीं है। रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी राज्यसभा में भी प्रतिनिधित्व विहीन हो जाएगी।

सपा के पास 101 विधायक बताए गए हैं। इस संख्या के आधार पर दो राज्यसभा सीटों के लिए उसका गणित बनता है और करीब सात वोट अतिरिक्त बचने की बात कही जा रही है।

BJP-NDA के पास कितने वोट?

दिए गए विधानसभा गणित के अनुसार बीजेपी के पास 256 विधायक हैं। सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए की संख्या करीब 289 बताई गई है।

इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के दो विधायकों के समर्थन से यह संख्या 294 तक पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि, सुभासपा के दो विधायकों के सपा की ओर झुकाव की चर्चा के चलते एनडीए की प्रभावी संख्या करीब 292 मानी जा रही है।

इस गणित के मुताबिक बीजेपी और उसके सहयोगी दल सात सीटें जीतने की स्थिति में बताए जा रहे हैं। इसके बाद बचने वाले अतिरिक्त वोट दूसरी पसंद के वोटों के जरिए 10वीं सीट के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

10वीं सीट पर नजर, दूसरी पसंद के वोट बनेंगे अहम

राज्यसभा चुनाव की वोटिंग व्यवस्था में दूसरी पसंद के वोट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में सात सीटों के बाद एनडीए के पास बचने वाले वोट और अन्य दलों के अतिरिक्त वोट 10वीं सीट के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियां भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में राज्यसभा की 10 सीटों के साथ विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर भी राजनीतिक दलों की रणनीति पर नजर रहेगी।

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